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महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस से उसके सहयोगी दलों की क्या हैं उम्मीदें? समझिए विपक्ष की रणनीति

महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर कांग्रेस ने रणनीति बनाई है. विपक्षी गठबंधन के साथी दल भी इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर देख रहे हैं.

महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस से उसके सहयोगी दलों की क्या हैं उम्मीदें? समझिए विपक्ष की रणनीति
  • कांग्रेस कार्यसमिति ने महिला आरक्षण संशोधन बिल पर चर्चा कर पार्टी की रणनीति पर विचार किया
  • कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने अब तक इस बिल का कोई औपचारिक प्रस्ताव पार्टी को नहीं भेजा है
  • विपक्षी पार्टियों की बैठक 15 अप्रैल को बुलाई गई है जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होगी

प्रस्तावित महिला आरक्षण संशोधन बिल पर चर्चा के लिए शुक्रवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई. बैठक में इस बिल को लेकर पार्टी की रणनीति पर चिंतन किया गया. बैठक के बाद पार्टी ने कहा कि 15 अप्रैल को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी पार्टियों की एक बैठक बुलाई है जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होगी.

सरकार ने नहीं भेजा कोई प्रस्ताव

पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर कहा गया कि अब तक सरकार की ओर से कोई भी औपचारिक प्रस्ताव पार्टी को नहीं भेजा गया है. हालांकि पार्टी ने ये जरूर कहा कि अगर लोकसभा और राज्य की विधानसभा में 50 फीसदी सीटें बढ़ाई जाती हैं तो इसके बेहद नुकसानदायक परिणाम सामने आ सकते हैं. पार्टी का कहना है कि तमिलनाडु और बंगाल विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने इस बिल को पारित करने का फैसला किया है.

विपक्षी गठबंधन के दलों की क्या राय?

हालांकि आरजेडी और समाजवादी पार्टी जैसी कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों की राय इस मामले में थोड़ी अलग है और उनका मानना है कि कांग्रेस को इस मामले में विपक्ष की अगुवाई करते हुए मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए. आरजेडी के सूत्रों का कहना है कि जब से महिला आरक्षण लिए कानून बनाने की बात की गई थी तभी से लालू यादव, मुलायम सिंह यादव और शरद यादव जैसे नेता ये मांग कर रहे थे कि एससी और एसटी महिलाओं की तरह ही महिला आरक्षण के भीतर ही ओबीसी महिलाओं के लिए भी आरक्षण होना चाहिए. हालांकि 2023 में जो कानून बना, जिसे नारी शक्ति वन्दन अधिनियम के नाम से जाना जाता है, उसमें केवल एससी और एसटी महिलाओं के लिए ही आरक्षण का प्रावधान किया गया है.

आरजेडी और सपा जैसी पार्टियों का मानना है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार ओबीसी समाज के अधिकारों की बात करते रहे हैं ऐसे में महिला आरक्षण बिल के बहाने उन्हें इस मुद्दे को और ठोस तरीके से उठाने का मौका मिला है. उन्हें इस मौके का पूरा लाभ उठाना चाहिए और लीड लेना चाहिए. कांग्रेस के दूसरे सहयोगी दलों का भी मानना है कि बिल के कुछ बिंदुओं को लेकर पार्टी को मज़बूती से बात रखनी चाहिए .

संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान 2029 लोकसभा चुनाव से ही लागू करने के लिए 16 अप्रैल को संसद का सत्र फिर से बुलाया गया है.

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