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कई मुस्लिम बहुल इलाकों में भी हिंदू उम्मीदवार, पुराने चेहरों पर दारोमदार, समझिए TMC की लिस्ट का सार

दिलचस्प बात यह भी है कि पार्टी ने कुछ ऐसे नेताओं को भी उम्मीदवार बनाया है जो पहले बीजेपी में रह चुके हैं या विपक्षी राजनीति से जुड़े थे. इनमें सब्यसाची दत्ता, जिन्होंने पहले बीजेपी के साथ काम किया था, उन्हें टिकट दिया गया है.

कई मुस्लिम बहुल इलाकों में भी हिंदू उम्मीदवार, पुराने चेहरों पर दारोमदार, समझिए TMC की लिस्ट का सार
टीएमसी की सीचू में कई बड़े नामों को भी जगह दी गई है
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  • पार्टी ने पुराने कद्दावर नेताओं पर भरोसा करते हुए नए और युवा चेहरों को भी मौका दिया है
  • उम्मीदवारों में अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक और महिलाओं का विशेष प्रतिनिधित्व शामिल किया गया है
  • पार्टी ने कई सीटों पर ऐसे नेताओं को टिकट दिया है जो पहले बीजेपी या विपक्षी दलों से जुड़े थे
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नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए तृणमूल कांग्रेस ने अपनी उम्मीदवार सूची जारी करते हुए साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी इस बार पूरी तैयारी और संतुलित सामाजिक समीकरण के साथ मैदान में उतर रही है. उम्मीदवारों के चयन में जातीय, क्षेत्रीय, आयु वर्ग और राजनीतिक अनुभव, सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर सूची तैयार की गई है, जिससे साफ है कि यह पूरी तरह से एकसोची-समझी वोट-बैंक रणनीति के तहत बनाई गई है.

ममता बनर्जी ने जिस हिसाब से अपनी उम्मीदवारों की सूची तैयार की है उसे एक बात तो साफ़ है कि वो अपने सारे पुराने क़द्दावर नेताओं पर दोबारा भरोसा करके मैदान में उतार रही हैं ममता यह बख़ूबी जानती है कि 3 बार शासन करने के बाद वर्षों की एंटी इनकम बंसी उनके चेहरे पर वोट माँगने से कम हो जाती है यही वजह है कि इस बार पुराने नेताओं को नाराज़ न करते हुए उन्हें उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया गया है लेकिन नए चेहरों को शामिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है.

वोट बैंक के आधार पर उम्मीदवारों का चुनाव हुआ है कई इलाक़े ऐसे हैं जहाँ पर मुसलमानों की आबादी ज़्यादा है पर तृणमूल कांग्रेस ने हिंदु उम्मीदवार उतार दिए हैं.जारी सूची के अनुसार तृणमूल कांग्रेस ने कुल उम्मीदवारों में 78 अनुसूचित जाति (SC), 17 अनुसूचित जनजाति (ST), 47 अल्पसंख्यक और 52 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है. पार्टी ने एक बार फिर सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है, ताकि हर वर्ग में अपना मजबूत जनाधार कायम रखा जा सके.

आयु वर्ग के हिसाब से देखें तो पार्टी ने युवा और अनुभवी नेताओं का मिश्रण रखा है.

31 वर्ष से कम उम्र के 4 उम्मीदवार

31 से 40 वर्ष के बीच 38 उम्मीदवार

41 से 50 वर्ष के 88 उम्मीदवार

51 से 60 वर्ष के 89 उम्मीदवार

61 से 70 वर्ष के 47 उम्मीदवार

71 से 80 वर्ष के 23 उम्मीदवार

81 से 90 वर्ष के 2 उम्मीदवार

इस आंकड़े से स्पष्ट है कि पार्टी ने एक तरफ युवाओं को मौका दिया है, तो दूसरी तरफ पुराने और अनुभवी नेताओं पर भी भरोसा कायम रखा है.सूची में ज्यादातर मौजूदा मंत्रियों को दोबारा टिकट दिया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि ममता बनर्जी सरकार अपने कामकाज के आधार पर चुनाव लड़ना चाहती है. वहीं कई सीटों पर नए और युवा चेहरों को मौका देकर संगठन को ताजा ऊर्जा देने की कोशिश भी की गई है.

दिलचस्प बात यह भी है कि पार्टी ने कुछ ऐसे नेताओं को भी उम्मीदवार बनाया है जो पहले बीजेपी में रह चुके हैं या विपक्षी राजनीति से जुड़े थे. इनमें सब्यसाची दत्ता, जिन्होंने पहले बीजेपी के साथ काम किया था, उन्हें टिकट दिया गया है. इसके अलावा नंदीग्राम से पबित्र कर को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने उस सीट पर खास रणनीतिक दांव चला है, जिसे राज्य की सबसे प्रतिष्ठित सीटों में माना जा रहा है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उम्मीदवारों की यह सूची बताती है कि तृणमूल कांग्रेस इस चुनाव को सिर्फ सत्ता बचाने के रूप में नहीं बल्कि संगठन को मजबूत करने और हर वर्ग में अपनी पकड़ बनाए रखने की लड़ाई के रूप में देख रही है.पुराने दिग्गजों को बनाए रखते हुए नए चेहरों को मौका देना, महिलाओं और अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देना और रणनीतिक सीटों पर खास उम्मीदवार उतारना—इन सब से साफ है कि ममता बनर्जी ने 2026 का चुनाव पूरी योजना के साथ लड़ने का फैसला किया है.

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