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This Article is From Mar 12, 2023

VIDEO : हिन्दी बोलने को लेकर बेंगलुरू में ऑटो चालक और महिला में हुई नोकझोंक

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को अभी तक लाखों लोगों देखा है. इस वीडियो को देखने के बाद ट्वीटर यूजर्स के बीच बहस छिड़ गई है.

VIDEO : हिन्दी बोलने को लेकर बेंगलुरू में ऑटो चालक और महिला में हुई नोकझोंक
बेंगलुरू में ऑटो चालक और महिला यात्री के बीच हुई कहासुनी
  • ऑटो चालक ने महिला यात्री से की बहस
  • कहा - ये हमारी जमीन है यहां कन्नड़ ही बोलना होगा
  • ऑटो चालक ने कहा हम हिंदी नहीं बोलेंगे
नई दिल्ली:

हिन्दी बोलने को लेकर ऑटो चालक और महिला यात्री के बीच हो रही नोकझोंक का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. घटना बेंगलुरू की बताई जा रही है. वायरल हो रहे इस वीडियो में ऑटो चालक महिला यात्री से कह रहा है कि आखिर वो हिन्दी क्यों बोले. साथ ही वो महिला से कन्नड़ में बात करने को भी कह रहा है. 26 सेकेंड के इस वीडियो में ऑटो चालक बोल रहा है कि यह हमारी जमीन हैं, हम हिन्दी क्यों बोलें. आपको कन्नड़ में बात करनी चाहिए क्योंकि आप बाहर से यहां आई हो. ऑटो चालक की यह पूरी बातचीत उसी ऑटो में सवार महिला यात्री ने अपने फोन में कैद कर लिया. 

हालांकि, एनडीटीवी इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है.

ऑटो चालक और महिला यात्री के बीच बातचीत के अंश यहां पढ़ें....

चालक - मैं हिन्दी में क्यों बात करूं?

महिला - ओके, ओके, ओके

चालक - यह कर्नाटक है, आपको यहां कन्नड़ में बात करना होगा. तुम लोग उत्तर भारतीय भिखारी हो. 
महिला - क्यों, हम कन्नड़ में बात नहीं करेंगे. 
चालक - यह हमारी जमीन है नाकि आपकी. आपको कन्नड़ में बात करना ही होगा. मैं हिन्दी में क्यों बात करूं. 

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को अभी तक लाखों लोगों देखा है. इस वीडियो को देखने के बाद ट्वीटर यूजर्स के बीच बहस छिड़ गई है. कुछ यूजर्स जहां इस घटना को लेकर ऑटो चालक के खिलाफ अपनी बात रख रहे हैं तो कुछ यूजर्स उसका समर्थन करता भी दिख रहे हैं. ऐसे ही एक ट्वीटर यूजर ने कहा कि बंगलौर एशिया की सिलिकॉन वैली कैसे बन जाएगा जब हम मूल निवासी और प्रवासी दोनों एक आम भाषा समझते हुए भी छोटे-मोटे मुद्दों से नहीं निपट सकते हैं?

हालांकि कुछ लोगों ने ऑटो चालक का समर्थन भी किया है. ऐसे ही एक ट्वीट में एक यूजर ने लिखा कि हमे उस ऑटो चालक का सम्मान करना चाहिए जो अपनी पहचान के लिए लड़ा. किसी को भी अपनी भाषा किसी पर भी थोपने का अधिकार नहीं है. 

गौरतलब है कि दक्षिण के राज्यों के लिए हिन्दी बीते कुछ समय से एक मुद्दा रहा है. पिछले साल ही कुछ दक्षिण भारत के राज्यों ने गृहमंत्री अमित शाह की उस अपील पर आपत्ति जताई थी जिसके तहत हिन्दी का प्रसार प्रचार पूरे देश में करने की बात कही गई थी. 

पूरी स्टोरी पढ़ें

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