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This Article is From Apr 04, 2025

राज्यसभा में पास हुआ वक्फ संशोधन बिल: जानें 10 बड़ी बातें

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह वक्फ विधेयक कोई सामान्य कानून नहीं है. इस कानून को राजनीतिक फायदे के लिए हथियार बनाया जा रहा है. यह देश की विविधता को सुनियोजित तरीके से कमजोर करने के लिए मोदी सरकार द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है.

राज्यसभा में पास हुआ वक्फ संशोधन बिल: जानें 10 बड़ी बातें
लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पारित हुआ वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025
  1. वक्फ (संशोधन) विधेयक राज्यसभा में भी पारित: वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 राज्यसभा में पारित हो गया है. इसके साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई है. ऊपरी सदन में गुरुवार को पेश होने के बाद 11 घंटे चली चर्चा के उपरांत शुक्रवार तड़के विधेयक पारित हुआ. इसके पक्ष में 128 और विरोध में 95 मत पड़े. लोकसभा पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी थी. लोकसभा में इस विधेयक के पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े थे.
  2. क्या है वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025? इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम में संशोधन के जरिए वक्फ बोर्ड के ढांचे में बदलाव और कानूनी विवादों को कम करना है. वक्फ (संशोधन) विधेयक के अनुसार वक्फ न्यायाधिकरण को मजबूत किया जाएगा, एक व्यवस्थित चयन प्रक्रिया होगी और सक्षम विवाद निस्तारण प्रक्रिया के लिए इसका निर्धारित कार्यकाल होगा.
  3. क्या हैं प्रावधान: विधेयक के प्रावधानों के अनुसार न्यायाधिकरण के निर्णयों को दीवानी वाद के जरिये चुनौती दी जा सकेगी. इसके प्रावधानों के अनुसार वक्फ संस्थाओं द्वारा वक्फ बोर्ड को दिया जाने वाला अनिवार्य योगदान सात प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है. एक लाख रूपये से अधिक आय वाले वक्फ संस्थानों को राज्य प्रायोजित अंकेक्षण करवाना होगा. विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि संपत्ति को वक्फ को घोषित करने से पहले महिलाओं को उनकी विरासत दी जाएगी तथा इसमें विधवा एवं तलाकशुदा महिलाओं एवं अनाथ बच्चों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. इसमें प्रस्ताव किया गया है कि जिलाधिकारी से ऊपर के रैंक का कोई अधिकारी वक्फ घोषित की गयी सरकारी जमीन की जांच करेगा.
  4. किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में पेश किया था विधेयक: लोकसभा से पारित होने के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया था. केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसके जरिए धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का सवाल ही नहीं है. विधेयक पेश होने के बाद चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसके फायदे गिनाए और विपक्ष पर देश के मुसलमानों को गुमराह करने के आरोप लगाए. दूसरी ओर, विपक्ष के नेताओं ने इसे संविधान के खिलाफ बताया.
  5. एक करोड़ सुझाव मिले: केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में बिल पेश करते हुए कहा, "वक्फ संशोधन विधेयक के समर्थन में छोटे-बड़े एक करोड़ सुझाव मिले हैं. संयुक्त संसदीय समिति ने 10 शहरों में जाकर विधेयक को लेकर लोगों की राय जानी और 284 संगठनों से बातचीत की गई. आज की स्थिति में, 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैं. 2006 में, अगर सच्चर समिति ने 4.9 लाख वक्फ संपत्तियों से 12,000 करोड़ रुपए की कमाई का अनुमान लगाया था, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि ये संपत्तियां अब कितनी आय उत्पन्न कर रही होंगी. आज आप मार्केट रेट के हिसाब से अनुमान लगा सकते हैं."
  6. वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना है. उन्होंने कहा कि इस सदन के माध्यम से देश की जनता को बताना चाहता हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार पूरी तरह से लोकतांत्रिक नियमों का पालन करके आगे बढ़ रही है. वक्फ संपत्तियों के सही रखरखाव और जवाबदेही तय करने की जरूरत है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 70 साल तक किसने मुस्लिम समुदाय को डर में रखा? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक इस नीति को अपनाया, लेकिन अब जनता ने इसका परिणाम देख लिया है.
  7. वक्फ विधेयक कोई सामान्य कानून नहीं : नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह वक्फ विधेयक कोई सामान्य कानून नहीं है. इस कानून को राजनीतिक फायदे के लिए हथियार बनाया जा रहा है. यह देश की विविधता को सुनियोजित तरीके से कमजोर करने के लिए मोदी सरकार द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है.
  8. विधेयक को गंभीरता से तैयार किया गया: भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इस विधेयक को तैयार करने में पूरी गंभीरता से काम किया गया है, लेकिन इसके प्रावधानों को लेकर कुछ लोग गलतफहमी फैला रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि देश में सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड अलग-अलग क्यों हैं? इतना ही नहीं, ताज महल तक पर वक्फ बोर्ड ने दावा ठोक दिया। उन्होंने कहा कि सरकार मुस्लिम समाज के कल्याण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. 
  9. क्या बोले कपिल सिब्बल:  निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि वह अपनी संपत्ति जिसे चाहें, दान दे सकते हैं; उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है. मान लीजिए मैं हिंदू हूं, मुस्लिम हूं, सिख हूं या ईसाई हूं और मेरे पास कोई संपत्ति है जिसे मैं दान में देना चाहता हूं, तो मुझे कौन रोक सकता है, कोई भी नहीं रोक सकता. 1954 और 1995 में जो प्रावधान किए गए, उनमें कहा गया था कि केवल मुसलमान वक्फ बना (दान दे) सकते हैं. कोई और व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी यहां वक्फ बोर्ड को दान नहीं दे सकता. साल 2013 में जो संशोधन लाया गया, उसने इस प्रतिबंध को समाप्त कर दिया. अब इस नए संशोधन विधेयक में यह कहा गया है कि केवल मुसलमान ही वक्फ दे सकते हैं. उन्होंने ऐसे अदालती फैसलों का जिक्र किया, जहां हिंदुओं ने अपनी जमीनें विभिन्न परियोजनाओं जैसे कि कब्रिस्तान आदि के लिए दान में दी हैं.
  10. यह विधेयक बुलडोजर के लिए एक कानूनी कवर: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने कहा कि गाहे-बगाहे किसी पुरानी मस्जिद के नीचे कुछ चीजें ढूंढी जा रही हैं. इस तरह के माहौल में वक्फ संशोधन विधेयक लाने से सरकार की नीयत पर सवाल उठना स्वाभाविक है. देश का माहौल कैसा है, इस पर एक नजर डालिए. कभी आर्थिक बहिष्कार की बात की जाती है, पूजा स्थल अधिनियम पर सवाल उठाया जाता है. इस तरह के माहौल में आपके विधेयक के मसौदे और नीयत दोनों पर सवालिया निशान लग जाता है. कई बार लगता है कि यह विधेयक बुलडोजर के लिए एक कानूनी कवर है.
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