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This Article is From Feb 16, 2026

तब-तब राजनीतिक बैटल ग्राउंड बन जाता है सुप्रीम कोर्ट... CM हिमंता के खिलाफ याचिका पर CJI की टिप्पणी

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्‍वा सरमा के खिलाफ 'हेट स्‍पीच' मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप गुवाहाटी हाई कोर्ट क्यों नहीं गए, उसकी शक्ति को कम मत आंकिए.

तब-तब राजनीतिक बैटल ग्राउंड बन जाता है सुप्रीम कोर्ट...  CM हिमंता के खिलाफ याचिका पर CJI की टिप्पणी
  • SC ने असम के CM हिमंता के खिलाफ हेट स्पीच मामले में FIR की मांग पर गुवाहाटी हाई कोर्ट का रुख अपनाने को कहा
  • याचिका में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित हेट स्पीच की जांच के लिए एफआईआर दर्ज कर एसआईटी जांच की मांग की गई थी
  • सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवैधानिक नैतिकता के दायरे में रहने का आग्रह किया है
नई दिल्‍ली:

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्‍वा सरमा  के खिलाफ 'हेट स्‍पीच' मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप गुवाहाटी हाई कोर्ट क्यों नहीं गए, उसकी शक्ति को कम मत आंकिए. याचिका में मुस्लिमों के खिलाफ कथित हेट स्पीच को लेकर एफआईआर दर्ज कर एसआईटी से जांच की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हम सभी पक्षों से संयम बरतने और संवैधानिक नैतिकता की सीमाओं के भीतर रहने का आग्रह करेंगे, लेकिन चुनाव से ठीक पहले यह एक चलन बनता जा रहा है. वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने शीर्ष अदालत से कहा कि असम के मुख्यमंत्री शर्मा आदतन और बार-बार इस तरह की चीजें करते हैं. बता दें कि पिछले दिनों मुख्‍यमंत्री हिमंता बिस्‍वा सरमा का एक वीडियो असम बीजेपी हैंडल से पोस्‍ट किया गया था, जिसमें वह कुछ लोगों को बंदूक से निशाना बनाते दिख रहे थे. हालांकि, विवाद बढ़ने पर इस वीडियो को हटा लिया गया था. 

सुप्रीम कोर्ट में चली ये दलीलें 

चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता से कहा- आपको हाईकोर्ट जाने से कितने रोका?
अभिषेक मनु सिंघवी- जो मामला हाई कोर्ट जाता है, वो सुप्रीम कोर्ट भी आता है. हम बाहर से SIT की मांग कर रहे हैं. ये उचित केस है सुप्रीम कोर्ट के लिए

चीफ जस्टिस- ये नया इमरजिंग ट्रेंड है कि जब किसी भी राज्य में चुनाव होते हैं... ये कोर्ट राजनीतिक बैटल ग्राउंड बन जाता है. आप हाईकोर्ट जाकर बात रख सकते हैं.

अभिषेक मनु सिंघवी ने बिलकीस बानो, अर्नब आदि मामलों के उदाहरण दिए.

चीफ जस्टिस- हाई कोर्ट के पास सारे अधिकार हैं हमारे हाईकोर्ट की संवैधानिक शक्तियों को अंडरमाइन मत कीजिए. हर मामला यहां आता है ये चिंता वाला ट्रेंड है. हमारे पास संवैधानिक रास्ते के माध्यम से आइए. हम बार- बार कहते हैं कि चुनावी राज्यों में सभी पक्ष आपसी सम्मान और संयम बनाए रखें. हर मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट में क्यों लाया जा रहा है? पहले हाई कोर्ट का दरवाज़ा क्यों नहीं खटखटाया जाता?
अभिषेक मनु सिंघवी- इस मामले में अभी तक ना FIR दर्ज हुई है और न ही कोई जांच शुरू की गई है. 

चीफ जस्टिस- हाई कोर्ट की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को कमतर करके नहीं आंकिए! सीधे सुप्रीम कोर्ट आने का क्या मतलब है? आप हमें बताइए कि यहां सीधे आने के पीछे आपकी मंशा क्या है? 
अभिषेक मनु सिंघवी-  संविधान की शपथ लेने वालों के प्रति बुनियादी सवाल हैं. इसलिए हम सीधे यहां आए हैं. मुख्‍यमंत्री सरमा आदतन अपराधी हैं. लेकिन अब तक कोई FIR भी दर्ज नहीं की गई है.

मुख्य न्यायाधीश- हम हाई कोर्ट का मनोबल कमजोर नहीं होने देंगे. और न ही किसी को उसकी प्राधिकारिता को कमतर करने की अनुमति दी जाएगी. कुछ वादी और वकील सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लेते हैं, जो महज़ फोरम शॉपिंग के अलावा कुछ नहीं है. हम लगातार यह बात दोहरा रहे हैं कि संवैधानिक हाई कोर्ट्स की गरिमा को कमज़ोर न किया जाए. न्यायिक और अर्ध-न्यायिक अधिकरण (ट्रिब्यूनल) स्थापित करके पहले ही हाईकोर्ट्स को बायपास किया जा चुका है.जिससे कम कार्यकाल वाले हाई कोर्ट जजों को पर्यावरण कानून जैसे विषयों में गहराई से काम करने का पर्याप्त अवसर भी नहीं मिल पाता. पक्षकारों को संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए पहले हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना चाहिए और उसी रास्ते से आगे सुप्रीम कोर्ट आना चाहिए.

ऐसे शुरू हुआ पूरा विवाद 

बीजेपी की असम इकाई के आधिकारिक ‘एक्स' हैंडल पर 7 फरवरी को एक वीडियो सामने आया था, जिसमें मुख्‍यमंत्री हेमंता कथित तौर पर दो लोगों की ओर राइफल से निशाना साधते और उनपर गोली चलाते दिखते हैं. वीडियो में इन दो लोगों में से एक ने टोपी पहनी हुई थी और दूसरे की दाढ़ी थी. इस विवादित पोस्ट पर व्यापक आक्रोश और राजनीतिक निंदा देखने को मिली. हिंसा और सांप्रदायिक नफरत भड़काने के आरोप लगने के बाद भाजपा ने पोस्ट को हटा दिया था. माकपा और भाकपा नेता एनी राजा ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने का अनुरोध किया है. इससे पहले, इस मुद्दे पर 12 लोगों द्वारा एक अलग याचिका दायर की गई थी, जिसमें संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों को विभाजनकारी टिप्पणियां करने से रोकने का निर्देश दिए जाने का आग्रह किया गया था.

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CM Himanta Biswa Sarma, Supreme Court, Hate Speech Case
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