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पश्चिम बंगाल में BJP सरकार के सामने चुनौतियों का पहाड़, सुवेंदु अधिकारी की पहले दिन से ही अग्निपरीक्षा शुरू

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती नई BJP सरकार और मुख्यमंत्री पद की कमान संभाल रहे शुभेंदु अधिकारी के सामने है. लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर पकड़ बनाए रखने वाली ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने के बाद BJP के लिए असली परीक्षा अब शासन चलाने की मानी जा रही है.

पश्चिम बंगाल में BJP सरकार के सामने चुनौतियों का पहाड़, सुवेंदु अधिकारी की पहले दिन से ही अग्निपरीक्षा शुरू
  • पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी है और शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की है
  • चुनाव के बाद राज्य में राजनीतिक हिंसा और कानून-व्यवस्था की समस्या नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती है
  • बीजेपी को भ्रष्टाचार, वित्तीय संकट, औद्योगिक विकास और केंद्र की योजनाओं को लागू कराना होगा
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कोलकाता:

पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बन गई है, शुभेंदु अधिकारी ने मुख्‍यमंत्री पद की शपथग्रहण कर ली है. मुख्‍यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी का आज पहला दिन है. बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री पद की कमान संभाल रहे शुभेंदु अधिकारी के सामने है. लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर पकड़ बनाए रखने वालीं ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर करने के बाद बीजेपी के लिए असली परीक्षा अब शासन चलाने की मानी जा रही है. सबसे बड़ी चुनौती चुनाव बाद हिंसा और कानून-व्यवस्था को लेकर सामने आ रही है.  राज्य के कई हिस्सों से लगातार राजनीतिक झड़पों, हमलों और हत्याओं की खबरें आ रही हैं. सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या ने राजनीतिक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है. बीजेपी, टीएमसी पर अपने कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का आरोप लगा रही है. वहीं, टीएमसी का कहना है कि हिंसा में BJP समर्थक भी शामिल हैं. ऐसे माहौल में नई सरकार के लिए निष्पक्ष जांच, हिंसा पर रोक और प्रशासन में भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी. 

चुनाव के बाद हुई हिंसा के बीच कानून-व्यवस्था बहाल करना 
 

मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सामने चुनौती यह है कि उस प्रशासनिक ढांचे पर पकड़ बनाए, जिस पर वर्षों से टीएमसी के प्रभाव का आरोप लगता रहा है. भ्रष्टाचार, सरकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं और वित्तीय संकट जैसे मुद्दों से निपटना आसान नहीं होगा. BJP ने चुनाव में 'डबल इंजन सरकार' का वादा करते हुए औद्योगिक विकास, निवेश और केंद्र की योजनाओं को तेज़ी से लागू करने की बात कही थी. अब जनता की निगाहें इस पर होंगी कि सरकार कितनी जल्दी उद्योग, रोजगार और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर परिणाम दिखाती है. हालांकि,औद्योगीकरण की राह भी आसान नहीं मानी जा रही. जमीन अधिग्रहण, मजदूर संगठनों का विरोध और स्थानीय राजनीतिक संवेदनशीलताएं बड़े प्रोजेक्ट्स में रुकावट बन सकती हैं. इसके अलावा आयुष्मान भारत जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना भी BJP के लिए अहम चुनौती होगी.

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Photo Credit: PTI

शासन में बदलाव और प्रशासनिक सुधार

राज्य की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति भी BJP के लिए परीक्षा बन सकती है. चुनाव प्रचार के दौरान हिंदुत्व और पहचान की राजनीति प्रमुख मुद्दा रही, लेकिन अब सरकार को मुस्लिम समुदाय और दूसरे सामाजिक समूहों के बीच भरोसा कायम करना होगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सामाजिक संतुलन नहीं बना, तो राज्य में ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है. 

पार्टी के अंदर का प्रबंधन और कार्यकर्ताओं का संगठन बनाना

पार्टी के भीतर भी BJP को कई मोर्चों पर संतुलन साधना होगा. दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को साथ लेकर चलना, गुटबाज़ी रोकना और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना बड़ी चुनौती होगी. पार्टी के कुछ पुराने नेताओं और नए नेतृत्व के बीच मतभेद की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं. ऐसे में मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को संगठन और सरकार दोनों पर समान पकड़ बनाए रखनी होगी.

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ममता को कमजोर आंकना पड़ेगा भारी 

विपक्ष में बैठी TMC को कमजोर आंकना बीजेपी के लिए भारी पड़ सकता है. माना जा रहा है कि सत्ता से बाहर होने के बाद ममता बनर्जी विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर सकती हैं. कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के साथ संभावित तालमेल BJP के लिए राजनीतिक मुश्किलें बढ़ा सकता है. राष्ट्रीय स्तर पर भी ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं के साथ मिलकर केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक राजनीति कर सकती हैं.

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राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर काम करना

राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पार घुसपैठ का मुद्दा भी BJP के लिए अहम रहेगा. पार्टी लंबे समय से TMC पर सीमा सुरक्षा को लेकर लापरवाही का आरोप लगाती रही है. अब सत्ता में आने के बाद BJP पर यह दबाव होगा कि वह इस मोर्चे पर ठोस कार्रवाई करके दिखाए. सबसे बड़ी बात यह है कि जनता ने BJP को भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बदलाव की उम्मीद से समर्थन दिया है. अगर नई सरकार जल्दी परिणाम नहीं दिखा पाती, तो पश्चिम बंगाल जैसी राजनीतिक रूप से संवेदनशील जमीन पर सत्ता-विरोधी लहर तेज़ी से लौट सकती है. ऐसे में BJP और सुवेंदु अधिकारी के लिए आने वाले महीने किसी बड़ी राजनीतिक अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे.

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