20,000 किलोमीटर दूर बैठे भारतीय मूल के डॉक्टर ने रोबोट के जरिए किया बाईपास ऑपरेशन, हर कोई हैरान
मेडिकल साइंस का सबसे बड़ा चमत्कार 20 हजार किलोमीटर दूर दूसरे देश में बैठे भारतीय डॉक्टर ने भारत के मरीज का किया ऑपरेशन.
आज दुनिया भर में विज्ञान और टेक्नोलॉजी ने मिलकर कितनी उन्नति कर ली ये बताने की जरूरत नहीं है. जरा सोचिए, मरीज भारत के एक अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर के बेड पर लेटा है और उसका ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर साहब उससे 20,000 किलोमीटर दूर किसी दूसरे देश में बैठे हैं. सुनने में यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन यह बिल्कुल सच है. हाल ही में ऑल इंडिया रेडियो समाचार ने एक्स पर पोस्ट शेयर कर इसकी जानकारी दी थी.
An Indian-origin cardiac surgeon Dr. Sudhir Srivastava, has set a world record by performing the 𝐥𝐨𝐧𝐠𝐞𝐬𝐭 𝐝𝐢𝐬𝐭𝐚𝐧𝐜𝐞 𝐫𝐨𝐛𝐨𝐭𝐢𝐜 𝐭𝐞𝐥𝐞𝐬𝐮𝐫𝐠𝐞𝐫𝐲 from Guyana in India using a Made-in-India surgical robotic system technology.
— All India Radio News (@airnewsalerts) June 4, 2026
The world's longest-distance… pic.twitter.com/2P1Cb9elDz
भारतीय मूल के एक मशहूर हार्ट सर्जन ने दुनिया की सबसे लंबी दूरी की रोबोटिक टेलीसर्जरी (Robotic Telesurgery) करके एक नया इतिहास रच दिया है. उन्होंने इतनी दूर बैठकर भारत में एक मरीज के दिल का सफल ऑपरेशन किया है.
20,000 किलोमीटर दूर से हुआ ऑपरेशन-
इस अद्भुत ऑपरेशन को अंजाम दिया है भारतीय मूल के हार्ट सर्जन डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने. जब यह ऑपरेशन हो रहा था, तब डॉ. सुधीर भारत से 20,000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर, गयाना (Guyana) देश में मौजूद थे. वहीं, उनका मरीज भारत में था. डॉ. सुधीर ने इतनी लंबी दूरी के बावजूद, बिना किसी रुकावट के रोबोट की मदद से मरीज की कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (Coronary Artery Bypass Surgery) को सफलतापूर्वक पूरा किया. इसे दिल का एक बेहद जटिल और बड़ा ऑपरेशन माना जाता है, जिसे आम भाषा में लोग बाईपास सर्जरी भी कहते हैं.
भारत में बनी रोबोटिक तकनीक का हुआ इस्तेमाल-
इस पूरे ऑपरेशन की सबसे गर्व करने वाली बात यह है कि इसमें जिस सर्जिकल रोबोटिक टेक्नोलॉजी (Surgical Robotic Technology) का इस्तेमाल किया गया, उसे भारत में ही डेवलप यानी तैयार किया गया है. जिसका नाम SSI Mantra है.
इस मेड-इन-इंडिया रोबोटिक तकनीक की मदद से डॉक्टर ने गयाना में बैठकर कंप्यूटर कंसोल के जरिए रोबोटिक हाथों को निर्देश दिए. भारत में मौजूद रोबोट ने डॉक्टर के हाथों के इशारों को हूबहू पकड़ा और मरीज के दिल की बारीकी से सर्जरी कर दी. इंटरनेट और आधुनिक तकनीक के तालमेल से यह काम इतनी सटीकता से हुआ कि दूरी का पता ही नहीं चला.
क्या होती है रोबोटिक टेलीसर्जरी?
रोबोटिक टेलीसर्जरी को आसान भाषा में टेलीसर्जरी या रिमोट सर्जरी कहते हैं. इसमें डॉक्टर मरीज के पास मौजूद नहीं होते. डॉक्टर एक खास तरह के मास्टर कंट्रोलर (कंसोल) पर बैठते हैं, जहां उन्हें स्क्रीन पर मरीज के शरीर के अंदर का हिस्सा 3D में साफ दिखाई देता है. डॉक्टर जैसे-जैसे अपने हाथ हिलाते हैं, मरीज के पास खड़ा रोबोटिक सिस्टम ठीक उसी तरह ऑपरेशन करता जाता है.

भविष्य के लिए रोबोटिक टेलीसर्जरी ने नए रास्ते खोल दिए हैं. (Image NDTV)
सुरक्षा का रखा गया ध्यान-
सर्जरी के लिए खास फाइबर इंटरनेट का इस्तेमाल किया गया था, ताकि नेटवर्क बीच में बंद न हो और कोई साइबर खतरा भी न हो. इतनी दूर से सर्जरी में सबसे बड़ा सवाल मरीज की सुरक्षा का होता है. इसे देखते हुए इंदौर में डॉक्टरों की एक पूरी टीम मौजूद थी. अगर किसी वजह से तकनीकी दिक्कत आती, तो वहां मौजूद डॉक्टर तुरंत सर्जरी संभाल लेते.
क्या कहती है रिसर्च-
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में छपी ये स्टडी बताती है कि अब अस्पतालों में रोबोट का इस्तेमाल कैसे बढ़ रहा है. इसमें बताया गया है कि इनसे मरीजों के इलाज में क्या-क्या फायदे मिल रहे हैं, कौन सी दिक्कतें सामने आ रही हैं, और आने वाले टाइम में हेल्थकेयर पर इनका क्या असर पड़ेगा.
आम आदमी को इससे क्या फायदा-
इस बड़ी कामयाबी ने मेडिकल की दुनिया में भविष्य के लिए कई नए रास्ते खोल दिए हैं. रिमोट रोबोटिक सर्जरी की बढ़ती ताकत से अब यह मुमकिन हो पाएगा कि दुनिया के किसी भी कोने में बैठा बड़ा और स्पेशलिस्ट डॉक्टर, गांव या किसी छोटे शहर के मरीज का इलाज कर सकेगा.
क्या होती है बाईपास सर्जरी?
बाईपास सर्जरी कोरोनरी धमनी बाईपास ग्राफ्टिंग), हार्ट के ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है. यह तब किया जाता है जब प्लाक के निर्माण के कारण कोरोनरी आर्टरी संकरी हो जाती हैं या बंद हो जाती हैं, जिससे हार्ट की मांसपेशियों तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा सीमित हो जाती है.
क्या बाईपास सर्जरी में कोई साइड इफेक्ट है?
बाईपास सर्जरी एक बड़ी ओपन-हार्ट प्रक्रिया है, इसलिए इसमें कुछ जोखिम शामिल हैं-
- ब्लीडिंग
- इंफेक्शन
- स्ट्रेस
- याददाश्त
- किडनी की समस्या
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