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17 साल पहले मारे गए LTTE चीफ प्रभाकरन को विजय ने दी श्रद्धांजलि, बोले- 'हम तमिल भाई-बहनों के लिए हमेशा एकजुट'

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को LTTE चीफ वी. प्रभाकरन को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि हम समंदर पार रहने वाले तमिल भाई-बहनों के अधिकारों के लिए हमेशा एकजुट रहेंगे.

17 साल पहले मारे गए LTTE चीफ प्रभाकरन को विजय ने दी श्रद्धांजलि, बोले- 'हम तमिल भाई-बहनों के लिए हमेशा एकजुट'
  • तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने LTTE नेता प्रभाकरन की मौत की सालगिरह पर मुल्लीवाइक्कल की यादों को याद किया
  • 2009 में श्रीलंकाई सेना ने मुल्लीवाइक्कल में LTTE चीफ प्रभाकरन को मार गिराया था
  • LTTE भारत में प्रतिबंधित संगठन है और प्रभाकरन को 1991 में राजीव गांधी हत्या मामले में मुख्य आरोपी माना गया था
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चेन्नई:

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके चीफ सी. जोसेफ विजय ने आज LTTE चीफ प्रभाकरन को लेकर एक पोस्ट किया. प्रभाकरन 17 साल पहले आज ही के दिन मारा गया था. इस मौके पर विजय ने श्रीलंका के मुल्लीवाइक्कल जगह का जिक्र करते हुए X पर कहा, 'हम मुल्लीवाइक्कल की यादों को अपने दिलों में संजोकर रखेंगे! हम समुद्र पार रहने वाले अपने तमिल भाई-बहनों के अधिकारों के लिए हमेशा एकजुट होकर खड़े रहेंगे!' 2009 में मुल्लीवाइक्कल में ही प्रभाकरन को श्रीलंकाई सेना ने गोली मार दी थी.

1991 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में अपनी भूमिका के कारण LTTE भारत में अब भी एक प्रतिबंधित संगठन बना हुआ है. इस मामले में LTTE प्रमुख प्रभाकरन को मुख्य आरोपी बनाया गया था. उसे कानून के कटघरे में नहीं लाया जा सका और एक घोषित अपराधी के तौर पर ही उसकी मौत हो गई.

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दुनिया भर में फैले श्रीलंकाई तमिल समुदाय और भारत में रहने वाले तमिलों का एक वर्ग 18 मई को 'मुल्लीवाइक्कल स्मरण दिवस' या तमिल नरसंहार स्मरण दिवस के रूप में मनाता है. यह दिन 2009 में खत्म हुए श्रीलंकाई गृहयुद्ध के उस दुखद अंत की याद दिलाता है, जिसमें मुल्लीवाइक्कल के तटीय गांव में LTTE नेता प्रभाकरन के साथ-साथ हजारों तमिल नागरिक भी मारे गए थे, घायल हुए थे या लापता हो गए थे. यह संघर्ष श्रीलंका में रहने वाले उन तमिलों के लिए एक अलग मातृभूमि की मांग के साथ शुरू हुआ था, जिन्होंने अपने साथ भेदभाव होने का आरोप लगाया था, लेकिन अपने आखिरी दौर में यह एक सशस्त्र युद्ध में बदल गया और लगभग 30 सालों तक एक जातीय संघर्ष के रूप में चलता रहा.

इस बार के चुनावों में श्रीलंकाई तमिलों का मुद्दा कोई चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया. हालांकि, सितंबर 2025 में नागपट्टिनम जिले में दिए गए अपने एक भाषण में विजय ने इस मुद्दे के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश करते हुए कहा था, 'हमारे अपने खून के रिश्तेदार यानी ईलम तमिल चाहे वे श्रीलंका में हों या दुनिया के किसी भी कोने में, आज उस नेता को खोने के बाद गहरे दुख में हैं, जिसने उन्हें मां जैसा स्नेह दिया था.' उनका यह बयान स्पष्ट रूप से प्रभाकरन की ओर ही इशारा कर रहा था. उन्होंने आगे कहा था, 'उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाना हमारा कर्तव्य है.'

जहां एक ओर तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टियां आमतौर पर प्रभाकरन का समर्थन करते हुए दिखने से बचती हैं, वहीं विजय की अल्पमत वाली सरकार को VCK का समर्थन प्राप्त है, जो अपने LTTE-समर्थक रुख के लिए जाना जाता है.

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