संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है. भारतीय जनता पार्टी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर वंदे मातरम को लेकर "पाखंड" का आरोप लगाया है. अमित मालवीय ने कहा कि इन दलों का अचानक राष्ट्रीय गीत के प्रति प्रेम "हास्यास्पद" है, क्योंकि इतिहास में उन्होंने ही इसे कमजोर किया था.
The Congress party's and Mamata Banerjee's sudden love for Vande Mataram would be hilarious if it weren't so blatantly hypocritical.
— Amit Malviya (@amitmalviya) November 29, 2025
This is the same Congress that truncated the National Song in 1935 to appease communal interests. And Mamata Banerjee, the Chief Minister who dare… pic.twitter.com/l7NYXR6W6m
मालवीय का आरोप
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस ने 1935 में वंदे मातरम को सांप्रदायिक हितों के लिए काट-छांट किया था. ममता बनर्जी, जो कभी 'वंदे मातरम' या 'भारत माता की जय' बोलने से बचती थीं, ताकि उनका वोट बैंक उनसे नाराज़ न हो, अब कैमरों के सामने आक्रोश दिखा रही हैं. उन्होंने दावा किया कि संसद में नारेबाजी पर रोक कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह परंपरा संविधान सभा के समय से चली आ रही है. मालवीय ने कई ऐतिहासिक उदाहरण दिए-
- 15 मार्च 1948: संविधान सभा के अध्यक्ष ने कहा था कि सदन में "थैंक यू", "जय हिंद", "वंदे मातरम" जैसे नारे नहीं लगाए जाएंगे
- 1962: चीन आक्रमण पर बहस के दौरान जब एक सांसद ने "भारत माता की जय" का नारा लगाया, तो लोकसभा अध्यक्ष ने इसे अनुचित बताया
- इन नियमों को बाद में Kaul & Shakdhar नामक संसदीय प्रक्रिया की किताब में दर्ज किया गया
संसदीय बुलेटिन का संदर्भ
राज्यसभा सचिवालय ने 24 नवंबर को जारी बुलेटिन में फिर से यह परंपरागत नियम दोहराया कि सदन में किसी तरह के नारे नहीं लगाए जाएंगे. मालवीय ने स्पष्ट किया कि यह कोई सरकारी आदेश या वंदे मातरम पर प्रतिबंध नहीं है, बल्कि सदन की गरिमा बनाए रखने का नियम है.
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कांग्रेस और तृणमूल का रुख
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने इस बुलेटिन पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि वंदे मातरम और भारत माता की जय जैसे नारे देशभक्ति के प्रतीक हैं और इन पर रोक लगाना गलत है. ममता बनर्जी ने इसे "अलोकतांत्रिक" बताया.
बीजेपी का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहा है. अमित मालवीय ने लिखा कि यह कोई देशभक्ति का सवाल नहीं है, बल्कि संसदीय शिष्टाचार का हिस्सा है. कांग्रेस और ममता बनर्जी को पहले यह बताना चाहिए कि उन्होंने दशकों तक वंदे मातरम से दूरी क्यों बनाई.
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