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म्यांमार क्यों गए, क्या था मकसद.. 14 यूक्रेनी नागरिकों से अब NIA करेगी पूछताछ

एनआईए को यूक्रेनी नागरिकों से पूछताछ के लिए स्पेशल कोर्ट की हरी झंडी मिल गई है. जांच एजेंसी अब इन विदेशी नागिरकों से म्यांमार और भारत में एंट्री को लेकर सवाल-जवाब करेगी.

म्यांमार क्यों गए, क्या था मकसद.. 14 यूक्रेनी नागरिकों से अब NIA करेगी पूछताछ
भारत ने यूक्रेनी नागिरकों को किया गिरफ्तार
नई दिल्ली:

म्यांमार में एक सिविलियन विमान पर हुए ड्रोन हमले की जांच अब भारत तक पहुंच गई है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA की जांच में 14 यूक्रेनी नागरिकों के भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचने और वहां ड्रोन वॉरफेयर से जुड़ी ट्रेनिंग देने के गंभीर आरोप सामने आए हैं. NIA ने इन आरोपियों से पूछताछ के लिए अदालत का रुख किया था. स्पेशल कोर्ट ने NIA की अर्जी मंजूर करते हुए कहा कि जांच के दौरान आरोपियों से पूछताछ करना जांच एजेंसी की प्रक्रिया का हिस्सा है और अदालतों को सामान्य तौर पर जांच में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

NIA की ओर से अदालत में दाखिल आवेदन में कहा गया है कि केंद्र सरकार को विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि कुछ यूक्रेनी और अमेरिकी नागरिक म्यांमार में एक सिविलियन विमान पर हुए ड्रोन हमले में शामिल हो सकते हैं. इसी इनपुट के आधार पर भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचे यूक्रेनी नागरिकों की गतिविधियों की जांच शुरू की गई. जांच एजेंसी के मुताबिक, 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों पर टूरिस्ट वीजा पर भारत पहुंचे थे. भारत पहुंचने के बाद ये लोग गुवाहाटी गए और वहां से मिजोरम पहुंचे. NIA का आरोप है कि इनके पास मिजोरम जाने और आगे की यात्रा के लिए जरूरी Restricted Area Permit यानी RAP या Protected Area Permit यानी PAP नहीं था.

म्यामार में नागरिक विमानों पर हुआ था ड्रोन हमला 

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NIA के आवेदन के मुताबिक इन यूक्रेनी नागरिकों ने आवश्यक दस्तावेजों के बिना मिजोरम से म्यांमार में अवैध रूप से प्रवेश किया. जांच एजेंसी का दावा है कि इनका म्यांमार जाना पहले से तय एक ट्रेनिंग कार्यक्रम का हिस्सा था. NIA के अनुसार, म्यांमार पहुंचने के बाद इन लोगों ने वहां सक्रिय हथियारबंद संगठन के सदस्यों को ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन असेंबली और ड्रोन जैमिंग टेक्नोलॉजी से जुड़ी ट्रेनिंग दी. जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस ट्रेनिंग का इस्तेमाल म्यांमार की सैन्य जुंटा के खिलाफ ड्रोन हमलों में किस तरह किया गया.

NIA की जांच में म्यांमार में हुए उस ड्रोन हमले को भी अहम कड़ी माना जा रहा है, जिसमें एक सिविलियन विमान को निशाना बनाए जाने का आरोप है. जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक 20 फरवरी को माइतकिना से मंडाले के लिए घरेलू उड़ान की तैयारी कर रहे म्यांमार नेशनल एयरलाइन के ATR-72-600 विमान पर कम से कम दो FPV कामीकाजी ड्रोन से हमला किया गया.बताया गया है कि हमले के समय विमान में यात्री सवार होने की प्रक्रिया चल रही थी और स्थानीय समय के मुताबिक करीब रात 8 बजकर 12 मिनट पर हमला हुआ. जांच एजेंसी का आरोप है कि इन ड्रोन को स्थानीय विद्रोही समूहों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

जांच से जुड़े इनपुट में यह आरोप भी सामने आया है कि जिन ड्रोन का इस्तेमाल हमले में किया गया, वे कथित तौर पर मैथ्यू वान ड्यूक मॉड्यूल से जुड़े नेटवर्क के जरिए स्थानीय विद्रोही समूहों तक पहुंचाए गए थे. NIA ने कथित तौर पर ऐसे वीडियो को भी जांच का हिस्सा बनाया है, जिन्हें विमान पर हुए हमले और ड्रोन नेटवर्क की भूमिका को साबित करने के लिए अहम माना जा रहा है. इन वीडियो के आधार पर जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ड्रोन कहां से आए, उन्हें किस नेटवर्क ने उपलब्ध कराया, स्थानीय सशस्त्र समूहों तक उनकी पहुंच कैसे हुई और ड्रोन ऑपरेशन के लिए तकनीकी प्रशिक्षण किसने दिया.

हालांकि इस पूरे पहलू में सामने आए आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी व्यक्ति या मॉड्यूल की भूमिका को अदालत में अंतिम रूप से साबित किया जाना बाकी है. जब्त डिवाइस से मिले फोटो, वीडियो और वॉइस सैंपल जांच के दौरान आरोपियों से जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी NIA की जांच का अहम हिस्सा हैं. NIA ने अदालत को बताया कि जब्त डिवाइस से निकाले गए डेटा की जांच के दौरान कई आपत्तिजनक जानकारियां और तथ्य सामने आए हैं. इनमें फोटो, वीडियो, वॉइस सैंपल और अन्य डिजिटल सामग्री शामिल है. जांच एजेंसी का कहना है कि इन डिजिटल सबूतों को गिरफ्तार आरोपियों के सामने रखकर उनसे पूछताछ करना जरूरी है, ताकि इनकी पुष्टि की जा सके और डिजिटल सबूतों का आरोपियों के बयानों से मिलान किया जा सके.

NIA के मुताबिक यह पूछताछ जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए जरूरी है. एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों के बीच किस तरह का संपर्क था और म्यांमार में मौजूद सशस्त्र समूहों के साथ उनका नेटवर्क कितना बड़ा था. मामले की सुनवाई करते हुए स्पेशल जज शर्मा ने NIA की अर्जी मंजूर कर दी. अदालत ने कहा कि यह स्वीकार किया हुआ तथ्य है कि NIA संबंधित आरोपियों के खिलाफ जांच कर रही है. अदालत के मुताबिक ऐसा कोई विशेष कानून या न्यायिक फैसला सामने नहीं है, जिसके आधार पर NIA को जांच के दौरान आरोपियों से पूछताछ करने से रोका जा सके.

अदालत ने स्पष्ट किया कि अदालतों को सामान्य तौर पर जांच की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. यदि जांच एजेंसी को लगता है कि जांच के किसी खास चरण में आरोपियों से पूछताछ जरूरी है, तो केवल इस आधार पर अदालत उस प्रक्रिया को रोक नहीं सकती. आरोपियों की ओर से NIA की अर्जी दाखिल किए जाने में हुई देरी पर भी सवाल उठाया गया था. दलील दी गई कि एजेंसी ने पूछताछ की अनुमति के लिए अदालत का रुख काफी देर से किया. हालांकि अदालत ने इस दलील को NIA की अर्जी खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं माना. स्पेशल जज शर्मा ने कहा कि अर्जी दाखिल करने में देरी को लेकर ऐसा कोई ठोस कानूनी या तथ्यात्मक कारण सामने नहीं आया है, जिसके आधार पर NIA की अर्जी को खारिज किया जाए.

अदालत के मुताबिक यदि NIA को लगता है कि जांच के मौजूदा चरण में आरोपियों से पूछताछ करना जरूरी है, तो एजेंसी ऐसा कर सकती है. अदालत ने यह भी कहा कि उसके पास NIA द्वारा इस समय अर्जी दाखिल किए जाने के फैसले पर संदेह करने का कोई आधार नहीं है.


अब NIA की जांच का फोकस भारत से म्यांमार तक फैले इस कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी को जोड़ने पर है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 14 यूक्रेनी नागरिक भारत क्यों आए, गुवाहाटी और मिजोरम तक कैसे पहुंचे, आवश्यक परमिट के बिना म्यांमार में किस रास्ते से दाखिल हुए और वहां किस संगठन या समूह के संपर्क में आए. इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि ड्रोन वॉरफेयर और ड्रोन जैमिंग की ट्रेनिंग देने वाले लोगों का म्यांमार में सक्रिय Ethnic Armed Groups से क्या संबंध था और क्या यही नेटवर्क बाद में सिविलियन विमान को निशाना बनाने वाले ड्रोन हमले से जुड़ा था.

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