- शिवपुरी में बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी के बेटे ने तेज रफ्तार गाड़ी से पांच लोगों को टक्कर मारी थी
- विधायक प्रीतम लोधी ने पुलिस अधिकारियों को धमकी देते हुए अपने आपराधिक अतीत का हवाला दिया था
- प्रीतम लोधी के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास समेत नौ आपराधिक मामले दर्ज हैं और उन्हें जिला बदर भी किया गया है
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक सड़क हादसा अब सिर्फ दुर्घटना नहीं रह गया, यह सत्ता के रौब, पुलिस को खुली चुनौती और एक पुराने ‘बाहुबली' चेहरे की वापसी की कहानी बन गया है. “क्या करैरा तुम्हारे ‘डैडी' का है?” यह सवाल उठाने वाले बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी अब खुद कटघरे में हैं. बेटे की गाड़ी से 5 लोगों को टक्कर के बाद जिस तरह उन्होंने पुलिस अधिकारियों को धमकाया है, उसने उनके उस पुराने चेहरे को फिर सामने ला दिया है, जिसकी पहचान इलाके में एक आपराधिक बाहुबली के तौर पर रही है.
घटना 16 अप्रैल की सुबह करीब 7:30 बजे की है. पिछोर से बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी ने करैरा थाने के सामने ही तेज रफ्तार थार से 5 लोगों को टक्कर मार दी. आरोप है कि हादसे के बाद वह बेफिक्र अंदाज में वहां से करीब 500 मीटर दूर जिम चला गया. पीड़ितों का कहना है कि जब पुलिस पहुंची तो उसने उनसे कहा “जाओ, मैं थाना इंचार्ज से बात कर लूंगा,” और साथ ही यह धमकी भी दी कि “मेरा बाप विधायक है, मर्डर केस भी संभाल लेगा.”
'जनता सर्वोपरि' से धमकियों तक आई बात
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा यू-टर्न खुद विधायक प्रीतम लोधी का है. हादसे के तुरंत बाद उन्होंने “जनता सर्वोपरि” की बात कही थी और दावा किया था कि उन्होंने खुद पुलिस को एफआईआर दर्ज करने को कहा है. लेकिन अब वही विधायक पुलिस अधिकारियों को खुली धमकियां दे रहे हैं.

आईपीएस अधिकारी और करैरा एसडीओपी आयुष जाखर को सीधे चुनौती देते हुए उन्होंने कहा, “मैं कहना चाहता हूं एसडीओपी महोदय से हमारा इतिहास भी देख लेना.
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हत्या के 3 मामले समेत कुल 9 केस दर्ज हैं
यही बयान अब उस अतीत की याद दिला रहा है, जिसे विधायक खुद अपने चुनावी हलफनामे में दर्ज कर चुके हैं. प्रीतम लोधी के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं (302, 307) सहित करीब 28 धाराओं में 9 मामले दर्ज हैं. वह तीन हत्याओं के मामलों में आरोपी रहे हैं उन्हें एक बार जिला बदर भी किया गया.
उनका पुलिस से टकराव कोई नया नहीं है. करीब 20 साल पहले ग्वालियर की हजीरा पुलिस चौकी में घुसकर पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने का आरोप उन पर लगा था, जिसमें तत्कालीन चौकी प्रभारी सुरेंद्र चौहान भी शामिल थे.
साल 2012 तक उनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा, डकैती की साजिश और मारपीट जैसे 34 मामले दर्ज हो चुके थे. कुछ साल पहले उन्हें अंतरराज्यीय बदमाश हरेंद्र राणा को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था.
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अपराध कहीं हो, पुलिस उन्हें ढूंढती थी
ग्वालियर के जलालपुर गांव से आने वाले लोधी के बारे में इलाके में यह तक कहा जाता रहा है कि जब भी आसपास कोई बड़ा अपराध होता था, पुलिस सबसे पहले उन्हें ही ढूंढती थी.

राजनीतिक तौर पर वह कभी उमा भारती के करीबी माने जाते थे और दंगल जैसे आयोजनों के जरिए उन्होंने अपनी पकड़ बनाई. लेकिन विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ते. 2022 में ब्राह्मणों और कथावाचकों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद उन्हें बीजेपी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था. हालांकि 2023 में चुनाव से पहले उनकी वापसी हो गई.
बेटे का रिकॉर्ड भी खराब है
उनके बेटे दिनेश लोधी का रिकॉर्ड भी सवालों से घिरा है. 2023 में धमकी देने का मामला, 2024 में ग्वालियर में पड़ोसियों पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश और जेल, और करोड़ों की वसूली के आरोप हैं.
यही नहीं, पिछले साल जनवरी में प्रीतम लोधी ने अपने क्षेत्र के थानों में ‘विधायक प्रतिनिधि' तक नियुक्त कर दिए थे. एक ऐसा कदम जिसे पुलिस व्यवस्था में दखल माना गया और भारी विरोध के बाद इसे वापस लेना पड़ा.
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