बिहार सरकार में मंत्री और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा (रालोमो) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर असमंजस बना हुआ है. दीपक प्रकाश विधायक बने बिना बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं और नियमानुसार मंत्री बनने के छह महीने के अंदर एमएलए या एमएलसी बनना अनिवार्य होता है. लेकिन पिछले दिनों एमएलसी सीटों के नामांकन में दीपक प्रकाश का नाम नहीं आ सका जिसके बाद उनके मंत्री बने रहने पर प्रश्नचिह्न लगा हुआ है. दीपक प्रकाश पहली बार पिछले साल नवंबर में नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बने थे लेकिन वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं बने. इसके बाद सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने इस साल मई में दोबारा मंत्री पद की शपथ ली थी. लेकिन उनकी नियुक्ति को चुनौदी दी जा रही है. यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया गया है और मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने स्वयं इस बारे में दायर याचिका की सुनवाई की. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें, बिहार सरकार, और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. इस नोटिस पर अब दीपक प्रकाश की प्रतिक्रिया सामने आई है.
सुप्रीम कोर्ट की नोटिस पर दीपक प्रकाश ने क्या कहा?
दीपक प्रकाश की पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनसे सुप्रीम कोर्ट की नोटिस तथा बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने दूसरी बार मंत्री बनाए जाने के मुद्दे पर सवाल पूछे गए. दीपक प्रकाश ने कहा कि अभी तक उन्हें आधिकारिक रूप से कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है.
उन्होंने कहा, "मुझे फिलहाल मीडिया के माध्यम से ही जानकारी मिली है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किया गया है. जब तक आधिकारिक तौर पर नोटिस प्राप्त नहीं हो जाता तब तक इस विषय पर कोई विस्तृत टिप्पणी करना उचित नहीं होगा. नोटिस मिलने के बाद कानूनी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा और उसके अनुसार जवाब दिया जाएगा."

उपेंद्र कुशवाहा राज्य सभा के सांसद हैं
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क्या मंत्री पद से इस्तीफा देंगे?
पत्रकारों ने जब उनसे यह भी पूछा कि क्या इस मामले में वह मंत्री पद से इस्तीफा देंगे? उन्होंने इसके जवाब में कहा कि उन्होंने यह फैसला गठबंधन नेतृत्व पर छोड़ दिया है. दीपक प्रकाश ने कहा, "मैं पहले भी मंत्री था और वर्तमान में भी मंत्री हूं. इस विषय में जो भी निर्णय लिया जाना होगा, वह गठबंधन का नेतृत्व करेगा. हम गठबंधन और पार्टी के निर्णयों का सम्मान करते हैं."
दीपक प्रकाश को बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने मंत्री बनाए जाने को लेकर कानूनी सवाल उठाए गए हैं. इसी संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें, बिहार सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. हालांकि, मंत्री ने फिलहाल किसी भी तरह की अटकलों पर प्रतिक्रिया देने से बचते हुए आधिकारिक नोटिस मिलने का इंतजार करने की बात कही है.
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