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भारत-अमेरिका में आज से फिर शुरू होगी ट्रेड डील पर बात, जानिए सहमति के बाद क्यों फंसा पेंच?

भारत ने ऊर्जा, एविएशन, टेक्नोलॉजी, कीमती धातुओं और कोकिंग कोल जैसे क्षेत्रों में अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर तक के आयात बढ़ाने की इच्छा भी जताई है. वहीं अमेरिका ने भारत में मौजूद टैरिफ बाधाओं को लेकर चल रही व्यापार वार्ताओं को एक अहम मुद्दा बताया है.

भारत-अमेरिका में आज से फिर शुरू होगी ट्रेड डील पर बात, जानिए सहमति के बाद क्यों फंसा पेंच?
बैठक में भारत का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे.
  • भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर बातचीत का अगला दौर आज से वाशिंगटन डीसी में तीन दिन चलेगा
  • अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव से भारत को मिलने वाला तुलनात्मक लाभ कम हो गया है
  • अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि द्वारा शुरू की गई सेक्शन 301 जांचों और टैरिफ मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील (बीटीए) को लेकर बातचीत का अगला दौर 20 अप्रैल से वाशिंगटन डीसी में शुरू होगा. तीन दिनों तक चलने वाली इस वार्ता में भारतीय अधिकारियों की एक टीम हिस्सा लेगी. इस बैठक का नेतृत्व भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे, जो वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव हैं. उनके साथ कस्टम विभाग और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका की टैरिफ नीति में बड़े बदलाव हुए हैं.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ को चुनौती मिली थी. इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों के आयात पर 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लागू कर दिया. इस बदलाव के कारण दोनों देशों को अपने प्रस्तावित समझौते की रूपरेखा पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर किया है. यह समझौता प्रारंभिक रूप से 7 फरवरी को पेश किया गया था.

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अधिकारियों का मानना है कि नए टैरिफ ढांचे के चलते प्रस्तावित डील में संशोधन जरूरी हो सकता है. पहले अमेरिका भारत के उत्पादों पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ था, जिसमें रूस से तेल खरीद से जुड़े कुछ दंडात्मक शुल्क हटाना भी शामिल था. हालांकि, अब सभी देशों पर समान 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होने से भारत को मिलने वाला तुलनात्मक लाभ कम हो गया है, जिससे पुनर्विचार की आवश्यकता बढ़ गई है.

सेक्शन 301 वाला मामला क्या है

वार्ता में टैरिफ के अलावा अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) द्वारा शुरू की गई सेक्शन 301 के तहत दो एकतरफा जांचों पर भी चर्चा होने की संभावना है. भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया है और इन्हें खत्म करने की मांग की है. बीटीए के शुरुआती ढांचे में भारत ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती या समाप्ति का प्रस्ताव दिया था. इनमें सोयाबीन तेल, ड्राई फ्रूट्स, फल, वाइन, स्पिरिट्स और पशु आहार जैसे उत्पाद शामिल हैं.

भारत ने ऊर्जा, एविएशन, टेक्नोलॉजी, कीमती धातुओं और कोकिंग कोल जैसे क्षेत्रों में अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर तक के आयात बढ़ाने की इच्छा भी जताई है. वहीं अमेरिका ने भारत में मौजूद टैरिफ बाधाओं को लेकर चल रही व्यापार वार्ताओं को एक अहम मुद्दा बताया है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने सांसदों को बताया कि वॉशिंगटन अमेरिकी निर्यात के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है. वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने दफ्तर के बजट पर एक कांग्रेस सुनवाई के दौरान ग्रीर ने कहा कि अमेरिका पिछले एक साल से भारत के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि एक “पारस्परिक व्यापार ढांचा” तैयार किया जा सके. इसमें कृषि क्षेत्र सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बनकर सामने आया है.

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सेब के लिए अमेरिका परेशान

ग्रीर ने यह भी बताया कि टैरिफ की बाधाएं अभी भी बड़ी समस्या हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अमेरिकी निर्यातकों की पकड़ कमजोर हुई है. हमने सेब के बारे में कई बार बात की है. मैंने खुद यह मुद्दा अपने समकक्ष के सामने उठाया है. उन्होंने कहा, जिससे साफ है कि यह मामला उच्च स्तर पर भी उठाया गया है. अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत की ओर से सेब पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जो एक बड़ा उदाहरण है. इस वजह से अमेरिकी सेबों की हिस्सेदारी भारत के बाजार में काफी कम हो गई है. 2018 में भारत के सेब आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी, जो अब घटकर लगभग 8.5 प्रतिशत रह गई है. इस बीच ईरान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों की हिस्सेदारी बढ़ गई है.

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