- कांग्रेस भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर किसानों को समझाने के लिए किसान पंचायत का आयोजन कर रही है
- MP, महाराष्ट्र और राजस्थान के प्रमुख कृषि उत्पादक क्षेत्रों में कांग्रेस किसान पंचायत करेगी
- कांग्रेस अमेरिकी डील की बारीकियों के सार्वजनिक होने का इंतजार कर रही है
अमेरिका के साथ भारत की ट्रेड डील पर कांग्रेस सरकार पर हमलावार हो रही है.कांग्रेस ने इस डील की बातें किसानों को समझाने के लिए जो रैली कर रही है जिसका नाम किसान पंचायत रखा गया है के तहत भोपाल को चुना.इसके पहले सोच थी कि चुंकि कृषि मंत्री मध्यप्रदेश से आते हैं इसलिए किसान पंचायत की शुरुआत भी यहीं से हो.दूसरी बात मध्यप्रदेश में सोयाबीन की खेती बहुत बड़े पैमाने पर होती है और कांग्रेस का कहना है कि ट्रेड डील के बाद सोयाबीन,मक्का,कपास और फलों को अमेरिका से मंगाने का और इन चीजों के लिए भारतीय बाजार खोलने का प्रावधान है.यही वजह है कि कांग्रेस अगली किसान पंचायत 7 मार्च को महाराष्ट्र के यवतमाल में करने जा रही है.यवतमाल में कपास की पैदावार बहुत बड़े पैमाने पर की जाती है साथ ही सोयाबीन और संतरे की भी खेती की जाती है.
यही नहीं कांग्रेस राजस्थान के श्रीगंगानगर में भी किसान पंचायत करेगी हालांकि इसकी तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है मगर श्रीगंगानगर में भी कपास की खेती बड़े स्तर पर की जाती है साथ ही वहां किन्नू जैसे फल और मीठी गाजर की खेती होती है.कांग्रेस अपने इन पंचायतों के जरिए किसानों को अमेरिकी डील की बातें बताने और उसी बहाने उसे जगाने की कोशिश कर रही है.किसान और बीजेपी सरकार के बीच वैसे भी रिश्ते अच्छे नहीं रहे है इसका गवाह वो तीन कृषि कानून थे जिस पर किसानों ने लंबा आंदोलन चलाया था और बाद में सरकार को वो कानून वापस लेना पड़ा था.
कांग्रेस नेता यह भी कहते हैं कि समझौते के मुताबिक भारत को पांच साल में अमेरिका से कुल 45 लाख करोड़ रुपये (500 बिलियन डॉलर) का सामान खरीदना होगा. पहले भारत अमेरिका को आयात से अधिक निर्यात करता था और फायदे में रहता था, लेकिन अब वह घाटा उठाएगा. जिससे भारत के कपड़ा व चमड़ा उद्योग खत्म हो जाएंगे और सोयाबीन व फल उगाने वाले किसान भी प्रभावित होंगे. यही वजह है कि कांग्रेस ने किसान पंचायत के पहले चरण में सोयाबीन,कपास और फल का उत्पादन करने वाले इलाकों को चुना है.
दरअसल, कांग्रेस भी भारत अमेरिका ट्रेड डील के बारीकियों के सार्वजनिक होने का इंतजार कर रही है.अभी यह भी तय नहीं है कि अमेरिकी डील का भविष्य क्या होगा और कितना प्रतिशत टैरिफ प्रभावी होगा.यही वजह है कि कांग्रेस इन तीन राज्यों और तीन जगहों पर पंचायत करके किसानों का भी फीडबैक लेना चाहती है.एक बार जब अमेरिकी ट्रेड डील पर स्थिति साफ हो जाएगी तब कांग्रेस की अपनी अगली रणनीति का भी खुलासा करेगी.
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