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अमेरिका ने कैंसिल किए 2,000 भारतीयों के वीज़ा अपॉइंटमेंट! जानिए कैसे बढ़ सकती हैं दूसरों की भी मुसीबतें

US Cancels Visa Appointment: US Embassy ने अपनी वीज़ा अपॉइंटमेंट सिस्टम में एक बड़ा फ्रॉड पकड़ा है. इंडिया में कुछ लोग "बॉट्स" और "एजेंट्स" के जरिए फेक अपॉइंटमेंट्स बुक कर रहे थे.

US Cancels Visa Appointment: अमेरिका जाने का इंतजार कर रहे भारतीयों को इससे बड़ा झटका लगा है.

US Cancels Visa Appointment: अगर आप अमेरिका जाने की सोच रहे हैं, तो ये खबर आपको ज़रूर झटका दे सकती है! US Embassy ने भारत में 2,000 से ज्यादा वीज़ा अपॉइंटमेंट्स अचानक कैंसल कर दिए हैं. लेकिन ऐसा क्यों हुआ? क्या इससे अमेरिका जाने वालों का सपना और मुश्किल हो गया है? क्या इसका असर सिर्फ कुछ लोगों पर होगा या सभी वीज़ा अप्लाई करने वाले भारतीयों को इससे नुकसान होगा? मतलब आगे क्या इसका दायरा और बढ़ेगा.

दरअसल, ये फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी गड़बड़ी और धांधली सामने आई है. अब सवाल ये है कि ये वीज़ा अपॉइंटमेंट्स कैंसल क्यों हुईं? इससे भारतीयों को क्या नुकसान होगा? क्या स्टूडेंट्स, टूरिस्ट और वर्क वीज़ा पर भी असर पड़ेगा? और भारत सरकार इस मामले पर क्या कर रही है? चलिए, एक-एक करके पूरा मामला समझते हैं…

वीज़ा अपॉइंटमेंट्स क्यों कैंसल किए?

US Embassy ने अपनी वीज़ा अपॉइंटमेंट सिस्टम में एक बड़ा फ्रॉड पकड़ा है. इंडिया में कुछ लोग "बॉट्स" और "एजेंट्स" के जरिए फेक अपॉइंटमेंट्स बुक कर रहे थे. बॉट्स यानी ऑटोमेटेड सॉफ़्टवेयर प्रोग्राम्स, जिनका इस्तेमाल कर के कुछ लोग बिना सही प्रक्रिया अपनाए वीज़ा अपॉइंटमेंट ले रहे थे.

इससे क्या दिक्कत थी?

  • असली एप्लिकेंट्स को स्लॉट नहीं मिल रहे थे.
  • एजेंट्स इन स्लॉट्स को ब्लॉक कर के ऊंचे दामों पर बेच रहे थे.
  • पूरा वीज़ा अपॉइंटमेंट सिस्टम डिस्टर्ब हो रहा था.

जब ये मामला पकड़ा गया, तो US Embassy ने बिना देर किए सख्त कदम उठाते हुए कहा, "हम वीज़ा अपॉइंटमेंट्स में किसी भी तरह के फिक्सिंग या बॉट्स को बर्दाश्त नहीं करेंगे. इसलिए, इन 2,000 अपॉइंटमेंट्स को कैंसल किया जा रहा है और जिन अकाउंट्स ने इन्हें बुक किया था, उन्हें भी सस्पेंड किया जाएगा." यानी, ये सिर्फ वीज़ा कैंसल करने का मामला नहीं है, बल्कि पूरी सिस्टम को सुधारने की कोशिश की जा रही है.

इसका असर किन लोगों पर पड़ेगा?

  1. अब सवाल ये उठता है कि क्या इसका असर सिर्फ उन्हीं लोगों पर पड़ेगा, जिनकी अपॉइंटमेंट्स कैंसल हुई हैं? जवाब है— नहीं! इसका असर भारत में हजारों वीज़ा अप्लिकेंट्स पर पड़ सकता है.
  2. B1 और B2 वीज़ा अप्लिकेंट्स: ये वीज़ा बिज़नेस और टूरिज़्म के लिए होते हैं. पहले से ही इन वीज़ा की वेटिंग 800 से 1,000 दिन तक है. अब अगर अपॉइंटमेंट्स कैंसल होंगी, तो वेटिंग टाइम और लंबा हो सकता है.
  3. स्टूडेंट्स: स्टूडेंट वीज़ा की अपॉइंटमेंट्स भी पहले से कम हो रही हैं. अगर सिस्टम और सख्त हुआ, तो वीज़ा अप्रूवल रेट भी गिर सकता है. पिछले कुछ सालों में स्टूडेंट वीज़ा रिजेक्शन रेट बढ़ा है.
  4. H1B और वर्क वीज़ा: भारत से हर साल हजारों लोग H1B वीज़ा के लिए अप्लाई करते हैं, लेकिन अब अगर फ्रॉड की वजह से सिस्टम टाइट हो रहा है, तो H1B वीज़ा पाने वाले इंडियन्स को भी मुश्किलें हो सकती हैं.

भारत सरकार क्या कर रही है?

इस वीज़ा देरी को लेकर भारत सरकार पहले भी अमेरिका से बात कर चुकी है. 2022 में, एस जयशंकर ने तत्कालीन US Secretary of State Antony Blinken से इस मुद्दे पर चर्चा की थी, लेकिन तब अमेरिका ने COVID-19 का बहाना बनाया और कहा कि स्टाफ की कमी की वजह से देरी हो रही है. फिर जनवरी 2025 में, जब  जयशंकर डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण में गए, तो उन्होंने इस मुद्दे को फिर उठाया. इस बार अमेरिका के नए विदेश मंत्री Marco Rubio से बात हुई.  भारत ने अमेरिका को साफ कहा कि—"अगर भारतीयों के वीज़ा प्रोसेस में सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापार और रिश्तों पर भी पड़ेगा!" अब देखना ये है कि क्या अमेरिका इस मुद्दे को गंभीरता से लेता है या नहीं.

क्या आपका वीज़ा भी खतरे में है?

अगर आपने किसी एजेंट या थर्ड पार्टी के जरिए वीज़ा अप्लाई किया है, तो सतर्क हो जाइए! US Embassy अब सभी अपॉइंटमेंट्स की जांच कर रही है. अगर आपकी अपॉइंटमेंट किसी बॉट या एजेंट के जरिए बुक की गई है, तो वो भी कैंसल हो सकती है. Visa Approval Rate घट सकता है, यानी इंटरव्यू के दौरान सख्त सवाल पूछे जा सकते हैं. स्टूडेंट्स और वर्क वीज़ा अप्लिकेंट्स को क्लीन डॉक्युमेंटेशन के साथ अप्लाई करना होगा. तो कुल मिलाकर पूरे मामले का सार ये है कि अमेरिका ने जो 2,000 अपॉइंटमेंट्स कैंसल किए हैं, उसका मुख्य कारण फ्रॉड और बॉट्स हैं. इससे उन लोगों का भी नुकसान होगा, जो सही तरीके से अपॉइंटमेंट पाने का इंतजार कर रहे थे. भारत सरकार इस मुद्दे को हल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी कोई ठोस समाधान नहीं दिख रहा.

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