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मुंबई एयरपोर्ट पर सरोगेसी रैकेट का भंडाफोड़, बैंकॉक से लौट रहीं दो महिलाएं पकड़ी गईं

मुंबई एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने दो महिलाओं को पकड़कर अवैध सरोगेसी और एग डोनेशन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट का खुलासा किया. जांच में पता चला कि ‘एलीट केयर’ नाम की एजेंसी फर्जी वैवाहिक दस्तावेजों के आधार पर महिलाओं को विदेश भेजकर एग डोनेशन कराती थी.

मुंबई एयरपोर्ट पर सरोगेसी रैकेट का भंडाफोड़, बैंकॉक से लौट रहीं दो महिलाएं पकड़ी गईं
  • मुंबई हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय सरोगेसी और एग डोनेशन रैकेट का भंडाफोड़ किया है
  • बैंकॉक से आई दो महिलाओं की संदिग्ध गतिविधियों के कारण पुलिस ने तीन महिलाओं पर केस दर्ज किया है
  • आरोपी सुनोती सुशील बेलील और सीमा विन्हज़रात को गिरफ्तार किया गया है, जबकि संगीता नीलेश बागुल अभी फरार है
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मुंबई:

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने अवैध सरोगेसी और एग डोनेशन से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट का भंडाफोड़ किया है. बैंकॉक से मुंबई पहुंची दो महिला यात्रियों की संदिग्ध गतिविधियों ने अधिकारियों का ध्यान खींचा, जिसके बाद यह पूरा मामला सामने आया. जानकारी के मुताबिक, 16 जनवरी 2026 को बैंकॉक से इंडिगो की फ्लाइट 6E-1052 से मुंबई पहुंची दो महिलाओं से इमिग्रेशन काउंटर पर रूटीन पूछताछ की गई. पूछताछ के दौरान दोनों महिलाएं अपनी विदेश यात्रा के मकसद को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं. शक गहराने पर उन्हें आगे की पूछताछ के लिए रोका गया और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया गया. 

तीन महिलाओं पर केस दर्ज

पुलिस ने मामले में तीन महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिनमें से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि तीसरी आरोपी फरार है.  गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुनोती सुशील बेलील (44) और सीमा विन्हज़रात (29) के रूप में हुई है.  वहीं संगीता नीलेश बागुल की तलाश जारी है. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच आगे मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है. 

आईवीएफ सेंटर में एजेंट के तौर पर काम करती थी आरोपी

पुलिस जांच में सामने आया है कि सुनीति बेलीएल वर्ष 2024 से आईवीएफ सेंटर में एजेंट के तौर पर काम कर रही थी.  उसने अपनी सहयोगी संगीता बागुल के साथ मिलकर ठाणे में “एलीट केयर” नाम से एक एजेंसी शुरू की थी. यह एजेंसी भारत और विदेशों के फर्टिलिटी सेंटर्स को भारी रकम के बदले एग डोनर और सरोगेट मदर उपलब्ध कराती थी. 

जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि एजेंसी अविवाहित महिलाओं को फर्जी दस्तावेजों के जरिए शादीशुदा दिखाकर एग डोनेशन के लिए इस्तेमाल करती थी. यह सीधे तौर पर सरोगेसी कानून का उल्लंघन है, क्योंकि भारत में एग डोनेशन के लिए महिला का विवाहित होना और कम से कम एक संतान का होना अनिवार्य है. 

दूसरी आरोपी सीमा विंझारत ने पुलिस को बताया कि वह साल 2022 में एजेंट संगीता बागुल के संपर्क में आई थी. इसके बाद 2023 से 2025 के बीच उसने भारत के अलावा केन्या, कजाकिस्तान और थाईलैंड जैसे देशों में भी एग डोनेशन किया.  हाल ही में उसे बैंकॉक ले जाया गया था, जहां एग डोनेशन से जुड़े मेडिकल टेस्ट कराए गए और इसके बदले उसे मोटी रकम दी गई. 

पुलिस का कहना है कि सीमा ने भी फर्जी वैवाहिक दस्तावेजों के सहारे एग डोनेशन किया, जो कानूनन अपराध है. जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन, पासपोर्ट, बोर्डिंग पास, मेडिकल रिपोर्ट्स और अन्य डिजिटल सबूत जब्त कर लिए गए हैं.  फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगालने में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट की जड़ें देश और विदेश में कहां-कहां तक फैली हुई हैं. 

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