काशी में एक शख्स का झगड़ा हो गया, जिसमें उसकी नाक कट गई. कटी हुई नाक लेकर ये शख्स एक ऋषि के पास गए और कहा कि इसे जोड़ दीजिए. ऋषि ने शख्स की कटी हुई नाक को ध्यान से देखा और फिर कुछ ही देर में उसे जोड़ दिया. ये घटना लगभग 2500 साल पहले की है और शख्स की नाक जोड़ने वाले महर्षि थे आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी के जनक महर्षि सुश्रुत. भारत ही नहीं दुनियाभर में लोग उन्हें 'सर्जरी के पितामह' मानते हैं. हाल ही में दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े सर्जिकल संस्थान 'रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग' के 'प्लेफेयर ऑडिटोरियम' में महर्षि सुश्रुत की 90 किलोग्राम वजनी कांसे (ब्रॉन्ज) की प्रतिमा लगाई गई है.
कौन थे महर्षि सुश्रुत?
भारत के महान ऋर्षियों में से एक महर्षि सुश्रुत को दुनिया का पहला सर्जन माना जाता है. महर्षि सुश्रुत की दूरदर्शिता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने 2500 साल पहले प्लास्टिक सर्जरी कर डाली थी. महर्षि सुश्रुत ने लगभग 2600 साल पहले 300 से ज्यादा अलग-अलग तरह की थीं. इतना ही नहीं, इन सर्जरी को करने से पहले वह लगभग 124 अलग-अलग सर्जिकल उपकरण भी बना चुके थे. वह पत्ते, कीड़े आदि को भी उन्होंने सर्जरी में इस्तेमाल किया, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था. सर्जरी से जुड़े अपने ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'सुश्रुत संहिता' लिखी. 'सुश्रुत संहिता' को सर्जरी पर दुनिया का पहला ग्रंथ माना जाता है.

1120 बीमारियों का रिकॉर्ड जुटाया था
बताया जाता है कि महर्षि सुश्रुत ने गुरु दिवोदास धन्वंतरि से आयुर्वेद की शिक्षा ली थी. इसके बाद लोगों की सेवा में जुट गए. महर्षि सुश्रुत सिर्फ डॉक्टर नहीं थे, वह एक अध्यापक, वैज्ञानिक और मानव जाति के सच्चे हितैषी थे. उनका कहना था- 'जो रोगी के दुख को अपना दुख समझे, वही सच्चा वैद्य है.' भारत में 15 जुलाई को सुश्रुत दिवस मनाया जाता है. आधुनिक मेडिकल साइंस को आज भी उनका ज्ञान रास्ता दिखा रहा है. सुश्रुत की सबसे बड़ी देन 'सुश्रुत संहिता' है, जिसमें उन्होंने अपने सर्जरी के तरीकों को विस्तार से लिखा है. यह आयुर्वेद का एक प्रमुख ग्रंथ है, जो मुख्य रूप से सर्जरी पर आधारित है. इसमें 184 अध्याय और 1120 रोगों, 700 औषधीय पौधों, 64 खनिज और 57 पशु-उत्पादों का जिक्र किया गया है. यह ग्रंथ केवल सर्जरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बाल रोग, स्त्री रोग, विष विज्ञान, मानसिक रोग और शरीर रचना का भी विस्तृत विवरण किया गया है.
यूके के लोग महर्षि सुश्रुत के सामने नतमस्तक
बता दें कि आधुनिक शल्य चिकित्सा की शुरुआत लगभग 400 वर्ष पहले मानी जाती है. यूरोप में स्कॉटलैंड के मूल निवासी डॉक्टर ने आधुनिक शल्य चिकित्सा यानी सर्जरी का पहला ऑपरेशन किया था. हालांकि, इससे हजारों साल पहले महर्षि सुश्रुत 300 से ज्यादा सर्जरी कर चुके थे. भारत के इस महान महर्षि के आगे यूके के लोग भी नतमस्तक हैं. बीते शुक्रवार को यूके के 'रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग' में महर्षि सुश्रुत की प्रतिमा लगाई गई. इस कार्यक्रम का आयोजन यूके में रहने वाले तेलुगु मूल के सर्जन प्रोफेसर चंद्रा चेरुवू के नेतृत्व में किया. इस प्रतिमा को प्रोफेसर चेरुवू और उनके परिवार द्वारा बनाए गए 'चेरुवू फैमिली फाउंडेशन' ने दान किया है. महर्षि सुश्रुत की प्रतिमा को तमिलनाडु के तिरुवनंतमामलाई के एक मूर्तिकार ने तैयार किया है.
Consul General unveiled the bronze sculpture of Sage Sushruta, revered as the Father of Surgery, at the Royal College of Surgeons of Edinburgh @RCSEd .
— India In Scotland (@IndiaInScotland) June 19, 2026
The ceremony celebrated India's ancient medical heritage, the historical India-Scotland links in medicine and surgery, and the… pic.twitter.com/xM59OcKCeM
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आंध्र प्रदेश के रहने वाले प्रोफेसर चेरुवू ने महर्षि सुश्रुत पर एक किताब भी लिखी है, जिसमें सबूतों के आधार पर यह बताया गया है कि दुनिया की पहली सर्जरी कब और कहां हुई थी. पुस्तक का नाम 'महर्षि सुश्रुत: ए कम्पेंडियम - फादर ऑफ सर्जरी' है. इस प्रतिमा और किताब दोनों को स्वीकार करके, रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग ने पूरी दुनिया के सामने इस बात की पुष्टि कर दी कि महर्षि सुश्रुत ही वास्तव में 'सर्जरी के पितामह' हैं.
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