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संदेशखाली कांड की तीन महिलाएं, चुनाव जीती, जानिए वहां हुआ क्या था

संदेशखाली विवाद की शुरुआत 5 जनवरी 2024 को हुई थी, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम राशन घोटाले की जांच के सिलसिले में संदेशखाली पहुंची. एजेंसी शाहजहां शेख से पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन टीम के पहुंचते ही स्थानीय लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया.

संदेशखाली कांड की तीन महिलाएं, चुनाव जीती, जानिए वहां हुआ क्या था
नई दिल्‍ली:

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की तरफ से उठाया गया महिला सुरक्षा का मुद्दा पूरी तरह से सफल रहा. बीजेपी ने जिन महिला उम्‍मीदवारों आरजीकर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ, संदेशखाली से चर्चा में आई रेखा पात्रा और कलिता माझी को मैदान में उतारा, उन्‍होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्‍मीदवारों को बड़े अंतर से हराया. वहीं, संदेशखाली में महिलाओं के उत्‍पीड़न का मामला भी तृणमूल के खिलाफ माहौल बनाने में मददगार साबित हुआ. संदेशखाली में टीएमसी समर्थकों द्वारा किए गए सामूहिक दुष्‍कर्म की शिकार रेखा पात्रा ने टीएमसी के उम्मीदवार को 5000 से ज़्यादा वोटों से हराया. उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली से जुड़ा तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख का मामला 2024 में देशभर में सुर्खियों में आया और इसकी गूंज पश्चिम बंगाल 2026 के विधानसभा चुनाव में भी सुनाई दी.  

संदेशखाली कांड की तीन महिलाएं

  • रेखा पात्रा, संदेशखाली में तृणमून समर्थकों द्वारा किए गए सामूहिक बलात्कार की शिकार थीं. उन्होंने टीएमसी के उम्मीदवार को 5000 से ज़्यादा वोटों से हराया. 
  • रत्ना देबनाथ कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में दुष्‍कर्म और हत्या की शिकार हुई लड़की की मां हैं, जिन्‍होंने टीएमसी के उम्मीदवार को 28,000 से ज्यादा वोटों से हराया. 
  • कलिता माझी एक घरेलू कामवाली हैं, जो चार अलग-अलग घरों में काम करती थीं. बीजेपी का समर्थन करने के लिए टीएमसी के कार्यकर्ता उन्हें परेशान करते थे. कतिला ने टीएमसी के उम्मीदवार को 12,535 से ज्यादा वोटों से हराया. 

संदेशखाली में आखिर हुआ क्‍या था?

संदेशखाली विवाद की शुरुआत 5 जनवरी 2024 को हुई थी, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम राशन घोटाले की जांच के सिलसिले में संदेशखाली पहुंची. इस घोटाले में पहले ही TMC के मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक गिरफ्तार हो चुके थे. इसके बाद मामले की परतें खुल रही थीं. इस बीच जांच एजेंसी शाहजहां शेख से पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन टीम के पहुंचते ही स्थानीय लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया. अधिकारियों की गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और कई अधिकारियों को चोटें आईं. इस घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.

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इसके बाद शाहजहां शेख फरार हो गया और करीब 55 दिनों तक पुलिस के हाथ नहीं आए. इस दौरान संदेशखाली में स्थानीय महिलाओं ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए. महिलाओं ने आरोप लगाया कि शेख और उसके सहयोगी इलाके में दबंगई करते थे, जमीनों पर कब्जा करते थे और महिलाओं के साथ यौन शोषण तक की घटनाएं होती थीं. इन आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया और पूरे देश में संदेशखाली की चर्चा होने लगी. मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी पर सवाल उठने लगे. लगातार बढ़ते दबाव और विरोध के बीच आखिरकार 29 फरवरी 2024 को पश्चिम बंगाल पुलिस ने शाहजहां शेख को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद TMC ने उसे पार्टी से निलंबित कर दिया. हालांकि विपक्ष, खासकर भाजपा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने उसे बचाने की कोशिश की और गिरफ्तारी में जानबूझकर देरी की गई.

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संदेशखाली कांड सिर्फ एक नेता के खिलाफ आरोप नहीं 

इस केस के दौरान गवाहों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई. कुछ गवाहों ने हमलों और धमकियों का आरोप लगाया, जिससे जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठे. कई मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है और अंतिम फैसला आना बाकी है. संदेशखाली का यह मामला केवल एक नेता के खिलाफ आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने शासन, न्याय व्यवस्था और राजनीतिक संघर्ष के कई पहलुओं को उजागर किया है. आने वाले समय में अदालत के फैसले और जांच रिपोर्ट ही तय करेंगे कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और दोषियों को क्या सजा मिलती है.

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