- USS अब्राहम लिंकन पर तैनात अमेरिकी नौसैनिक के पिता को अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में लिया है
- नौसैनिक जोशुआ एविलेस नौ महीने से मिडिल ईस्ट में युद्धपोत पर तैनात हैं और अब घर लौट रहे हैं
- जोशुआ के पिता को गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है
अमेरिका के जंगी जहाज USS अब्राहम लिंकन पर तैनात एक अमेरिकी नौसैनिक का दर्द सामने आया है. नौसैनिक 9 महीने से ज्यादा समय अमेरिका के लिए जंग लड़ रहा है, लेकिन अब उसके ही पिता को अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया. अपने पिता की गिरफ्तारी की खबर खुद नौसैनिक ने फेसबुक पोस्ट के जरिए दी है. यह युद्धपोत ईरान के साथ युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट में तैनात था और अब घर लौट रहा है.
USS अब्राहम लिंकन शनिवार को मिडिल ईस्ट से वापस रवाना हुआ. फाइटर जेट से लैस इस युद्धपोत ने 200 दिनों से ज्यादा समय तक किसी बंदरगाह पर रुककर वहां पोर्ट कॉल नहीं किया. यह लगातार समुद्र में रहने का आधुनिक दौर का रिकॉर्ड है.
क्या है पूरा मामला?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल ने लुइस मैनुअल एविलेस रोआ को गिरफ्तार किया है. वह मूल रूप से निकारागुआ के रहने वाले हैं. अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के एक प्रवक्ता ने रविवार को बताया कि फ्लोरिडा के की वेस्ट में एक गाड़ी को रोकने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया. बॉर्डर पेट्रोल इसी विभाग का हिस्सा है.
उन्होंने शनिवार को लिखा, “अभी मुझे फोन आया कि मेरे पिता को ICE ने पकड़ लिया है.” नौसैनिक ने यह भी बताया कि उनके पिता के पास ड्राइविंग लाइसेंस, सोशल सिक्योरिटी कार्ड और काम करने की अनुमति थी. जोशुआ ने आगे लिखा, “हमने उनका ग्रीन कार्ड मंजूर कराने के लिए इमिग्रेशन से जुड़ी सारी प्रक्रिया पूरी की है. अब हम सिर्फ मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बहुत दुखद है. मुझे नहीं पता कि मैं मानसिक रूप से 12 घंटे से ज्यादा रोज काम कैसे करता रहूं, जब मुझे पता है कि मेरे पिता कहीं हिरासत में हैं और हो सकता है कि उनके साथ किसी अपराधी जैसा व्यवहार किया जा रहा हो.”
अमेरिकी सरकार का क्या कहना है?
अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने कहा कि लुइस मैनुअल एविलेस रोआ गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में दाखिल हुए थे. विभाग ने कहा कि उन्हें देश से बाहर भेजने की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) की हिरासत में रखा जाएगा. DHS ने कहा, “परिवार में किसी व्यक्ति का सेना में होना हमारे देश के कानूनों का उल्लंघन करने की खुली छूट नहीं देता.”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि उनकी इमिग्रेशन पर सख्ती का मकसद देश की अंदरूनी सुरक्षा को बेहतर बनाना है. लेकिन अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि इस सख्ती से बोलने की आजादी और कानूनी प्रक्रिया के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है. उनका कहना है कि इससे खासकर अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के लिए माहौल असुरक्षित हुआ है. इन लोगों ने यह चिंता भी जताई है कि उन्हें उनकी नस्ल या समुदाय के आधार पर गलत तरीके से निशाना बनाया जा सकता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं