विज्ञापन

कभी पार्टी के पोस्टर बॉय रहे, अब हुए साइडलाइन... तमिलनाडु चुनाव में अन्नामलाई की गैरमौजूदगी ने BJP की रणनीति पर उठाए बड़े सवाल

तमिलनाडु चुनाव में बीजेपी के पोस्टर बॉय रहे के. अन्नामलाई इस बार असरदार नहीं दिखे. चुनाव में उनकी सीमित भूमिका ने पार्टी की रणनीति, नेतृत्व मॉडल और राज्य में विस्तार की दिशा को लेकर सियासी हलकों में बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

कभी पार्टी के पोस्टर बॉय रहे, अब हुए साइडलाइन... तमिलनाडु चुनाव में अन्नामलाई की गैरमौजूदगी ने BJP की रणनीति पर उठाए बड़े सवाल
नई दिल्ली:

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने जहां नए राजनीतिक समीकरण बनाए, वहीं एक नाम ऐसा रहा जिसकी गैरमौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा में रही- अन्नामलाई कुप्पुसामी. कभी बीजेपी के 'पोस्टर बॉय' और राज्य में पार्टी के विस्तार का चेहरा रहे अन्नामलाई इस चुनाव में अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाए. उनकी सीमित भूमिका और चुनावी मैदान से दूरी ने बीजेपी की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

‘पोस्टर बॉय' से ‘मिसिंग स्टार' तक का सफर

कुछ साल पहले तक अन्नामलाई तमिलनाडु की राजनीति में हर जगह दिखते थे. सड़क से लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक बहसों तक. एक पूर्व आईपीएस अधिकारी के रूप में उनकी साफ-सुथरी छवि और आक्रामक अंदाज ने उन्हें तेजी से लोकप्रिय बनाया. 2020 में बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने राज्य में पार्टी को नई पहचान देने की कोशिश की. भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, तीखे बयान और द्रविड़ दलों पर सीधा हमला. इन सबने उन्हें एक मजबूत वैकल्पिक नेता के रूप में स्थापित किया.

लेकिन 2026 के चुनाव में वही अन्नामलाई न तो उम्मीदवार बने और न ही केंद्रीय चेहरा. यह बदलाव बीजेपी के अंदर रणनीतिक शिफ्ट का संकेत माना जा रहा है.

तमिलनाडु चुनाव के नतीजे

तमिलनाडु चुनाव के नतीजे

यह भी पढ़ें- कांग्रेस साथ, AIADMK में TVK के समर्थन पर फूट, विजय की सरकार बनने के क्या-क्या समीकरण, जानिए

चुनावी नतीजे में दिखी बीजेपी की कमजोर पकड़

इस चुनाव में अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर सरकार बनाने का दावा ठोका है. वहीं बीजेपी, जिसने EPS की AIADMK के साथ गठबंधन किया था, महज 1 सीट पर सिमट गई. सहयोगी AIADMK को 47 सीटें मिलीं. बीजेपी की यह स्थिति दिखाती है कि राज्य में उसकी जमीनी पकड़ अभी भी बेहद कमजोर है, चाहे वह गठबंधन में हो या अकेले.

गठबंधन बनाम ‘सोलो पॉलिटिक्स': रणनीति में यू-टर्न

अन्नामलाई का राजनीतिक मॉडल साफ था. बीजेपी को तमिलनाडु में स्वतंत्र पहचान दिलानी होगी. उन्होंने DMK और AIADMK दोनों पर समान रूप से हमला किया. लेकिन 2026 आते-आते बीजेपी हाईकमान ने यह रणनीति बदल दी. पार्टी ने फिर से AIADMK के साथ गठबंधन का रास्ता चुना. यही वह मोड़ था जहां अन्नामलाई की भूमिका सीमित होती चली गई. उनकी आक्रामक राजनीति और गठबंधन की जरूरत के बीच टकराव साफ नजर आया.

Latest and Breaking News on NDTV

AIADMK से टकराव बना टर्निंग पॉइंट

2024 लोकसभा चुनाव से पहले अन्नामलाई के बयानों ने AIADMK के साथ रिश्तों को काफी नुकसान पहुंचाया. उन्होंने पार्टी के दिग्गज नेताओं सी. एन. अन्नादुरई और जे. जयललिता पर भी टिप्पणी की, जिससे विवाद बढ़ा. AIADMK नेतृत्व ने इसे अपमानजनक बताया और गठबंधन टूट गया. यह घटना बीजेपी के लिए बड़ा झटका थी, क्योंकि तमिलनाडु में बिना मजबूत क्षेत्रीय सहयोगी के चुनाव लड़ना हमेशा मुश्किल रहा है.

यह भी पढ़ें- कैसी होगी विजय की पहली कैबिनेट? तमिलनाडु में बन सकती है गेम-चेंजर, समझिए पूरी बात 

अध्यक्ष पद से हटे और ‘साइडलाइन' होते गए अन्नामलाई

2025 में बीजेपी ने बड़ा फैसला लेते हुए अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को जिम्मेदारी दी. नागेंद्रन, जो कभी जयललिता सरकार में मंत्री रह चुके थे, को लाने का मकसद साफ था. AIADMK के साथ रिश्ते सुधारना. इस फैसले के बाद अन्नामलाई की भूमिका धीरे-धीरे सीमित होती गई. 2026 चुनाव में उन्हें उम्मीदवार भी नहीं बनाया गया और उनकी जिम्मेदारियां भी कम कर दी गईं.

चुनाव प्रचार में मौजूद, लेकिन केंद्र से दूर

हालांकि अन्नामलाई पूरी तरह गायब नहीं थे. उन्होंने चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया, रैलियां कीं, रोड शो किए और पार्टी के स्टार प्रचारकों में शामिल रहे. लेकिन यह भूमिका उस नेता से काफी अलग थी, जो कुछ साल पहले तक तमिलनाडु बीजेपी का चेहरा था. उनकी मौजूदगी अब 'सपोर्टिंग रोल' तक सिमट गई है.

क्या बीजेपी का दांव उल्टा पड़ गया?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने 2026 में 'लॉन्ग टर्म ग्रोथ' की बजाय 'शॉर्ट टर्म गठबंधन' पर दांव लगाया. अन्नामलाई जैसे नेता, जो पार्टी को स्वतंत्र पहचान दे सकते थे, उन्हें पीछे कर गठबंधन की राजनीति अपनाई गई. लेकिन नतीजे बताते हैं कि यह रणनीति अपेक्षित सफलता नहीं दिला पाई. बीजेपी का वोट शेयर भी सीमित ही रहा, जिससे यह साफ है कि पार्टी को अभी राज्य में लंबा रास्ता तय करना है.

यह भी पढ़ें- सिनेमा में नायक तो राजनीति में 'जन नायक' बने विजय की पार्टी TVK का क्या है मतलब, क्या है इसकी आइडियोलॉजी?

अन्नामलाई का भविष्य: खत्म नहीं, बस ठहराव

चुनाव नतीजों के बाद अन्नामलाई ने लोकतांत्रिक फैसले का सम्मान करते हुए जनता को धन्यवाद दिया और विजय को बधाई दी. उन्होंने इसे जनरेशन शिफ्ट बताया. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अन्नामलाई का करियर खत्म नहीं हुआ है. उनकी साफ छवि, आक्रामक शैली और युवाओं में पकड़ उन्हें भविष्य का बड़ा खिलाड़ी बना सकती है. तमिलनाडु चुनाव 2026 में अन्नामलाई की गैरमौजूदगी सिर्फ एक नेता की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि बीजेपी की रणनीतिक दुविधा का प्रतीक बनकर सामने आई है.

एक तरफ पार्टी को राज्य में अपनी स्वतंत्र पहचान बनानी है, वहीं दूसरी तरफ गठबंधन की मजबूरी है. इन दोनों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए. यही सवाल आने वाले समय में बीजेपी और अन्नामलाई, दोनों के राजनीतिक भविष्य को तय करेगा.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com