बंगाल के भांगर में तालाब में बमों का जखीरा मिला. चुनावी महीने से पहले बम बरामदगी की घटना को लेकर हड़कंप मच गया है. दक्षिण बामुनिया इलाके में तालाब में मछली पकड़ते समय लोगों को बम नजर आए. इसके बाद खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई. कहा जा रहा है कि बरामद बमों को बड़ी चालाकी से छिपाया गया था, ताकि चुनाव के दौरान उनका इस्तेमाल किया जा सके. स्थानीय निवासियों का दावा है कि बमों को झोपड़ियों और विभिन्न गुप्त स्थानों में छिपाया गया था. इतना ही नहीं, कुछ बमों को सीमेंट से भरी बोरियों में भी रखा गया था. घटना का एक और सनसनीखेज पहलू यह है कि चालताबेरिया क्षेत्र के एक तालाब से भी बड़ी संख्या में बम बरामद किए गए हैं. तालाब में मछली पकड़ते समय कुछ बच्चों ने अचानक इन बमों को देखा. इसके बाद, स्थानीय लोगों की मदद से कई बम बरामद किए गए.
विपक्ष ने बड़ी साजिश की कही बात
विपक्षी दल का आरोप है कि ये हथियार सत्ताधारी दल की मदद से जमा किए गए थे और इसके पीछे स्पष्ट राजनीतिक मकसद है. उनका दावा है कि चुनाव से पहले इलाके में दहशत फैलाने और प्रभाव डालने के लिए ऐसी गतिविधियां की जा रही हैं. विपक्षी दल के कार्यकर्ता मोहम्मद आलमगीर राजन ने कहा, “कुछ ही घंटों में इतनी बड़ी संख्या में बम बरामद होना यह साबित करता है कि इन्हें सुनियोजित तरीके से जमा किया गया था. हमने आम लोगों की मदद से इन्हें बरामद किया, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी साजिश है.”
स्थानीय लोग बोले- बम और हथियार जमा किए जा रहे
स्थानीय लोगों का कहना है कि "कुछ लोग सत्ताधारी दल के करीबियों की मदद से इलाके में बम और हथियार जमा किए जा रहे थे. इन हथियारों का इस्तेमाल मुख्य रूप से विपक्षी दल के खिलाफ किया जाना था."
वहीं, तृणमूल नेता मोनिरुल इस्लाम ने कहा, "इस घटना से तृणमूल का कोई लेना-देना नहीं है. वे प्रचार के लिए इस तरह का नाटक कर रहे हैं, क्योंकि आईएसएफ के पैरों तले से जमीन खिसक गई है. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है."
प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू
इस मामले में प्रशासन ने जानकारी दी कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जांच शुरू कर दी गई है. इन बमों को किसने या किस चीज ने रखा था, इनका स्रोत और उद्देश्य क्या था, यह पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं