केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को उत्तर प्रदेश में 'एक जनपद-एक व्यंजन' (One District One Cuisine) योजना की शुरुआत की. यह योजना प्रदेश के 'एक जिला-एक उत्पाद' (One District One Product) कार्यक्रम की तर्ज पर तैयार की गई है.यह योजना प्रदेश में खाने-पीने की चीजों को एक अलग पहचान देना है. 'ओडीओसी' योजना से हलवाई,खाद्य सामग्री बेचने वालों और स्थानीय निवासियों को फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि इससे उनके खास व्यंजनों को बड़े और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनेगी. इससे स्थायी आजीविका के अवसर भी पैदा होंगे. सरकार ने इस योजना को शुरू करने के लिए राज्य के स्थापना दिवस को चुना. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश दिवस पर ही 2018 में 'एक जिला-एक उत्पाद' योजना की भी शुरुआत की थी.हालांकि अभी इसकी कोई सूची सामने नहीं आई है. इसलिए अभी यह पता नहीं चल पाया है कि इसमें केवल शाकाहारी व्यंजन शामिल किए गए है या इसमें मांसाहारी व्यंजनों को भी शामिल किया जाएगा.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल
पिछले साल नवंबर में संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को ने लखनऊ को उसकी खान-पान की समृद्ध विरासत के लिए 'गैस्ट्रोनॉमी कैपिटल' का दर्जा दिया था. इसी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक जिला–एक व्यंजन' की अवधारणा पेश की थी. उस समय मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह वैश्विक सम्मान सिर्फ लखनऊ के लिए नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की विविध भोजन संस्कृति के लिए है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रदेशवासियों से अपील की कि वे घर पर बने पारंपरिक व्यंजनों की फोटो या वीडियो साझा करें और #OneDistrictOneCuisine हैशटैग का उपयोग करें.
मेरे सम्मानित प्रदेश वासियों,
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) November 8, 2025
राजधानी लखनऊ को UNESCO ने 'क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी के रूप में चुना है। व्यंजन बनाने में रचनात्मकता के लिए मिली यह मान्यता लखनऊ ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के विविधता से भरे खान-पान का वैश्विक सम्मान है।
दुनिया को इस अप्रतिम स्वाद से परिचित… pic.twitter.com/N2MK1wvqTG
'एक जिला, एक व्यंजन' योजना के तहत हर जिले से एक विशिष्ट, ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यंजन की पहचान की जाएगी. योजना का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश की पारंपरिक पाक-कला संरक्षण व संवर्धन है. इसके साथ ही उस व्यंजन को तैयार करने वाले स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों का पंजीकरण और व्यंजन की गुणवत्ता का मानकीकरण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग है. पैकेजिंग, जीआई टैग और ई-कॉमर्स के जरिए इन व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिश की जाएगी.

One District One Cuisine में क्या क्या करेगी सरकार
सरकार योजना के अंतर्गत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के सहयोग से फूड पैकेजिंग, व्यंजन की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और उसके सुरक्षित परिवहन का प्रशिक्षण संबंधित लोगों को देगी. स्थानीय उद्यमियों को गुणवत्ता का एफएसएसएआई सर्टिफिकेट लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
पर्यटन विभाग के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और महोत्सवों में ओडीओसी फूड स्टाल लगाए जाएंगे. इससे पर्यटक एक ही स्थान पर उत्तर प्रदेश के व्यंजनों का विविध जायका ले पाएंगे.
उत्तर प्रदेश के हर जिले में कुछ न कुछ स्पेशल व्यंजन जरूरत मिलता है. जैसे आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा,मेरठ की गजक के अलावा भी यूपी के बहुत से ऐसे व्यंजन हैं जो काफी लोकप्रिय हैं. लेकिन प्रचार-प्रसार की कमी के चलते उनको ठीक से बाजार नहीं मिल पाता है. इनमें बाराबंकी की चंद्रकला, बलिया का लिट्टी-चोखा, लखनऊ की रेवड़ी और मलाई मक्खन, वाराणसी का लौंगलता, हरदोई के संडीला का लड्डू और कानपुर के समोसे.योगी सरकार की इस नई योजना के जरिए प्रदेश के 75 जिलों के व्यंजनों के स्वाद और सुगंध से दुनिया को परिचित कराएगी.
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