- टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने बंगाल चुनाव में पार्टी की हार को स्वीकार करते हुए आत्ममंथन की जरूरत बताई है
- ममता बनर्जी अपनी हार को स्वीकार नहीं कर रही हैं जबकि पार्टी के कुछ सदस्य हार को मान चुके हैं
- सौगत रॉय ने स्थानीय स्तर पर कथित वसूली जैसे मुद्दों को चुनावी हार की एक महत्वपूर्ण वजह बताया है
एक तरफ बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी अपनी हार को नहीं पचा पा रही हैं, दूसरी तरफ टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने पार्टी की हार को स्वीकार कर लिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी हार पर आत्ममंथन करने की जरूरत है, लेकिन नेतृत्व अभी इस हार को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहा. रॉय ने संकेत दिया कि स्थानीय स्तर पर कथित वसूली जैसे मुद्दे भी चुनावी हार की वजह बन सकते हैं. उन्होंने रणनीतिक सलाहकार संस्था IPAC पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनसे कभी कोई बातचीत ही नहीं हुई और वे नहीं जानते कि वह क्या कर रही थी. वहीं, अभिषेक बनर्जी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने भीड़ जरूर जुटाई, लेकिन यह वोट में तब्दील नहीं हो सका.
चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल, बीजेपी को भी घेरा
सौगत रॉय ने पश्चिम बंगाल चुनाव के परिणामों को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं हुआ और करीब 100 सीटों पर गड़बड़ी हुई. उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजे पार्टी के लिए जरूर दुखद हैं, लेकिन इस पर विस्तार से चर्चा और आत्ममंथन के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है. रॉय ने कहा कि इतनी बड़ी राजनीतिक बदलाव सिर्फ कथित वसूली जैसे मुद्दों के कारण नहीं हो सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि कहीं न कहीं गुप्त तरीके से एकजुट होकर वोटिंग हुई और बीजेपी के लोगों द्वारा अत्याचार भी किए गए. उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी पार्टी ने सुरक्षा बलों को लेकर शिकायतें उठाई थीं और विभिन्न कारणों का मिलाजुला असर इस चुनाव परिणाम में दिखाई देता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगी और अतीत में भी कठिन परिस्थितियों से उबर चुकी है.
ये भी पढ़ें : सुवेंदु अधिकारी होंगे बंगाल के नए सीएम, कल चुना जाएगा विधायक दल का नेता
सिंगूर में हार और आईपैक की भूमिका पर क्या बोले
सिंगूर सीट पर हार को लेकर उन्होंने अफसोस जताया और कहा कि वहां पार्टी के लोकप्रिय नेता थे, लेकिन हार के कारणों पर अभी उनकी बातचीत नहीं हुई है. साथ ही उन्होंने IPAC की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि संस्था क्या कर रही थी, क्योंकि उनसे कभी कोई संवाद नहीं किया गया, जबकि वह चार बार के सांसद हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अभिषेक बनर्जी ने पूरे राज्य में व्यापक दौरे किए और लोगों की अच्छी मौजूदगी रही, लेकिन यह समर्थन वोट में पूरी तरह तब्दील नहीं हो सका. ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के निर्णय पर उन्होंने कहा कि वह पार्टी सुप्रीमो के रुख का समर्थन करते हैं और संवैधानिक स्थिति पर विशेषज्ञ राय ही अंतिम होगी.
मुस्लिम वोटों का नुकसान, एंटी-इनकंबेंसी भी नहीं भांप पाए
उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम पर गहन मंथन की जरूरत है. रॉय के अनुसार इस चुनाव में हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण और एंटी-इनकंबेंसी भी देखने को मिला, हालांकि इसकी पहले से स्पष्ट जानकारी नहीं थी. उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम वोट पार्टी के पक्ष में रहे, लेकिन कुछ अन्य मुस्लिम दलों और नेताओं के कारण वोटों में कटौती हुई. महिलाओं के वोट मिलने के बावजूद इस बार मतदान पर पारिवारिक प्रभाव ज्यादा दिखा. रॉय ने कहा कि इस हार से बीजेपी का पक्ष मजबूत होगा, लेकिन अगर विपक्षी दल एकजुट होकर चुनाव लड़ें तो इस स्थिति से उबरना संभव है. अंत में उन्होंने कहा कि बीजेपी के भीतर की स्थिति के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन सुवेंदु अधिकारी एक प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए हैं.
ये भी पढ़ें : बंगाल में रिजल्ट के बाद अब बवाल, आसनसोल में TMC पार्षद का दफ्तर और बगल की दुकान जलकर खाक
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं