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यूक्रेन संकट से ईरान युद्ध तक.. कूटनीति से यूं पाई सफलता, होर्मुज से भारत आ रहे दो जहाज

India-Iran News: भारत और ईरान के बीच मजबूत रिश्तों की झलक युद्ध के बीच भी देखने को मिली है. भारतीय कूटनीतिक कोशिश के बाद होर्मुज के रास्ते दो भारतीय जहाज एलपीजी लेकर आ रहे हैं.

यूक्रेन संकट से ईरान युद्ध तक.. कूटनीति से यूं पाई सफलता, होर्मुज से भारत आ रहे दो जहाज
भारत और ईरान के बीच मजबूत रिश्ते
  • भारत और ईरान के बीच मजबूत रिश्ते रहे हैं, युद्ध के दौरान भी ये दोस्ती देखने को मिली
  • ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से दो भारतीय जहाजों शिवालिक और नंदादेवी को आने की इजाजत दी
  • पीएम नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बात की थी
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नई दिल्ली:

पश्चिम एशिया संकट के कारण गैस की कमी का सामना कर रहे भारत को आज बड़ी राहत मिली है. भारत के दो मालवाहक जहाज शिवालिक और नंदा देवी ने ईरान-इजरायल युद्ध के कारण बेहद खतरनाक हो चुके होर्मुज स्ट्रेट को पार कर लिया है. दोनों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस लदी है जिसके जल्दी ही भारत पहुंचने की उम्मीद है. शिवालिक पर करीब चालीस हजार मीट्रिक टन गैस लदी है. नंदा देवी पर बड़ी मात्रा में सप्लाई है. इसके बाद भारत में गैस सप्लाई कुछ हद तक सुधरने की उम्मीद है.
 

बड़ी कूटनीतिक सफलता 

यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है. दोनों जहाजों पर तिरंगा लगा है. यह बता रहा है कि जहां एक ओर कई अन्य देश होर्मुज स्ट्रेट से अपने जहाजों को निकाल पाने में असफल रहे हैं वहीं भारत ने अपने दो जहाजों को सफलतापूर्वक यहां से निकाला है. इसका श्रेय धैर्यपूर्ण कूटनीतिक पहल और भारत के ईरान समेत इस क्षेत्र के सभी देशों से अत्यंत सौहार्द्रपूर्ण संबंधों को दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत के बाद यह बड़ी सफलता मिल सकी है.

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यूक्रेन युद्ध में भी छात्रों को भारत लाया गया था 

यह पहली बार नहीं है जब भारत ने किसी ऐसे वैश्विक संकट में अपने तिरंगे की ताकत दिखाई है. इससे पहले यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध छिड़ते समय भी भारत के सामने एक बड़ी चुनौती अपने छात्रों को सुरक्षित घर वापस लाने की थी. वे तस्वीरें शायद ही कोई भूला होगा जब तिरंगा लगी बसों को युद्ध क्षेत्र में सेफ पैसेज दिया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेन और रूस के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत के बाद यह संभव हो पाया था. इस तरह हजारों भारतीय छात्र बरसते गोलों और छलनी करतीं गोलियों के बीच सुरक्षित घर आने में कामयाब हुए थे.
 

पीएम मोदी ने की थी बात 

होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों के सेफ पैसेज मिलना भी प्रधानमंत्री मोदी की पहल के बाद संभव हो सका है. उन्होंने 12 मार्च को ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बात की थी. 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के बाद यह पहली बार शीर्ष स्तर पर हुआ संपर्क था. इस बातचीत के जरिए प्रधानमंत्री मोदी का ईरान को संदेश बिल्कुल स्पष्ट था- भारत ईरान का दुश्मन नहीं बल्कि मित्र है. भारत ईरान की तकलीफ को समझता है. प्रधानमंत्री ने भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी बातचीत की थी और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी. यह संदेश भी बिल्कुल स्पष्ट था कि भारत केवल एक ही खेमे में है और वह खेमा है शांति का.

ईरान ने भारत को बताया दोस्त 

इसी बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस लाने वाले जहाजों और चालकदल की सुरक्षा को लेकर भी अपनी बात स्पष्ट कर दी थी. वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ईरान के विदेश मंत्री से 28 फरवरी, पांच मार्च, दस मार्च और 12 मार्च को टेलीफोन पर बात की थी. इस दौरान भी भारत आने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर ठोस बातचीत हुई। इसके बाद 13 मार्च को भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मत फतहाली ने यह पूछे जाने पर कि क्या भारत के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति मिलेगी, दो टूक शब्दों में कहा था हां, क्योंकि भारत हमारा मित्र है.

जहां एक ओर अमेरिका, इजराइल और यूरोप के मालवाहक जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं निकल पा रहे हैं, भारतीय जहाज सफलतापूर्वक वहां से निकल रहे हैं. यह वैश्विक मंच पर भारत के प्रति सद्भावना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक की सफलता का परिचायक है.

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