- तेलंगाना के बेगमपेट SHO पद पी. सैदुलु की बेटी अमीक्षा पुलिस की वर्दी से बचपन से प्रभावित
- अमीक्षा ने अपने पिता के साथ पुलिस ड्यूटी में हिस्सा लेकर अपना पुलिस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया
- अमीक्षा ने पुलिसकर्मियों से बातचीत की और विसर्जन आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था देखी
चेहरे पर आत्मविश्वास, आंखों में खुशी, कंधे पर आईपीएस और चमकता एक स्टार. खाकी वर्दी पर नाम लिखा-पी. अमीक्षा. एक नजर में तो यह भारतीय पुलिस सेवा की जनरेशन जेड की कोई महिला पुलिस अधिकारी लगती है, मगर हकीकत कुछ और है. इस मासूम बच्ची के वर्दी पहनने के पीछे एक पिता का फर्ज और बेटी का सपना है. तस्वीरें तेलंगाना के बेगमपेट पुलिस थाने की हैं. तेलंगाना पुलिस के पी. सैदुलु वर्तमान में बेगमपेट पुलिस थाने में एसएचओ पद पर सेवाएं दे रहे हैं. उनकी बेटी अमीक्षा के लिए अपने पिता की खाकी वर्दी हमेशा हिम्मत, अनुशासन और सेवा की निशानी रही है. वह बचपन से ही पुलिस की वर्दी के प्रति आकर्षित रही है. वह अक्सर कहा करती थी कि एक दिन उसे भी अपने पापा की तरह पुलिस अधिकारी बनना है.

पुलिसकर्मियों से बातचीत करते अमीक्षा.
गणेश विसर्जन के आखिरी दिन पूरा हुआ सपना
अमीक्षा का पुलिस अधिकारी बनने का सपना गणेश प्रतिमा विसर्जन 2026 के आखिरी दिन पूरा हो गया. उस दिन अमीक्षा ने खाकी वर्दी का ऐसा अनुभव लिया, जिसे वह ताउम्र शायद ही भूल पाए. उसके पिता पी. सैदुलु ने बेटी के लिए पुलिस की ड्रेस तैयार करवाई और उसे खाकी वर्दी में अपने ऑफिस लेकर आए. वह पुलिस ड्यूटी के दौरान अपने पिता के साथ रही.
इंस्टाग्राम पर बेटी का वर्दी वाला वीडियो शेयर करते हुए बेगमपेट एसएचओ सैदुलु ने लिखा, "मेरी बेटी अमीक्षा हमेशा से पुलिस की वर्दी से प्रभावित रही है. उसकी इच्छा पर वह गणेश विसर्जन के आखिरी दिन पुलिस ड्यूटी के एक वास्तविक दिन में मेरे साथ शामिल हुई." अमीक्षा ने पुलिसकर्मियों से बातचीत की, अपने पिता की टीम के सदस्यों से बात की और विसर्जन के बड़े आयोजन को संभालने में शामिल तालमेल और सतर्कता को करीब से देखा.
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पुलिसकर्मियों के साथ खड़ी अमीक्षा.
'उसका सपना, मेरा फर्ज'
सैदुलु ने अपनी पोस्ट का समापन एक भावुक पंक्ति के साथ किया. उन्होंने लिखा, "उसके लिए यह ड्यूटी का सिर्फ एक दिन था... मेरे लिए यह मेरी बेटी के साथ जीवन भर की याद बन गई. उसका सपना, मेरा फर्ज और हमारा यादगार दिन." पिता-बेटी का यह पल हैदराबाद के सबसे बड़े वार्षिक सार्वजनिक आयोजनों में से एक के दौरान आया, जब श्रद्धालु विसर्जन जुलूस में शामिल हो रहे थे और पुलिसकर्मी भीड़, ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए घंटों ड्यूटी पर तैनात थे.

पुलिसकर्मियों को सम्बोधित अमीक्षा.
30 हजार पुलिसकर्मी थे तैनात
तेलंगाना के डीजीपी सी.वी. आनंद के अनुसार, उत्सव के दौरान एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 26 अन्य घायल हो गए. सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और ट्रैफिक कंट्रोल के लिए पूरे हैदराबाद में करीब 30,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था.

तेलंगाना के बेगमपेट पुलिस थाने में पिता की कुर्सी पर बैठी अमीक्षा.
अमीक्षा के लिए यह दिन उस वर्दी को करीब से देखने से कहीं ज्यादा था, जिसे वह पसंद करती है. इसने उसे उस जिम्मेदारी की झलक दिखाई, जिसे उसके पिता निभाते हैं. साथ ही यह ऐसी याद भी बन गई, जिसने उनके फर्ज और उसके सपने को एक साथ जोड़ दिया.
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