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Explainer: सीपीग्राम क्या है? जिसने सरकार तक शिकायत पहुंचा कर गुजरात में बदल दी सड़क की स्थिति

सरकारी दफ्तर में काम अटका है? सीपीग्राम के जरिए शिकायत दर्ज कर आप उसकी स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं और समाधान से संतुष्ट नहीं होने पर अपील भी कर सकते हैं. जानिए पूरा सिस्टम और 2026 के आंकड़े.

Explainer: सीपीग्राम क्या है? जिसने सरकार तक शिकायत पहुंचा कर गुजरात में बदल दी सड़क की स्थिति
  • सीपीग्राम भारत सरकार का डिजिटल जन शिकायत निवारण मंच है.
  • यहां आप सरकारी सेवाओं से जुड़ी शिकायत दर्ज कर उसकी स्थिति देख सकते हैं, असंतुष्ट होने पर अपील भी कर सकते हैं.
  • जून 2026 तक करीब 2 लाख शिकायतों का निपटारा हुआ. औसत निपटारा समय 14 दिन है. इसे और आसान बनाया जा रहा है.

अगर आपको किसी सरकारी सेवा से जुड़ी परेशानी है, शिकायत करने के बाद भी काम नहीं हुआ है या किसी सरकारी विभाग से जुड़ी समस्या का समाधान नहीं मिल रहा है, तो आपकी शिकायत सिर्फ संबंधित दफ्तर के चक्कर लगाने तक सीमित नहीं है. केंद्र सरकार ने ऐसी शिकायतों के लिए केंद्रीकृत जन शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली यानी सीपीग्राम बनाई है. यहां इसी साल जून के महीने में करीब दो लाख लोगों की शिकायतों का निपटारा किया गया है.

सीपीग्राम एक ऐसा डिजिटल मंच है, जहां लोग केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ी सरकारी सेवाओं की शिकायत दर्ज करा सकते हैं. शिकायत दर्ज होने के बाद उसे संबंधित अधिकारी तक पहुंचाया जाता है और नागरिक अपनी शिकायत की स्थिति भी देख सकता है.

जून 2026 में सीपीग्राम के जरिए 1,99,968 शिकायतों का निपटारा किया गया. खास बात यह है कि लगातार 46 महीनों से हर महीने एक लाख से ज्यादा शिकायतों का निपटारा किया जा रहा है. वर्ष 2026 में शिकायतों के निपटारे में औसतन 14 दिन लग रहे हैं, जबकि लोगों की संतुष्टि दर जनवरी से जून 2026 के बीच 76 प्रतिशत रही.

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सीपीग्राम आखिर क्या है

सीपीग्राम यानी केंद्रीकृत जन शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली भारत सरकार का प्रमुख डिजिटल शिकायत निवारण मंच है. यह चौबीसों घंटे उपलब्ध रहता है और इसका उद्देश्य लोगों की सरकारी सेवाओं से जुड़ी शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचाकर उनका समयबद्ध समाधान कराना है.

पहले सरकारी शिकायतों की व्यवस्था काफी हद तक अलग-अलग विभागों और कागजी प्रक्रियाओं पर निर्भर थी. वर्ष 2014 के बाद इस व्यवस्था को धीरे-धीरे डिजिटल और एकीकृत बनाया गया.

आज सीपीग्राम केवल शिकायत दर्ज करने वाली वेबसाइट नहीं है. इसमें शिकायतों की निगरानी, अधिकारी तक स्वतः पहुंचाने की व्यवस्था, लोगों से प्रतिक्रिया लेने, अपील करने, आंकड़ों का विश्लेषण करने और शिकायतों से सामने आने वाली बड़ी समस्याओं की पहचान करने जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं.

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एक दशक में कितना बदला शिकायत निवारण का सिस्टम

सीपीग्राम के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में सरकारी शिकायत निवारण व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है.

वर्ष 2014 में लगभग 3.01 लाख शिकायतों का निपटारा हुआ था. वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर करीब 27 लाख हो गई. यानी एक साल में निपटाई जाने वाली शिकायतों की संख्या लगभग नौ गुना बढ़ी.

शिकायतों को संभालने वाले अधिकारियों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. वर्ष 2014 में करीब 10,232 शिकायत निवारण अधिकारी थे. वर्ष 2025 तक इनकी संख्या 1.11 लाख से ज्यादा हो गई.

सबसे बड़ा बदलाव शिकायतों के समाधान में लगने वाले समय में दिखाई देता है. केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में किसी शिकायत को निपटाने में वर्ष 2014 में औसतन 157 दिन लगते थे. वर्ष 2025 में यह समय घटकर केवल 15 दिन रह गया.

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सीपीग्राम पर शिकायत कैसे दर्ज करें

लोग सीपीग्राम के ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं.

https://pgportal.gov.in/

शिकायत दर्ज करने के लिए लोगों को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है. शिकायत दर्ज करने पर रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है. इससे शिकायत की स्थिति देखी जा सकती है.

लोग सीपीग्राम मोबाइल ऐप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. यह उमंग मंच से भी जुड़ा हुआ है. इसके अलावा देशभर में मौजूद सामान्य सेवा केंद्रों के जरिए भी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा है. सरकार के अनुसार 2.5 लाख से अधिक ग्राम स्तरीय उद्यमियों से जुड़े 5 लाख से ज्यादा सामान्य सेवा केंद्र इस व्यवस्था का हिस्सा हैं.

डाक से मिलने वाली शिकायतों को भी डिजिटल रूप में बदलकर सीपीग्राम पर दर्ज किया जा सकता है.

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शिकायत दर्ज होने के बाद क्या होता है

शिकायत दर्ज होने के बाद उसे संबंधित विभाग और अधिकारी तक पहुंचाया जाता है. इसके लिए सीपीग्राम में शिकायत निवारण अधिकारियों की मैपिंग की गई है. इससे शिकायत सही अधिकारी तक पहुंचाने में अनावश्यक समय नहीं लगता है.

शिकायतों के समाधान की समय सीम अगस्त 2024 में 30 दिन से घटाकर 21 दिन कर दी गई थी. हालांकि व्यवहार में केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में शिकायत निपटाने का औसत समय इससे भी कम रहा. साल 2025 में यह औसतन 15 दिन और अब 2026 में करीब 14 दिन रहा है.

शिकायत का समाधान पसंद नहीं आया तो क्या करें

शिकायत का जवाब मिलने के बाद मामला हमेशा खत्म नहीं होता. सीपीग्राम में लोगों से शिकायत के समाधान के बारे में प्रतिक्रिया ली जाती है. कॉल सेंटर के जरिए लोगों से संपर्क कर यह जानने की कोशिश की जाती है कि वे समाधान से संतुष्ट हैं या नहीं.

अगर लोग समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो अपील की व्यवस्था भी मौजूद है. ऐसी अपीलों को संबंधित अपीलीय प्राधिकारी के पास भेजा जाता है और उन्हें 30 दिनों के भीतर अपील का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है.

यानी व्यवस्था केवल शिकायत दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाधान की गुणवत्ता पर भी नजर रखने की कोशिश की जाती है.

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कौन सी शिकायतें सीपीग्राम पर नहीं ली जातीं

हर तरह की शिकायत सीपीग्राम के दायरे में नहीं आती. कुछ मामलों को इस प्रणाली के जरिए समाधान के लिए नहीं लिया जाता. जैसे-

  • सूचना का अधिकार यानी आरटीआई से जुड़े मामले.
  • अदालत से संबंधित या न्यायालय में विचाराधीन मामले.
  • धार्मिक मामलों से जुड़े विषय.
  • सरकारी कर्मचारियों की सेवा संबंधी शिकायतें, जिनमें अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े मामले भी शामिल हैं.

इसलिए शिकायत दर्ज करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपका मामला सीपीग्राम के दायरे में आता है या नहीं.

एक शिकायत ने गुजरात में कैसे बदली सड़क की स्थिति

सीपीग्राम के असर को इस उदाहरण से समझा जा सकता है. गुजरात के राजकोट में हर्ष नाम के एक शख्स ने आशापुरी चौकड़ी पुल के पास व्यस्त राजमार्ग की असुरक्षित स्थिति, खराब रखरखाव और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने की शिकायत दर्ज कराई.

शिकायत संबंधित प्राधिकरण तक पहुंची. समीक्षा के बाद निर्माण कार्यों को व्यवस्थित किया गया और अंडरपास को आम लोगों के लिए खोल दिया गया. लंबित कामों में तेजी लाई गई.

इसके साथ ही बैरिकेड, साइन बोर्ड, वार्निग साइन्स और ट्रैफिक पुलिस जैसी सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया.

सरकारी विवरण के अनुसार इस शिकायत का समाधान केवल चार दिन में कर दिया गया.

यह उदाहरण बताता है कि शिकायत व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ किसी व्यक्ति की समस्या का जवाब देना नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं और सुविधाओं में वास्तविक बदलाव लाना भी हो सकता है.

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जून 2026 तक सीपीग्राम के प्रमुख आंकड़े

जून 2026 तक सीपीग्राम से जुड़े कुछ आंकड़े इस व्यवस्था के विस्तार को दिखाते हैं.

  • शिकायतों का निपटारा: 1,99,968
  • हर महीने एक लाख से अधिक मामलों के निपटारे की निरंतरता: 46 महीने
  • 2026 में शिकायत निपटारे का औसत समय: 14 दिन
  • जनवरी से जून 2026 के बीच लोगों की संतुष्टि दर: 76 प्रतिशत
  • जून 2026 में नए उपयोगकर्ता रजिस्ट्रेशन: 83,544
  • जून 2026 तक सीपीग्राम पर मैप किए गए शिकायत निवारण अधिकारी: 1,09,125

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी संभाल रही है शिकायतों का काम

सीपीग्राम में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल भी किया जा रहा है.

इन तकनीकों की मदद से शिकायतों में सामने आने वाले पैटर्न की पहचान की जा सकती है. इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि किसी विभाग में बार-बार किस तरह की समस्या सामने आ रही है.

इसका फायदा केवल एक शिकायत के समाधान तक सीमित नहीं है. अगर एक ही तरह की शिकायतें बार-बार सामने आती हैं, तो उनके मूल कारण की पहचान कर व्यवस्था में सुधार करने की कोशिश की जा सकती है.

उन्नत डैशबोर्ड और आंकड़ों के विश्लेषण से अधिकारियों को यह समझने में मदद मिलती है कि किस विभाग में शिकायतें ज्यादा हैं, किन मामलों में ज्यादा समय लग रहा है और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है.

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22 भाषाओं में शिकायत की सुविधा

भाषा किसी नागरिक को सरकारी शिकायत दर्ज कराने से रोक न दे, इसके लिए सीपीग्राम को अंग्रेजी के अलावा 22 अनुसूचित भाषाओं से जोड़ा गया है.

भाषिणी के साथ एकीकरण के जरिए शिकायत निवारण अधिकारियों को शिकायतकर्ता की भाषा में जवाब देने में भी मदद मिलती है.

इसका महत्व खासकर उन लोगों के लिए है जो अंग्रेजी या हिंदी में अपनी समस्या आसानी से नहीं बता पाते.

क्या है शिकायत निवारण मूल्यांकन और सूचकांक

सीपीग्राम के तहत शिकायत निवारण मूल्यांकन और सूचकांक यानी जीआरएआई की व्यवस्था भी बनाई गई है.

इसका उद्देश्य अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों की शिकायत निवारण व्यवस्था के प्रदर्शन का आकलन करना है.

इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कौन सा विभाग शिकायतों का बेहतर तरीके से समाधान कर रहा है और किन विभागों में सुधार की जरूरत है.

इस तरह शिकायतों के आंकड़े केवल शिकायत खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की कार्यक्षमता को परखने के लिए भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

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समाधान दीदी क्या है

सीपीग्राम में अब आवाज के जरिए शिकायत दर्ज कराने की दिशा में भी कदम उठाया गया है.

30 मई 2026 को सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सीपीग्राम वॉयस चैटबॉट "समाधान दीदी" शुरू किया.

इसका उद्देश्य उन लोगों के लिए शिकायत दर्ज कराना आसान बनाना है जिन्हें ऑनलाइन फॉर्म भरने या सरकारी विभाग की सही श्रेणी चुनने में परेशानी होती है.

लोग अपनी पसंदीदा भाषा में बोलकर अपनी समस्या बता सकते हैं. यह प्रणाली भाषिणी की वाक् से पाठ, पाठ से वाक्, अनुवाद और लिप्यंतरण जैसी क्षमताओं का इस्तेमाल करती है.

इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिकायत की समस्या को समझकर संबंधित मंत्रालय, विभाग, श्रेणी और उपश्रेणी की पहचान करने में मदद करता है.

यानी आने वाले समय में सरकारी शिकायत दर्ज कराने के लिए लोगों को यह जानना जरूरी नहीं होगा कि उसकी समस्या किस सरकारी विभाग के किस अधिकारी के पास जाती है. तकनीक इस प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में काम करेगी.

अब बन रहा है अगली पीढ़ी का सीपीग्राम

सरकार अब नेक्स्ट जेनरेशन सीपीग्राम पर भी काम कर रही है. इसका उद्देश्य मौजूदा व्यवस्था को और अधिक तेज, आसान, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना है.

नई व्यवस्था में आवाज के जरिए शिकायत दर्ज कराने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिकायत वर्गीकरण और स्वतः संबंधित अधिकारी तक पहुंचाने की सुविधा को और मजबूत करने की योजना है.

इसके अलावा राज्यों की शिकायत श्रेणियों को एक ही मंच पर शामिल करने, ईमेल, सामाजिक माध्यमों और मोबाइल ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराने, समय पर कार्रवाई नहीं होने पर स्वतः मामला ऊपर भेजने और दिव्यांगों के लिए बेहतर पहुंच जैसी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है.

रियल टाइम आंकड़ों और रिपोर्टिंग वाले डैशबोर्ड के साथ ऐसी व्यवस्था भी विकसित की जा रही है जो यह जांच सके कि शिकायत का समाधान वास्तव में हुआ या सिर्फ उसे किसी दूसरे अधिकारी को भेजकर या बंद करके मामला खत्म कर दिया गया.

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