- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में किया जाएगा
- विपक्षी दलों ने चुनाव को एक या दो चरणों में कराने की मांग की थी ताकि गड़बड़ी रोकी जा सके
- चुनाव आयोग ने सुरक्षा बलों और अधिकारियों के सुझाव के आधार पर दो चरणों में चुनाव कराने का निर्णय लिया
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए तारीखों का ऐलान हो गया है. पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी. यानी इस बार राज्य में दो चरणों में मतदान होगा. पिछली बार यानी 2021 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में वोटिंग हुई थी. इसके साथ ही 2024 के लोकसभा चुनाव में भी 7 चरणों में मतदान हुए. ऐसे में आखिर चुनाव आयोग ने बंगाल में केवल दो चरणों में मतदान कराने का फैसला क्यों लिया है? आइए समझते हैं.
विपक्षी दलों ने की भी मांग
पश्चिम बंगाल में विपक्षी दलों ने लगातार इसकी मांग की. हाल ही में जब विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा चुनाव आयोग की टीम बंगाल गई थी, तो बीजेपी, सीपीआईएम और कांग्रेस सभी विपक्षी दलों ने एक सुर में मांग की थी कि चुनाव 1 या अधिकतम 2 से 3 चरणों में ही कराए जाएं. विपक्ष का तर्क था कि कई चरणों के लंबे चुनाव से असामाजिक तत्वों को एक चुनावी क्षेत्र से दूसरे चुनावी क्षेत्र में जाकर गड़बड़ी करने और वोटर्स को डराने का मौका मिल जाता है.
चुनाव आयोग के अधिकारी ने बताया क्यों दो चरणों में होगा चुनाव
चुनावों की तारीखों के ऐलान से पहले चुनाव आयोग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर राज्य की अधिकतर राजनीतिक पार्टियों ने कोलकाता में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ अपनी हालिया बैठक के दौरान एक या दो चरणों में चुनाव कराने की मांग की थी. उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल सहित अन्य अधिकारियों से भी इसी तरह के सुझाव मिले थे.
अधिकारी ने बताया, ‘पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराने से चुनाव संबंधी हिंसा को रोकने में मदद मिलेगी क्योंकि उपद्रवियों को एक जगह से दूसरी जगह जाकर गड़बड़ी फैलाने का समय नहीं मिलेगा.' अधिकारी ने कहा कि चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चिंता का विषय रहा है.

क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?
इसके साथ ही एक्सपर्ट्स का मानना है कि चुनाव आयोग ने दो चरण में चुनाव कराने का उचित फैसला लिया है. पश्चिम बंगाल का चुनावी इतिहास हिंसा से लेकर हमेशा से संवेदनशील रहा है. 2021 के 8 चरणों वाले चुनाव करीब एक महीने से ज्यादा चले थे, जिससे तनाव और हिंसा का दौर काफी लंबा खिंच गया था. चुनाव को सिर्फ 2 चरणों में समेटने से हिंसा की गुंजाइश कम होगी और असामाजिक तत्वों को माहौल बिगाड़ने का लंबा वक्त नहीं मिलेगा.
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