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नामसाई घोषणा और असम-अरुणाचल सीमा विवाद के बीच पहला 'बॉर्डर पिलर' क्यों है ऐतिहासिक?

नामसाई घोषणा पर दोनों राज्यों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की मौजूदगी में साइन किए थे. नामसाई घोषणा को आपसी सहमति से और लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखकर समाधान के लिए तैयार किया गया.

नामसाई घोषणा और असम-अरुणाचल सीमा विवाद के बीच पहला 'बॉर्डर पिलर' क्यों है ऐतिहासिक?
असम-अरुणाचल सीमा पर पहला बॉर्डर पिलर बना तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.
  • असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच पहला बॉर्डर पिलर पक्के-केसांग जिले में स्थापित किया गया है
  • बॉर्डर पिलर लगाने से दोनों राज्यों के बीच दशकों से चली आ रही सीमा विवाद की अनिश्चितता खत्म हो गई है
  • नामसाई घोषणा पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की मौजूदगी में दोनों राज्यों ने सहमति से हस्ताक्षर किए थे
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असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच पहला 'बॉर्डर पिलर' स्थापित होने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है. उन्होंने कहा कि इससे दोनों राज्यों के बीच बॉर्डर पर दशकों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो गई है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया गया है. नामसाई घोषणा पर हस्ताक्षर होने के बाद असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच पहला 'बॉर्डर पिलर' पक्के-केसांग जिले में लगाया गया है. यह सच में बहुत बड़ी बात है, क्योंकि इससे हमारी अंतर-राज्यीय सीमा पर दशकों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अष्टलक्ष्मी क्षेत्र एक साथ मिलकर आगे बढ़ रहा है. अमित शाह के मार्गदर्शन में हम इन प्रयासों को जारी रखेंगे. इन प्रयासों में उनके समर्थन के लिए मुख्यमंत्री पेमा खांडू का आभार."

क्यों है ऐतिहासिक

खुद हिमंत विस्वा ने एक बयान में कहा, "बॉर्डर पिलर का लगना असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच स्पष्टता, सहयोग और विश्वास का प्रतीक है. इस कदम से बॉर्डर के गांवों में स्थायी शांति और प्रशासनिक निश्चितता आएगी, जो कई दशकों से अस्पष्टता से प्रभावित थे." मुख्यमंत्री ने कहा कि असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद, जिसमें कई जिलों में कई हिस्से शामिल थे, ने अक्सर अधिकार क्षेत्र को लेकर भ्रम पैदा किया है, जिससे बॉर्डर इलाकों में विकास के कामों और सेवाओं पर असर पड़ा है. इस समझौते में ऐतिहासिक रिकॉर्ड, जमीनी हकीकत और स्थानीय समुदायों की भलाई को प्राथमिकता दी गई है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यह समझौता टिकाऊ हो और सीमा पर रहने वाले लोगों को मंजूर हो. 

नामसाई घोषणा क्या है

नामसाई घोषणा पर दोनों राज्यों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की मौजूदगी में साइन किए थे. नामसाई घोषणा को आपसी सहमति से और लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखकर समाधान के लिए तैयार किया गया. जुलाई 2022 में ‘नामसाई घोषणापत्र' पर हस्ताक्षर होने के बाद में बार्डर पिलर अब जाकर स्थापित हुआ है.हस्ताक्षर से पहले दोनों राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों की क्षेत्रीय समितियां गठित की गईं, जिन्हें संयुक्त रूप से विवादित क्षेत्रों का दौरा करने, ऐतिहासिक रिकॉर्ड की जांच करने तथा स्थानीय समुदायों के साथ संवाद के माध्यम से आपसी सहमति से समाधान निकालने की जिम्मेदारी सौंपी गई. जब दोनों राज्यों के अधिकारी सहमत हुए फिर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की मौजूदगी में हस्ताक्षर कर इस विवाद का अंत कर दिया.

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