वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगने से इंकार कर दिया है.
नई दिल्ली:
- मंगलवार को आखिरी सुनवाई में जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा, "आप (प्रशांत भूषण) सिस्टम का हिस्सा हैं; आप सिस्टम को नष्ट नहीं कर सकते. हमें एक-दूसरे का सम्मान करना होगा. अगर हम एक-दूसरे को नष्ट करने जा रहे हैं, तो इस संस्था में विश्वास किसका होगा?"
- प्रशांत भूषण को इस महीने की शुरुआत में अवमानना का दोषी पाया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपने "सर्वोच्च कर्तव्य का निर्वहन" किया. उन्होंने कहा, "लोकतंत्र और उसके मूल्यों की रक्षा के लिए खुली आलोचना आवश्यक है," उन्होंने कहा कि वे सजा को सहर्ष स्वीकार करेंगे.
- उच्चतम न्यायालय ने बिना शर्त माफी मांगने के लिए कहा था. कोर्ट ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निरपेक्ष नहीं है. अदालत ने कहा, "आप सैकड़ों अच्छे काम कर सकते हैं, लेकिन इससे आपको दस अपराध करने का लाइसेंस नहीं मिल सकता है."
- प्रशांत भूषण ने कहा कि उन्हें अपने रुख में कोई "पर्याप्त बदलाव" की उम्मीद नहीं है. "अगर मैं इस अदालत के सामने एक बयान से पीछे हट जाता हूं कि मैं सच में विश्वास करता हूं और एक ईमानदार माफी की पेशकश करता हूं, तो मेरी नजर में मेरे विवेक की अवमानना होगी और एक संस्थान की भी अवमानना होगी जिसका मैं सबसे अधिक सम्मान करता हूं."
- अंतिम सुनवाई में, भूषण के वकील राजीव धवन ने तर्क दिया कि शीर्ष अदालत के आदेश ने उन्हें बिना शर्त माफी के लिए समय दिया, वह "जबरदस्ती में किया गया एक अभ्यास" था. उन्होंने तर्क दिया,"ऐसा लगता है जैसे एक विचारक को माफी मांगने के लिए मजबूर किया जा रहा है ताकि वह खत्म हो जाए. कोई भी अदालत इस तरह का आदेश पारित नहीं कर सकती है."
- धवन ने तर्क दिया था, 'इस संस्था को आलोचना झेलनी चाहिए, और न केवल आलोचना बल्कि अत्यधिक आलोचना भी. आपके कंधे इस बोझ को उठा सकते हैं." उन्होंने कहा कि भूषण को एक संदेश के साथ माफ किया जाना चाहिए, न कि फटकार या चेतावनी के साथ. उन्होंने कहा, "किसी को हमेशा के लिए चुप नहीं कराया जा सकता है ... एक संदेश कि प्रशांत भूषण को थोड़ा संयम बरतना चाहिए."
- अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुझाव दिया था कि भूषण को चेतावनी के साथ जाने दिया जाए. उन्होंने कहा, "भूषण के ट्वीट से न्याय प्रशासन में सुधार होता है ... लोकतंत्र का इस मामले में पालन करें जब उन्होंने अपने स्वतंत्र भाषण का प्रयोग किया हो ... अगर अदालत ने प्रशांत को छोड़ दिया तो इसकी बहुत प्रशंसा होगी."
- एक ट्वीट में, जिसके लिए उन्हें इस महीने की शुरुआत में अवमानना का दोषी ठहराया गया था, प्रशांत भूषण ने कहा था कि भारत के पिछले चार मुख्य न्यायाधीशों ने पिछले छह वर्षों में भारत में लोकतंत्र को नष्ट करने में भूमिका निभाई थी.
- दूसरे ट्वीट में मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे पर बिना हेलमेट और फेस मास्क के मोटर साइकिल की सवारी करने , अदालत में लॉकडाउन लगा नागरिकों को न्याय के अधिकार से वंचित करने को लेकर आलोचना की गई थी.
- भूषण पहले ही एक अन्य अवमानना मामले में माफी मांग चुके हैं , जहां उन्होंने कहा था कि भारत के 16 मुख्य न्यायाधीशों में से आधे 2009 में तहलका पत्रिका को एक साक्षात्कार के दौरान भ्रष्ट थे. इस महीने उन्होंने अदालत को बताया, भ्रष्टाचार, "व्यापक अर्थ" में इसका इस्तेमाल किया गया था. उनका मतलब " वित्तीय भ्रष्टाचार '' नहीं है और अब इस मामले की सुनवाई एक अन्य पीठ द्वारा की जाएगी. जिसमें वर्तमान और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा सकते हैं और इससे निपटने की प्रक्रिया हो सकती है.
पूरी स्टोरी पढ़ें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
Prashant Bhushan, Supreme Court, SA Bobde