असम विधानसभा में यूसीसी बिल पास हो गया है. बहु विवाह, लिवइन रिलेशनशिप और शादी की उम्र को लेकर यूसीसी के तहत कई बदलाव किये गए हैं.
Assam UCC Bill 2026: असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पास हो गया है. इस विधेयक के पास होने पर अब कई नियम बदल जाएंगे. यूसीसी के तहत, द्विविवाह और बहुविवाह करने पर सात साल तक की कैद की सजा हो सकती है. जानबूझकर 60 दिनों के भीतर शादी या तलाक का पंजीकरण न कराने पर 10,000 के जुर्माने का भी प्रावधान है. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने यूसीसी को लेकर कहा कि इस कानून का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को अधिक सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना है. हालांकि, एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी समेत कई मुस्लिम नेता इसका विरोध कर रहे हैं. ओवैसी ने यूसीसी विधेयक की आलोचना करते हुए इसे मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने का 'परोक्ष प्रयास' बताया है. ओवैसी ने दावा किया कि उत्तराधिकार, विरासत और तलाक के मामलों में हिंदू सिद्धांतों को थोपा जा रहा है. असम में यूसीसी बिल पास होने के बाद क्या 10 बदलाव होने जा रहे हैं, आइए आपको बताते हैं.
- यूसीसी 'पूर्ण समानता और सामान्य न्याय' सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों को रिप्लेस करेगा, लेकिन अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है.
- यूसीसी के तहत, द्विविवाह और बहुविवाह को लेकर नियम बेहद सख्त कर दिये गए हैं. अगर कोई ऐसा करता है, तो BNS 2023 की धारा 82 के तहत 7 साल तक की कैद की सजा हो सकती है.
- यूसीसी एकविवाह को अनिवार्य बनाता है अगर कोई एक से ज्यादा शादी करता है, तो ये गैरकानूनी होगी. वहीं, शादी के लिए दूल्हों के लिए 21 वर्ष और दुल्हनों के लिए 18 वर्ष की मानक कानूनी आयु निर्धारित की गई है.
- यूसीसी सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करते हुए रीति-रिवाजों को करने की पूरी आजादी देता है, जिससे विवाह किसी भी मौजूदा धार्मिक समारोह या रीति-रिवाजों के माध्यम से संपन्न किए जा सकेंगे, जिनमें वैदिक विवाह, अहोम चकलोंग, सप्तपदी, आशीर्वाद, निकाह, पवित्र मिलन, आनंद कराई शामिल हैं.
- यूसीसी धोखाधड़ी को रोकने के लिए सभी विवाहों और तलाकों का पंजीकरण अनिवार्य करेगा. दंपत्तियों को शादी के 60 दिनों के भीतर सब-रजिस्ट्रार को विवाह का मेमोरेंडम पेश करना होगा.
- यह कानून तलाक के लिए समान आधार निर्धारित करेगा, जैसे क्रूरता, परित्याग या आपसी सहमति और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की कस्टडी माता के पास सुनिश्चित करेगा.
- यूसीसी प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों के बीच उत्तराधिकार के लिए एक समान, लिंग-समान वरीयता क्रम स्थापित करेगा, जिसमें मृतक के पति/पत्नी, बच्चे और माता-पिता को समान रूप से शामिल किया जाएगा.
- वसीयत के माध्यम से उत्तराधिकार के लिए, किसी भी दिमागी रूप से स्वस्थ बालिग को लिखित, गवाहों के सामने वसीयत बनवाने का कानूनी अधिकार दिया गया है.
- जानबूझकर 60 दिनों के भीतर विवाह या तलाक का पंजीकरण न कराने पर 10,000 का जुर्माना और पंजीकरण के दौरान जाली या मनगढ़ंत दस्तावेज प्रस्तुत करने पर तीन महीने तक की कैद या 25,000 तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान हैं.
- यूसीसी के तहत लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है. रजिस्ट्रेशन न कराने पर तीन महीने तक की कैद या 10,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है, जबकि महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने या ऐसे घोषणापत्रों में झूठी जानकारी देने पर तीन महीने तक की कैद और 25,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.