Supreme Court on Halala case: सुप्रीम कोर्ट में आज निकाह हलाला मामले का जिक्र हुआ. CJI सूर्यकांत की पीठ के समक्ष इस मामले में सुनवाई की मांग हुई है. भाजपा नेता एवं वकील अश्विनी उपाध्याय ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में निकाह हलाला से जुड़े मामले का उल्लेख किया. उपाध्याय ने अदालत से कहा कि आज एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, कुछ गिरोह निकाह हलाला जैसी प्रथाओं के लिए महिलाओं को मजबूर कर रहे हैं. वो पैसे भी उगा रहे हैं. उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला भी है और इस तरह की घटनाएं उस फैसले का गंभीर उल्लंघन हैं . इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा - हमें इसकी जानकारी है. हम इस मामले की जांच करेंगे.
इलाहाबाद कोर्ट ने डबल हलाला के नाम पर सामूहिक दुष्कर्म पर कही थी ये बात
बता दे कि पिछले महीने इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाला हलाला की आड़ में नाबालिग लड़की के साथ बार-बार दुष्कर्म के आरोपियो की केस रद्द करने संबंधी याचिका ये कहते हुए खारिज कर दी थी कि पॉक्सो अधिनियम पर्सनल लॉ से ऊपर है. बताया जा रहा है कि 2016 के दौरान जब शिकायतकर्ता नाबालिग थी तो निकाह हलाला के नाम पर 9 व्यक्तियों ने उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया और बाद में 2025 में व्यस्क होने के बाद उसके साथ डबल हलाला के नाम पर भी कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया. कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि यदि हलाला की आड़ में एक नाबालिग यदि हलाला की आड़ में नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाया जाता है तो भले ही उसने तलाक देने वाले व्यक्ति से फिर शादी की इच्छा जताई हो तब भी निश्चित तौर पर पॉस्को एक्ट के तहत केस लगेगा.बता दें कि आरोपियों के खिलाफ अमरोहा के सैदनागली थाने में मामला दर्ज किया गया था.
तब निकाह हलाला एक वैध रस्म थी - याचिकार्ताओं का वकील
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि 2016 में शरिया कानून के तहत तीन तलाक लागू था. निकाह हलाला एक वैध रस्म है. क्योंकि लड़की ने बालिग होने के एक साल के अंदर इसे अस्वीकार नहीं किया इसलिए शादी मान्य थी. वहीं राज्य सरकार और शिकायकर्ता के वकील ने दलील दी कि ये आरोप साफतौर पर नाबालिग के यौन शोषण को दिखा रहे हैं. उसके साथ बाद में डबल हलाला के नाम पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया. उन्होंने दलील दी कि पर्सनल लॉ को भारतीय न्याय संहिता के तहत सामूहिक दुष्कर्म के कृत्यों से बचने की ढाल नहीं बनाया जा सकता. कोर्ट ने माना कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म और बाद में उसकी आड़ में बहुत ही बर्बर और वीभत्स सामूहिक दुष्कर्म का मामला है.
इंडिपेंडेंट थॉट बनाम केंद्र सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र
कोर्ट ने ‘इंडिपेंडेंट थॉट बनाम केंद्र सरकार' के मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय का हवाला भी दिया जिसमें कोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम को प्राथमिकता दी थी और 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ कानूनी तौर पर शारीरिक संबंध बनाने की किसी भी संभावना को खत्म किया था.
(इनपुट भाषा से भी)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं