- कश्मीर में आतंकी हमले के बाद बंद किए गए 48 पर्यटन स्थलों में से 14 को दोबारा खोलने का निर्णय लिया गया है
- पिछले साल पहलगाम में हुई घटना के बाद सुरक्षा कारणों से कई पर्यटन स्थल बंद कर दिए गए थे
- जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने इन स्थलों के खुलने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की है
धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में पर्यटन की रौनक एक बार फिर लौटने की उम्मीद बढ़ गई है. पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा कारणों से जम्मू-कश्मीर के 48 पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया गया था, जिससे राज्य का पर्यटन क्षेत्र गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था. अब सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन द्वारा की गई समीक्षा के बाद इनमें से 14 पर्यटन स्थलों को दोबारा खोलने का फैसला लिया गया है.
यह कदम घाटी में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है. पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम नरसंहार के बाद पूरे प्रदेश में सुरक्षा कारणों से कई जगहों को बंद किया गया था. हालांकि, बीते वर्ष 14 जून को 16 पर्यटन स्थल और 29 सितंबर को सात अन्य स्थलों को फिर से खोला गया था.
अब 14 और जगहों के खुल जाने से कुल मिलाकर बड़ी संख्या में साइट्स फिर सैलानियों के लिए उपलब्ध हो जाएंगी. हालांकि 11 पर्यटन स्थल अभी भी बंद हैं, जिन पर आगे का फैसला सुरक्षा स्थिति के आधार पर लिया जाएगा.
जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इन स्थलों के दोबारा खुलने की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि एहतियातन बंद किए गए सभी सुरक्षित स्थलों को तुरंत खोला जा रहा है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन कारोबार को फिर से गति दी जा सके.

इन 14 जगहों को खोला जा रहा है
कश्मीर डिवीजन में खुलने वाले 11 पर्यटक स्थलों में यूसमर्ग, दूधपथरी, डंडीपोरा पार्क, पीर की गली, दुबजन, पदपावन, अस्तनपोरा, ट्यूलिप गार्डन, थजवास ग्लेशियर, हंग पार्क और वुल्लर शामिल हैं. वहीं जम्मू डिवीजन में देवी पिंडी, महू मंगत और मुगल मैदान को पुनः खोलने की अनुमति दी गई है. दूसरी ओर गुरेज, अठवाटू, बंगस और रामकुंड को बर्फ साफ होने के बाद खोला जाएगा.
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से बातचीत की थी, जिसके बाद इस दिशा में तेजी आई. पर्यटन स्थलों के खुलने से स्थानीय कारोबारियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों में नई उम्मीद जगी है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या कश्मीर में सैलानियों की पहले जैसी चहल-पहल एक बार फिर लौट सकेगी. यदि ऐसा होता है तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी और पर्यटन उद्योग में नई जान आ जाएगी.
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