- यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष नई दिल्ली पहुंच गए हैं
- यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीद जताई जा रही है
- अमेरिकी कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचा और विदेश मंत्री एस जयशंकर से द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा रविवार को भारत पहुंच गए हैं. यूरोपीय संघ और नई दिल्ली लगभग दो दशकों से चल रही आर्थिक महाशक्तियों के बीच मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के प्रयास में जुटे हैं. कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे. इसके बाद मंगलवार को यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन होगा, जहां वे इस समझौते पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद जताएंगे, जिसे "मदर ऑफ ऑल डील" बताया जा रहा है. वहीं अमेरिका कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल भी भारत पहुंचा है.
यूरोप बेहद उत्साहित
यूरोपीय संघ परिषद ने X पर बताया, "राष्ट्रपति कोस्टा मंगलवार को होने वाले 16वें यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली में हैं. यह शिखर सम्मेलन यूरोपीय संघ-भारत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और प्रमुख नीतिगत क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने का अवसर होगा.”
President Costa is in New Delhi for the 16th #EUIndia summit taking place on Tuesday.
— EU Council (@EUCouncil) January 25, 2026
The summit will be an opportunity to build on the EU-India strategic partnership and further strengthen collaboration across key policy areas.
Read the agenda → https://t.co/0wl24sWN9X pic.twitter.com/Nu21CUMWYp
अमेरिका से आई बड़ी टीम
वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आज ही नई दिल्ली में अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. इस मुलाकात में माइक रोजर्स, एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस के साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी शामिल थे. दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विकास और चल रहे यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा की. इस मुलाकात की जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देते हुए लिखा, "अमेरिकी डेलीगेशन के साथ अच्छी बातचीत हुई, जिसमें प्रतिनिधि माइक रोजर्स, रिप्रेजेंटेटिव एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस के साथ-साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर शामिल थे. भारत-अमेरिका संबंधों, इंडो-पैसिफिक और यूक्रेन विवाद के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा हुई. कांग्रेसनल बातचीत हमेशा हमारे रिश्ते का एक अहम पहलू रही है."
Just wrapped a productive meeting with EAM @DrSJaishankar, @RepMikeRogersAL, @RepAdamSmith, and @JimmyPatronis on ways to strengthen U.S.-India partnership for stronger security, expanded trade, and cooperation on critical technologies. https://t.co/kHfdkhBFtn
— Ambassador Sergio Gor (@USAmbIndia) January 25, 2026
वहीं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर लिखा, “विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, प्रतिनिधि माइक रोजर्स एएल, प्रतिनिधि एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस के साथ एक सार्थक बैठक संपन्न हुई, जिसमें मजबूत सुरक्षा, विस्तारित व्यापार और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर सहयोग के लिए अमेरिका-भारत साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई."
अमेरिकी सेना के सचिव भी पहुंचे
इसके साथ ही आज ही दिल्ली में अमेरिकी सेना के सचिव डैनियल पी ड्रिस्कॉल ने सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की. दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को गहरा करने और नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच सैन्य संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की.
यूरोप कैसे भारत को देख रहा
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के अनुसार, विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला देश भारत इस वर्ष विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है. जहां यूरोपीय संघ भारत को भविष्य के एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में देखता है, वहीं नई दिल्ली यूरोपीय संघ को अपने बुनियादी ढांचे को तेजी से उन्नत करने और अपने लोगों के लिए लाखों नए रोजगार सृजित करने के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकी और निवेश के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में देखती है. यूरोपीय संघ के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 120 अरब यूरो (139 अरब डॉलर) तक पहुंच गया, जो पिछले दशक की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि है. इसके अतिरिक्त, सेवाओं का व्यापार 60 अरब यूरो (69 अरब डॉलर) रहा. यह समझौता ब्रसेल्स और नई दिल्ली के लिए एक बड़ी जीत होगी, क्योंकि दोनों देश अमेरिकी टैरिफ और चीनी निर्यात नियंत्रणों के मद्देनजर नए बाजार खोलने की कोशिश कर रहे हैं.
अमेरिका की भारत पर नजर
अमेरिका भी भारत से ट्रेड डील चाहता है और दोनों देशों की इस बारे में बातचीत भी जारी है. ऐसे में अमेरिका को यूरोप के साथ भारत की ट्रेड डील फाइनल देख अमेरिका भी तेजी दिखा रहा है. साथ अमेरिका की नई अपडेटेड रक्षा नीति में साफ लिखा गया है कि उसकी नजर चीन पर है. मगर वो चीन से युद्ध भी नहीं चाहता. ऐसे में साफ है कि अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था और तकनीक में वर्चस्व को बढ़ाने के मिशन में लगा है. इसके लिए भी अमेरिका को भारत का साथ चाहिए. भारतीय बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है. अमेरिका चाहता है कि चीन को रोकने के लिए भारत के साथ पार्टनरशिप बनी रहे. अमेरिकी विश्लेष्कों के अनुसार, इसीलिए अमेरिका लगातार पाकिस्तान को भी करीब ला रहा है, जिससे वो भी चीन के ज्यादा करीब ना रहे और अमेरिका का वर्चस्व बना रहे.
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