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Congress CWC Meeting: कांग्रेस की अगुवाई करती रहेंगी सोनिया गांधी, CWC बैठक की 10 बड़ी बातें

CWC की बैठक के बाद रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता चाहता है कि राहुल गांधी उनकी अगुवाई करें. लेकिन कांग्रेस का अध्यक्ष 20 अगस्त को होने वाले पार्टी के अगले चुनाव में चुना जाएगा.

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कई अहम मसलों पर हुई कांग्रेस की CWC बैठक
नई दिल्ली:

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद रविवार को CWC की बैठक हुई. बैठक से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार कांग्रेस के नए अध्यक्ष का ऐलान हो सकता है, लेकिन कांग्रेस ने पुष्टि कर दी कि वो अभी सोनिया गांधी के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी.

  1. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने जानकारी दी कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने परिवार के सदस्यों के साथ पार्टी के लिए बलिदान देने को तैयार हैं, लेकिन हम सभी ने इसे खारिज कर दिया. एनडीटीवी ने भी ये खबर दी थी कि कांग्रेस की बैठक में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस्तीफे की पेशकर करेगा. जिसकी पुष्टि बाद में कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने भी कर दी.
  2. कांग्रेस ने कहा, "सीडब्ल्यूसी की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला किया गया कि सोनिया गांधी ही पार्टी की अगुवाई करेगी. इसलिए पार्टी उनके नेतृत्व में अपने विश्वास की पुष्टि करती है और कांग्रेस अध्यक्ष से आगे बढ़कर नेतृत्व करने, संगठनात्मक कमजोरियों को दूर करने, राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक और व्यापक संगठनात्मक परिवर्तनों को प्रभावित करने का अनुरोध करती है." 
  3. सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद पार्टी ने यह भी कहा कि वह संसद का बजट सत्र समाप्त होने के बाद संगठनात्मक चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए "चिंतन शिविर" (विचार-मंथन सत्र) आयोजित करेगी. जिसमें कई अहम मसलों पर चर्चा की जाएगी.
  4. एक जानकारी के मुताबिक बैठक में 50 से अधिक नेताओं ने भाग लिया - यह संख्या उन पांच राज्यों के कांग्रेस के विधायकों और सांसदों की संयुक्त संख्या से अधिक है जहां चुनाव हुए थे. जिनमें उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड, मणिपुर और पंजाब शामिल है.
  5. कांग्रेस की हार के बाद सोनिया गांधी को एक पत्र लिखे गए एक पत्र में संगठनात्मक परिवर्तनों और एक जवाबदेह नेतृत्व की मांग फिर से जोर पकड़ रही थी. आपको बता दें पहली बार दो साल पहले 23 असंतुष्टों नेताओं अपनी बात रखी थी. जिसे बाद में जी -23 के नाम से भी पहचाना गया.
  6. इस बार कांग्रेस को पांचों राज्यों में हार का सामना करना पड़ा. नतीजतन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर भी चर्चा होने लगी. खासकर पंजाब की हार की वजह राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के फैसलों को माना जा रहा है. 
  7. सीडब्ल्यूसी में "जी-23" से केवल तीन सदस्य पहुंचे. जिनमें आनंद शर्मा, गुलाम नबी आजाद और मुकुल वासनिक शामिल हैं. सूत्रों ने कहा कि आनंद शर्मा और गुलाम नबी आजाद ने बैठक में खुलकर अपनी बात रखी.
  8. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष होना चाहिए. उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, "पिछले तीन दशकों से, गांधी परिवार से कोई भी पीएम या मंत्री नहीं बना. यह समझना महत्वपूर्ण है कि गांधी परिवार कांग्रेस की एकता के लिए जरूरी है."
  9. इस बार, कांग्रेस ने न केवल पंजाब में सत्ता गंवाई. वहीं गोवा और मणिपुर में भी उसे हार झेलनी पड़ी जबकि इस वक्त इन सभी राज्यों में कांग्रेस का दबदबा था. उत्तर प्रदेश में, उसने केवल दो सीटें जीतीं और उसका वोट प्रतिशत घटकर केवल 2.4 प्रतिशत रह गया.
  10. विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त झेलने के बाद कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में कई मसलों पर बातचीत हुई. बैठक से पहले कहा जा रहा था कि कांग्रेस के कई असंतुष्ट धड़े के नेताओं ने सांगठनिक बदलाव की मांग की है.

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