- दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे का भी करेंगे निरीक्षण
- दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दो साल में 61 मौतें
- NDTV ने जाना क्यों होते हैं हादसे
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी आज राजस्थान के दौरे पर रहेंगे. उनका ये बी-रोड दौरा अपने आप में चर्चा का विषय है. जानकारी के मुताबिक, वे मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे का सफर कार से करेंगे और इस दौरान दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे का हाई-लेवल निरीक्षण भी करेंगे. बता दें कि एक जुलाई की देर रात करीब 2:30 बजे यहां एक भीषण सड़क हादसा हुआ था. हरिद्वार से इंदौर जा रही एक बस एक ट्रक से टकराई थी. इस हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 28 यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे. ये पहला मौका नहीं है, जब यहां एक्सीडेंट हुए हैं.
दौसा के पास दो साल में 61 मौतों के पीछे ये खामियां?
दौसा जिले की सीमा में आने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर वर्ष 2025 में 33 सड़क हादसे हुए, जिनमें 35 लोगों की मौत हुई. वहीं, वर्ष 2026 में जून तक 24 हादसों में 26 लोगों की जान जा चुकी है. इन आंकड़ों से सवाल ये है कि क्या कुछ खामियां हैं, जिनके कारण यहां एक्सीडेंट हो रहे हैं.अगर एक जुलाई के हादसे की समीक्षा करें तो प्रथम दृष्टया ये प्रतीत होता है कि आगे जो ट्रक चल रहा था, उसे जयपुर-अजमेर की तरफ मुड़ना था, लेकिन जिस जीरो पॉइंट पर टर्न है, वहां साफ तरीके से जयपुर-अजमेर नहीं लिखा हुआ था.
क्यों कंफ्यूज हो जाते हैं ड्राइवर?
कट मिस होने के कारण ट्रक धीमा हो गया और ये भी अंदेशा है कि वो पीछे आने की कोशिश कर रहा था. तभी पीछे से आ रही हरिद्वार-इंदौर की बस उससे जोर से टकराई. सूत्रों ने NDTV को बताया है कि दिल्ली की ओर से आने वाले वाहन जब जयपुर 4C लिंक एक्सप्रेस-वे की ओर मुड़ते हैं, तब जीरो पॉइंट पर किसी प्रकार का दिशा-सूचक एरो या साइन बोर्ड नहीं होने से चालक भ्रमित हो जाते हैं. कई वाहन आगे निकलने के बाद अचानक गति धीमी कर वापस लौटने की कोशिश करते हैं.
एरो छोटे, तेज रफ्तार में समझना मुश्किल
कुछ वाहन रिवर्स आते हुए भी देखे गए हैं, जो बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं. टर्न से करीब दो किलोमीटर पहले साइन बोर्ड तो लगे हैं, लेकिन उन पर बने एरो इतने छोटे हैं कि तेज रफ्तार में उन्हें समझना आसान नहीं होता. इसी स्थान पर हाल ही में हुए भीषण हादसे में 8 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी. यही स्थिति दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कई जगह है. साइनेज, संकेतक या साइनबोर्ड से साफ संकेत नहीं मिलते हैं.
जयपुर के लिए रास्ता दौसा से भी जाता है और कानोता से भी, लेकिन एक भी संकेतक ये नहीं कहता कि क्या ये दौसा-जयपुर का मोड़ है या कानोता-जयपुर का. राजस्थान के मुख्य सचिव ने भी इस घटनाक्रम को लेकर दो अहम बैठकें की हैं. एक जुलाई के हादसे के बाद आईजी राहुल प्रकाश के नेतृत्व में अस्थायी अतिक्रमण एक्सप्रेस-वे से हटाए गए हैं.
यह भी पढ़ें- न पेट्रोल, न डीजल, न CNG... दिल्ली में 'कचरे' से चलेंगी बसें, नितिन गडकरी बोले- मेरा कहा गलत हुआ क्या!
IG ने कहा- जांच के बाद पता चलेगा एक जुलाई हादसे का कारण
NDTV को IG राहुल प्रकाश ने बताया, "अलवर से लेकर दौसा तक सभी अस्थायी अतिक्रमण हटा दिए गए हैं. इससे सड़क हादसों का खतरा बना रहता है, लेकिन एक जुलाई के हादसे का क्या कारण था, ये तो जांच के बाद ही साबित हो पाएगा."
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हाल ही में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद दौसा जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया. लगातार बढ़ते सड़क हादसों और जान-माल के नुकसान को देखते हुए जिला कलेक्टर सौम्या झा के निर्देश पर जिला सड़क सुरक्षा टास्क फोर्स ने एक्सप्रेस-वे की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच की. समिति के सदस्य विष्णु शर्मा ने बताया कि अतिरिक्त जिला कलेक्टर के नेतृत्व में 8 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है. यह समिति 8 और 9 जुलाई को पैकेज 6, 7 और 8 के चैनेज क्रमांक 150 से 240 किलोमीटर तक का निरीक्षण करेगी.
प्रथम दृष्टया जांच में सामने आई कई गंभीर खामियां
प्रारंभिक जांच में कई ऐसी कमियां सामने आई हैं, जो सड़क हादसों का कारण बन सकती हैं. एक्सप्रेस-वे पर लगाए गए कई SOS फोन सक्रिय नहीं मिले. कई स्थानों पर दिशा बताने वाले साइन बोर्ड और एरो स्पष्ट नहीं हैं. तेज रफ्तार वाहनों पर निगरानी और स्पीड चालान की कार्रवाई में भी लापरवाही सामने आई है. जीरो पॉइंट पर साइन बोर्ड नहीं होने से भी हादसों का खतरा बढ़ रहा है, ऐसा निष्कर्ष निकला है.
NHAI का ड्रीम प्रोजेक्ट है दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे NHAI का ड्रीम प्रोजेक्ट है और सरकार इसको लेकर गंभीर है. इससे साफ है कि मंत्री खुद गाड़ी से निरीक्षण के लिए निकल रहे हैं. दौसा के बाद वे दोपहर बाद कोटा के पास मुकुंदरा टनल परियोजना का निरीक्षण करेंगे. शाम करीब 5:30 बजे मुकुंदरा टनल पहुंचने का उनका प्रस्तावित कार्यक्रम है.नितिन गडकरी टनल निर्माण कार्य और एक्सप्रेसवे की प्रगति का जायजा लेंगे. इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा करेंगे. निरीक्षण के बाद रतलाम स्थित वे-साइड अमेनिटी के लिए रवाना होंगे.
यह भी पढ़ें- गडकरी की चुनौती,'E20 फ्यूल से खराब होने वाली एक कार का नाम बता दें... पैसे पर चला रहे अभियान'
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं