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This Article is From Jan 21, 2026

सुखना झील को और कितना सुखाओगे? सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए बिल्डर माफियाओं को फटकारा

चंडीगढ़ की सुखना झील से संबंधित मुकदमा मुख्य रूप से उच्च न्यायालय द्वारा इसके जलग्रहण क्षेत्र को अतिक्रमण से बचाने के प्रयासों से जुड़ा है, जिसमें 2020 में संरक्षित क्षेत्र में बनी संरचनाओं को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था.

सुखना झील को और कितना सुखाओगे? सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए बिल्डर माफियाओं को फटकारा
सुखना झील को हुए नुकसान पर सुप्रीम कोर्ट.
  • सुप्रीम कोर्ट ने सुखना झील के सूखने पर बिल्डर माफिया और नौकरशाहों की मिलीभगत पर कड़ी चिंता जताई है
  • चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने झील के संरक्षण में विफलता पर सवाल उठाते हुए अवैध निर्माण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है
  • सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि वन और जल संरक्षण से जुड़े मामलों का निपटारा HC में क्यों नहीं हो रहा है
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने सुखना झील के सूखे पर चिंता जताते हुए बिल्डर माफिया की कड़ी आलोचना की है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बिल्डर माफिया और नौकरशाहों के बीच मिलीभगत के परिणामस्वरूप चंडीगढ़ की प्रतिष्ठित झील के सूखने पर चिंता जताई. उन्होंने पूछा कि ‘सुखना झील को और कितना सुखाओगे. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की बेंच 1995 में लंबित जनहित याचिका ‘इन रे: टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपाद' में दायर अंतरिम आवेदनों की सुनवाई कर रही थी.

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सुखना झील को और कितमा सुखाओगे?

इस दौरान सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने एक अधिवक्ता द्वारा झील से संबंधित याचिका का उल्लेख करने पर मौखिक टिप्पणी की, ‘‘और कितना सुखाओगे सुखना लेक (झील) को? पंजाब में राजनीतिक दलों के समर्थन और नौकरशाहों की मिलीभगत से अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप झील पूरी तरह से नष्ट हो रही है. वहां सभी बिल्डर माफिया सक्रिय हैं.''

हाई कोर्ट को छोड़ सुप्रीम कोर्ट क्यों आ रहे?

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया था कि जंगलों और झीलों से संबंधित सभी मामले उच्च न्यायालयों को दरकिनार करते हुए उच्चतम न्यायालय में क्यों आ रहे हैं, वह भी 1995 की लंबित जनहित याचिका में अंतरिम आवेदनों के रूप में. बेंच ने सुनवाई के शुरुआत में आश्चर्य जताया कि वन संबंधी सभी मामले इसी अदालत में क्यों आ रहे हैं?

निजी डेवलपर्स और अन्य लोगों के इशारे पर दोस्ताना मुकाबला

सीजेआई ने सुखना झील मामले से संबंधित एक आवेदन का जिक्र करते हुए कहा था कि जाहिर तौर पर ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ निजी डेवलपर्स और अन्य लोगों के इशारे पर दोस्ताना मुकाबला चल रहा है. बेंच ने उन स्थानीय मुद्दों के बारे में जानकारी मांग, जिनसे उच्च न्यायालय स्वयं निपट सकते हैं.

चंडीगढ़ की सुखना झील से संबंधित मुकदमा मुख्य रूप से उच्च न्यायालय द्वारा इसके जलग्रहण क्षेत्र को अतिक्रमण से बचाने के प्रयासों से जुड़ा है, जिसमें 2020 में संरक्षित क्षेत्र में बनी संरचनाओं को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था.

इनपुट-भाषा

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