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मणिपुर में 10 चुनौतियां जो हिंसा की आग में कर रहीं 'घी' का काम

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कुकी और मैतेई दोनों को सुरक्षा बलों पर भरोसा नहीं
इम्फाल:

मणिपुर में कुकी आदिवासी समूह और बहुसंख्यक मैतेई लोगों के बीच जनजातियों को दिए जाने वाले आर्थिक लाभ और कोटा साझा करने को लेकर हिंसा भड़कने के लगभग तीन महीने बाद, संघर्ष समाप्त होने के बहुत कम संकेत हैं. इस बीच देशभर में इस मुद्दे पर जमकर राजनीति हो रही है.

  1. मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके के नेतृत्व में गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा गठित शांति समिति, लोगों का विश्‍वास हासिल करने में विफल रही है, क्योंकि कुकी और मैतेई दोनों समुदायों के प्रभावशाली नागरिक समाज समूहों ने विभिन्न कारणों से शांति समिति से बाहर रहने का विकल्प चुना.

  2. सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस और मैतेई सिविल सोसाइटी के तहत कुकी विद्रोही समूहों के साथ पिछले दरवाजे से बातचीत चल रही है, लेकिन इन वार्ताओं के माध्यम से विश्वास बनाना एक लंबी प्रक्रिया होने की उम्मीद है. इसलिए भी मणिपुर में हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है. 

  3. मणिपुर सरकार और मैतेई समाज दृढ़ता से कहते हैं कि वे मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेंगे. मैतेई समाज के इस रवैये के कारण भी स्थिति को सामान्‍य होने में समय लगेगा.

  4. वहीं, कुकी समुदाय के लोगों का कहना है कि 60 सदस्यीय विधानसभा में 40 विधायकों के साथ मैतेई लोगों का राजनीतिक प्रभुत्व है, और इसलिए वे एक "अलग प्रशासन" चाहते हैं.

  5. कुकी और मैतेई दोनों को सुरक्षा बलों पर भरोसा नहीं है. कुकी मणिपुर पुलिस को पक्षपाती मानते हैं, जबकि मैतेई असम राइफल्स पर अविश्वास करते हैं. केंद्रीय बल मणिपुर में अनिश्चित काल तक नहीं रह सकते हैं, इसलिए राज्य पुलिस को कानून और व्यवस्था बनाए रखनी होगी. असम राइफल्स म्यांमार के साथ सीमाओं की रक्षा करेगी.

  6. भाजपा मणिपुर में अपने सबसे बड़े संकटमोचक, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का इस्‍तेमाल करने में असमर्थ रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा के बाद, सरमा को जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने मैतेई और कुकी समूहों से मुलाकात की, लेकिन कुकी संघर्ष विराम विद्रोही समूहों के साथ गुप्त समझौते का आरोप लगाने वाले 2017 के एक पत्र के लीक होने के कारण मैतेई को उन पर विश्‍वास नहीं है. 

  7. कुकी समूहों ने तब तक बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया, जब तक कि एन. बीरेन सिंह को मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से नहीं हटा दिया जाता. हालांकि, मैतेई लोगों का एक बड़ा वर्ग मुख्‍यमंत्री बीरेन सिंह का समर्थन करता है.

  8. नागा, मणिपुर का सबसे बड़ा आदिवासी समूह, संघर्ष से बाहर नजर आ रहा है. उनकी राजनीतिक पार्टी, नागा पीपुल्स फ्रंट की राज्य इकाई, बीरेन सिंह का समर्थन करती है. हालांकि वे संभावित रूप से शांति स्थापित कर सकते हैं, और वे मौजूदा समय में केंद्र सरकार के साथ अपनी शांति वार्ता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

  9. मिज़ोरम और उसके मुख्यमंत्री की भागीदारी ने मणिपुर सरकार और मैतेई को भी परेशान कर दिया है, क्योंकि मिज़ो जनजाति का कुकी, ज़ो और चिन जनजातियों के साथ घनिष्ठ संबंध है. नई दिल्ली और बीरेन सिंह दोनों की नाराजगी के कारण मिजोरम ने म्यांमार और मणिपुर के विस्थापित लोगों को आश्रय दिया है.

  10. मणिपुर के प्रमुख हिस्सों में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) की वापसी ने पहले की तरह सभी सैन्य अभियानों को लागू करने के लिए तकनीकी समस्याएं पैदा कर दी हैं.


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