- विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरान युद्ध में फंसे 1200 से ज्यादा भारतीयों को जमीनी रास्ते से निकाला गया है
- इनमें अधिकतर छात्र हैं, जिन्हें आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते निकालकर देश वापस लाया जा रहा है
- तनाव के बीच भारत ने लेबनान में तैनात अपने शांति सैनिकों की सुरक्षा को लेकर भी प्रतिबद्धता दोहराई
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में फंसे भारतीयों को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को ताजा अपडेट दिया. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अब तक ईरान से लगभग 1200 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित तरीके से निकाला जा चुका है. भारत सरकार ने स्वतंत्र और खुले समुद्र से सुरक्षित आवाजाही को लेकर भी प्रतिबद्धता दोहराई.
आर्मेनिया, अजरबैजान के रास्ते निकाले गए
अंतर मंत्रालयी ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए जायसवाल ने बताया कि इन भारतीयों को जमीनी रास्ते से आर्मेनिया और अजरबैजान होकर निकाला गया. प्रवक्ता के मुताबिक, ईरान से निकाले गए लगभग 1200 भारतीयों में 845 छात्र हैं. इनमें से 996 भारतीयों को आर्मेनिया और 204 को अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित तरीके से निकाला गया है. अब उन्हें वापस लाया जा रहा है. कुछ लौट भी चुके हैं.
गल्फ में रह रहे भारतीय सुरक्षित
जायसवाल ने बताया कि गल्फ रीजन में खासकर खाड़ी देशों में एक करोड़ से अधिक भारतीय रहते हैं. वो सभी सुरक्षित हैं. संबंधित देशों में हमारे दूतावास उन लोगों के संपर्क में हैं. उन्होंने बताया कि इस जंग की चपेट में आकर 8 भारतीयों की मौत हुई है और एक लापता है.
पश्चिम एशिया से 6.24 यात्री आए
पश्चिम एशिया में संकट गहराने के बाद से खाड़ी देशों से लगभग 6 लाख यात्री भारत आ चुके हैं. विदेश मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी (गल्फ) असीम महाजन ने बताया कि 28 फरवरी को ईरान युद्ध छिड़ने के बाद से 6.24 लाख यात्री खाड़ी देशों से भारत आ चुके हैं. विमान कंपनियां सुरक्षा को देखते हुए नॉन शेड्यूल फ्लाइटें संचालित कर रही हैं. आज भी यूएई और अन्य देशों से करीब 90 फ्लाइटें आने का अनुमान है.
जहाजों की आवाजाही पर संपर्क में सरकार
समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत मुक्त और खुली समुद्री वाणिज्यिक आवाजाही की पक्षधर है. युद्ध की वजह से समुद्र में फंसे जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार लगातार ईरान और अन्य संबंधित पक्षों के संपर्क में है. इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ दिनों में एलपीजी और एलएनजी से भरे छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार करने में सफल रहे हैं. उन्होंने होर्मुज के मुद्दे पर ब्रिटेन द्वारा आयोजित बैठक में आज शाम भारतीय विदेश सचिव के शामिल होने की भी जानकारी दी.
शांति सैनिकों की सुरक्षा जरूरी
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत ने लेबनान में तैनात अपने शांति सैनिकों की सुरक्षा को लेकर भी प्रतिबद्धता दोहराई है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के तहत भारत के लगभग 600 सैनिक तैनात हैं. भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाला देश है. इन मिशनों की गरिमा और सुरक्षा को हर हाल में अक्षुण्ण रखा जाना चाहिए.
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