- सुप्रीम कोर्ट ने 35 साल पुराने आपराधिक मुकदमे में लंबित ट्रायल कार्यवाही पर रोक लगा दी है
- कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को रखी है
- मामला 1989 में प्रयागराज के जीआरपी रामबाग थाने में दर्ज एफआईआर से संबंधित है
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 35 साल पुराने आपराधिक मुकदमे में चल रही ट्रायल कार्यवाही पर रोक लगा दी है. अदालत ने हैरानी जताई कि 35 साल से लंबित ट्रायल में गवाहों के बयान तक नहीं हुए हैं. कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा है और 29 अप्रैल को सुनवाई तय की है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी. यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें ट्रायल को रद्द करने या रोकने से इनकार कर दिया गया था.
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लंबे विलंब पर जताई नाराज़गी, यूपी सरकार से जवाब तलब
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में करीब 35 सालों का लंबा विलंब हुआ है और सिर्फ इसी आधार पर कार्यवाही को रद्द करने पर विचार किया जा सकता है. हालांकि अंतिम आदेश देने से पहले कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा है. यह मामला 1989 में प्रयागराज के जीआरपी रामबाग थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है. याचिकाकर्ता एक पुलिस अधिकारी है और उस पर IPC की धारा 147 (दंगा), 323 (मारपीट) और 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) के साथ-साथ रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 120 के तहत आरोप लगाए गए थे.
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चार्जशीट और बरी होने के बावजूद ट्रायल लंबित रहा
पीठ ने पाया कि मामले में कुल पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया. इसके बावजूद याचिकाकर्ता के खिलाफ मामला 35 सालों तक लंबित रहा और कोई भी अभियोजन गवाह पेश नहीं किया गया. याचिकाकर्ता ने पहले हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन राहत नहीं मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की. सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि इतने वर्षों के बाद भी ट्रायल में कोई प्रगति नहीं हुई है. अब कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की है.
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