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This Article is From Apr 24, 2025

ग्लोबल ट्रेड वार के बीच यूबीएस ने भारत को किया अपग्रेड 

यूबीएस के रणनीतिकार सुनील तिरुमलाई ने गुरुवार को जारी एक नोट में लिखा है कि डिफेंसिव और घरेलू अर्थव्यवस्था पर केंद्रित शेयरों के प्रति बढ़ती प्राथमिकता के बीच वैश्विक ब्रोकरेज भारतीय बाजार के प्रति अधिक आशावादी हो रहे हैं.

ग्लोबल ट्रेड वार के बीच यूबीएस ने भारत को किया अपग्रेड 
नई दिल्ली:

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ग्रुप एजी ने भारत को 'अंडरवेट' से अपग्रेड कर 'न्यूट्रल' कर दिया है. यह अपग्रेड ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ में बढ़ोतरी के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है.

यूबीएस कहा कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी प्रति शेयर आय (ईपीएस) में बढ़त बनी हुई है. वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा. ब्रोकरेज फर्म ने आगे कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सकारात्मक पहलुओं में से एक यह है कि जमा वृद्धि में सुस्ती के बावजूद बैंकों द्वारा जमा दरों को कम करने की बढ़ती इच्छा और सरकार द्वारा खपत को बढ़ाने के उपाय शामिल हैं.

यूबीएस के रणनीतिकार सुनील तिरुमलाई ने गुरुवार को जारी एक नोट में लिखा है कि डिफेंसिव और घरेलू अर्थव्यवस्था पर केंद्रित शेयरों के प्रति बढ़ती प्राथमिकता के बीच वैश्विक ब्रोकरेज भारतीय बाजार के प्रति अधिक आशावादी हो रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, कंपनियों के सामान्य प्रदर्शन के मुकाबले वैल्यूएशन अभी भी महंगे लग रहे हैं, लेकिन भारत अपनी घरेलू केंद्रित अर्थव्यवस्था के कारण व्यापार अनिश्चितता के बीच रक्षात्मक दिख रहा है. साथ ही कच्चे तेल की कीमत में कमी का फायदा देश को मिल रहा है."

यह अपग्रेड ऐसे समय में किया गया है जब वैश्विक निवेशक भारतीय एसेट्स को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं और घरेलू शेयर बाजार अमेरिकी टैरिफ वृद्धि की घोषणा के बाद लगे शुरुआती झटके के बाद तेजी से नुकसान से उबर रहे हैं.

इसके अतिरिक्त, यूबीएस ने हांगकांग शेयर बाजार को डाउनग्रेड कर 'ओवरवेट' से 'न्यूट्रल' कर दिया गया है. इसकी वजह टैरिफ के कारण सेंटीमेंट का नकारात्मक होना और अमेरिका से होने वाली आय पर अधिक निर्भरता है.

ब्रोकरेज फर्म ने इंडोनेशिया को 'न्यूट्रल' से अपग्रेड कर 'ओवरवेट' कर दिया है. इसकी वजह वैल्यूएशन का कोविड लो के करीब होना और सरकारी फंड्स से सहायता मिलना है.

यूबीएस ने 2022 से भारत पर अंडरवेट रेटिंग रखी थी. पिछले साल अप्रैल में आय परिदृश्य और घरेलू निवेशकों की संभावित रूप से अधिक भागीदारी का हवाला देते हुए चीनी शेयरों को ओवरवेट में अपग्रेड किया था.
 

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