- भारतीय वायु सेना का सुखोई-30 लड़ाकू विमान असम में उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद क्रैश हो गया था
- पिछले कई वर्षों में भारत में सुखोई-30 जेट विमानों के कई हादसे असम, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हो चुके हैं
- जनवरी 2023 में मध्य प्रदेश के मुरैना में सुखोई-30 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें एक पायलट की मौत हुई थी
भारतीय वायु सेना का सुखोई-30 लड़ाकू विमान गुरुवार को असम में क्रैश हो गया. उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद उसका संपर्क रडार से टूट गया था, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने दूर पहाड़ियों से धमाके की तेज आवाज सुनी औरआग का गोला भी उठते देखा. ये पहली बार नहीं है जब सुखोई-30 फाइटर जेट क्रैश हुआ है. पिछले कई सालों में असम और देश के अन्य हिस्सों में भी इस तरह के हादसे देखे जा चुके हैं. बता दें कि भारतीय वायुसेना के पास 260 से ज्यादा Su-30MKI जेट विमानों का बेड़ा है.
ये भी पढ़ें- सुखोई-30 प्लेन क्रैश में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर की मौत: IAF

जनवरी 2023: सुखोई-30 MP के मुरैना में क्रैश
जनवरी 2023 में ग्वालियर वायुसेना अड्डे से उड़ान भरने के बाद एक अन्य सुखोई-30 जेट मध्य प्रदेश के मुरैना में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. यह हादसा तड़के 5.30 बजे के आसपास हुई थी. हैरानी की बात यह है कि यह हादसा भी रूटीन ट्रेनिंग के दौरान ही हुआ था. जेट में तीन पायलट सवार थे, जिनमें से एक पायलट की गंभीर चोट के बाद मौत हो गई थी, जबकि दो को बचा लिया गया था.
अगस्त 2019: सुखोई-30 असम में तेजपुर में क्रैश
अगस्त 2019 में भी सुखोई-30 लड़ाकू विमान असम में ही हादसे का शिकार हुआ था. तब भी रूटीन ट्रेनिंग मिशन के दौरान असम में तेजपुर में एक धान के खेत में क्रैश हो गया था. ये राहत भरी बात रही कि दोनों पायलट को जेट से सुरक्षित बाहर निकालकर बचा लिया गया था.

मार्च 2017: सुखोई जेट राजस्थान के बाड़मेर में क्रैश
मार्च 2017 में भारतीय वायुसेना का सुखोई लड़ाकू विमान रूटीन ट्रेनिंग के दौरान राजस्थान के बाड़मेर में भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. गनीमत यह रही कि जेट में सवार दोनों पायलट समय रहते ही उससे निकल गए थे. जिसकी वजह से उनकी जान बच गई. यह हादसा बाड़मेर के शिवकर गांव के पास हुआ था. हादसे के बाद लड़ाकू विमान के परखच्चे उड़ गए थे.

मई 2017: सुखोई जेट असम में तेजपुर में क्रैश
मई 2017 को असम में तेजपुर से उड़ान भरने के बाद सुखोई विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में उसके दो पायलटों की मौत हो गई थी. विमान का मलबा पांच दिन बाद बरामद किया गया था. 23 मई को तेजपुर एयरबेस से 60 किलोमीटर दूर हादसे से पहले स्कवाड्रन लीडर डी पंकज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस अचुदेव विमान से बाहर नहीं निकल पाए थे. उनका संपर्क भी रडार से टूट गया था. पंकज की उम्र 36 साल और अचुदेव की उम्र 26 साल थी. तीन दिन की तलाशी अभियान के बाद अरुणाचल प्रदेश के घने जंगल वाले इलाके में 26 मई को सुखोई-30 विमान का मलबा मिला था.

साल 2015 में सरकार ने बताया था है कि 2013 और 2014 के दौरान सुखोई विमानों (सुखोई-30 एमकेआई) के इंजन हवा में बंद होने के अलावा इंजन संबंधी अन्य समस्याओं की कुल 35 घटनाएं हुईं. तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने राज्यसभा में कहा था कि इंजन में गड़बडी को दूर करने के लिए सरकार गंभीर है और रूस की मूल उपकरण निर्माता कंपनी के साथ मिलकर परिचालनात्मक विश्वसनीयता सुधार कार्यक्रम चलाए गए हैं. नए इंजनों में भी सुधार किए गए हैं. मॉडिफाई क्नोलॉजी युक्त 25 नए इंजन प्राप्त किए गए हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं