केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अब E20 पेट्रोल के आलोचकों को चुनौती दे दी है. गडकरी ने कहा है कि कोई एक भी कार का नाम बताएं जिसमें E20 फ्यूल (इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) की वजह से कोई दिक्कत आई है. गडकरी की चुनौती उस वक्त आई है जब E20 फ्यूल को लेकर लगातार सवाल खड़े किये जा रहे हैं. जिसमें कहा जा रहा है कि इससे गाड़ियां खराब हो रही है और गाड़ियों का माइलेज कम होने की शिकायत आ रही है. गडकरी ने यह बयान दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आया है. जिसमें उन्होंने कहा है कि वह देश की तीन प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों को पत्र लिखकर यह मांग करेंगे कि वे लिखित रूप में आश्वासन दें कि ई-20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन को कोई नुकसान नहीं होता और न ही माइलेज में कमी आती है.
हरदीप पुरी ने कहा किसी को दिक्कत नहीं तो दिलचस्पी क्यों
इस मामले में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी का बयान भी सामने आया है. मंगलवार (7 जुलाई) को हरदीप पुरी से पेट्रोल कंट्रोवर्सी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, कंट्रोवर्सी कुछ भी नहीं है यहां 20 करोड़ दो पहिया वाहन और 20 लाख चार पहिया वाहन E20 फ्यूल का इस्तेमाल कर रहे हैं. कंपनी गाड़ियां बना रही है और सर्विस की जा रही है, किसी ने कोई दिक्कत नहीं बताई है. लेकिन अचानक से इसमें दिलचस्पी क्यों.
न मैं कार बनाता हूं और न ही फ्यूल, अगर कार बनाने वाली कंपनी E20 फ्यूल के साथ कंफर्टेबल है तो क्या दिक्कत है. जहां तक E85 की बात है, इसके लिए काफी समय है. इसके लिए नए पेट्रोल पंप चाहिए.
केजरीवाल ने सरकार और कार कंपनियों से क्या किया सवाल
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को प्रेस कॉफ्रेंस कर मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर और हीरो मोटोकॉर्प का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि इन कंपनियों के सार्वजनिक बयान उनके वाहनों की ‘ओनर मैनुअल' में दी गई जानकारी से मेल नहीं खाते. उन्होंने कहा, ‘‘मैं इन सभी कंपनियों को पत्र लिखूंगा. मैं उनसे कहूंगा कि आपके ‘ओनर मैनुअल' में कुछ बात लिखी है, लेकिन आप सार्वजनिक रूप से कुछ और कह रहे हैं. आप लिखित में यह आश्वासन दें कि यदि आपके वाहन का माइलेज 10 प्रतिशत से अधिक कम हो जाता है, तो क्या आप ग्राहक को इसकी भरपाई करेंगे?''
केजरीवाल ने कहा, ‘‘यदि ई-20 एथेनॉल के उपयोग से वाहन को नुकसान होता है या उसके कलपुर्जे खराब होते हैं तो क्या उन पुर्जों को बदलने का खर्च भी आप वहन करेंगे?''
केजरीवाल ने यह भी कहा कि भारत एथेनॉल मिश्रित ईंधन अपनाने वाला पहला देश नहीं है. क्योंकि कई देशों में इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन यह E-10 से कम है. क्योंकि सामान्य वाहन ई-10 तक के मिश्रण का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन उससे अधिक नहीं. सरकार को लोगों को फ्यूल चुनने का अधिकार देना चाहिए.
केजरीवाल के इस बयान के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी विकसीत भारत सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता एक आर्थिक बोझ है. फ्यूल इंपोर्ट पर सालाना 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं और यह पर्यावरण के लिए खतरा है. देश के विकास के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना आवश्यक है.
गडकरी ने दी आलोचकों को चुनौती
इसके बाद ही उन्होंने कहा, E20 पेट्रोल के कारण किसी कार में समस्या आने का कोई मामला सामने नहीं आया है. क्या देश में कोई ऐसी कार है जिसमें ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कोई समस्या आई हो? बस एक का नाम बताइए. उन्होंने कहा कि ज्यादा एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लागू करने के बारे में गलत बातें फैलाई जा रही है. पैसे देकर यह अभियान चलाया जा रहा है.
गडकरी ने कहा, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अधिक एथनॉल मिश्रित और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने के लिए वाहन उत्सर्जन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव किया है ताकि सभी तरह के वाहनों के लिए ‘फ्लेक्स-फ्यूल' और पूरी तरह से जैव ईंधन से चलने वाले वाहनों का रास्ता साफ हो सके. केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में प्रस्तावित बदलावों का मकसद E85 (पेट्रोल के साथ 85 प्रतिशत एथनॉल) और E100 (जिससे वाहन लगभग शुद्ध एथनॉल पर चल सकेंगे) जैसे ईंधनों के साथ-साथ B100 बायो-डीजल और हाइड्रोजन-सीएनजी मिश्रण के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है.
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