लोकसभा में मनरेगा की जगह ले गए नए "जी राम जी बिल" पर टकराव और तीखी बहस के बाद अब राज्यसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा शुरू हो गई है.जी राम जी बिल पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक ने आरोप लगाया की सरकार ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को तैयार करने के दौरान राज्य सरकारों और स्टेकहोल्डर के साथ कोई सलाह मशवरा नहीं किया.मुकुल वासनिक ने कहा कि मनरेगा कानून की जगह "जी राम जी बिल" लाने से पहले क्या सरकार ने राज्य सरकारों के साथ सलाह मशवरा किया है? क्या उनसे कोई विचार विमर्श हुआ कि इसका राज्यों पर कितना असर पड़ेगा? क्या सरकार ने विशेषज्ञों, स्टेकहोल्डर के साथ बिल लाने से पहले कोई सलाह मशवरा किया है?
चाचा की शुरुआत में विपक्षी सांसदों ने मनरेगा कानून के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाने की तीखी आलोचना की.AAP सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इससे महात्मा गांधी का अपमान हुआ है.संजय सिंह ने नए विधायक में रोजगार गारंटी योजना की फंडिंग में राज्यों की हिस्सेदारी 40 फ़ीसदी करने पर भी सवाल उठाया.सवाल साल में 60 दिन तक नए रोजगार गारंटी विधेयक में काम न देने को लेकर भी उठाए गए.
तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट कर कहा कि मोदी और शाह शैली में संसद का मजाक जारी है. राज्यसभा में मनरेगा और महात्मा की हत्या वाले कठोर विधायक पर बहस शुरू हुई नियमों की परवाह किसे है आप कितना नीचे जा सकते हो.उधर, ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में जी राम जी Bill पर चर्चा के दौरान बिल की कॉपियां फाड़े जाने पर तीखी नाराजगी व्यक्त की.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बहस के दौरान कहा कि विपक्ष के आचरण ने लोकतंत्र को कलंकित किया है.मैं व्यथित हूं. आज संसदीय परंपरा तारतार हुई है. लोकतंत्र को भीड़ तंत्र में बदल दिया है.आज जिस तरह से लोकसभा में कागज उछाल गए, क्या यह बापूजी के आदर्शों की हत्या नहीं है?जाहिर जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ेगी, राज्यसभा में तकरार और टकराव और बढ़ सकता है.
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