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This Article is From Feb 25, 2021

यूपी के मेडिकल कॉलेज पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया पांच करोड़ का जुर्माना, जानें पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक फैसले में यूपी के सरस्वती मेडिकल कॉलेज पर नियमों की अनदेखी करअपनी मर्जी से  सत्र 2017-18 में  136 छात्रों का दाखिला लेने पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है.

यूपी के मेडिकल कॉलेज पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया पांच करोड़ का जुर्माना, जानें पूरा मामला
यूपी के मेडिकल कॉलेज पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया जुर्माना
फाइल फोटो

यूपी (Uttar Pradesh) के एक मेडिकल कॉलेज पर नियमों की अनदेखी कर अपनी मर्जी से दाखिला करने पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को एक फैसले में यूपी के सरस्वती मेडिकल कॉलेज पर नियमों की अनदेखी करअपनी मर्जी से  सत्र 2017-18 में  136 छात्रों का दाखिला लेने पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है.

जुर्माने की रकम का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेज में दाखिले के इच्छुक जरूरतमंद छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में होगा. जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट्ट की पीठ ने सरस्वती एजुकेशन ट्रस्ट की याचिका खारिज करते हुए कहा  कि कॉलेज द्वारा जानबूझकर नियमों की अनदेखी करने को माफ नहीं किया जा सकता, हालांकि यह देखते हुए कि छात्रों ने एमबीबीएस द्वितीय वर्ष को पूरा कर लिया है इसलिए उनके दाखिले को रद्द करना उचित नहीं होगा. लिहाजा पीठ ने कानपुर के छत्रपति शिवाजी महाराजविश्वविद्यालय से इन छात्रों ले लिए परीक्षा आयोजित करने के लिए कहा है 
और कहा है कि उनके तीन अकादमिक सत्रों की रक्षा की जानी चाहिए.

यूपी के मेडिकल कॉलेज पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया पांच करोड़ का जुर्माना, जानें पूरा मामला

पीठ ने नेशनल मेडिकल कमीशन को एक ट्रस्ट का गठन करने के लिए कहा है, जिसके जरिए जुर्माने की रकम का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेज में दाखिले के इच्छुक जरूरतमंद छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में की जा सके. अदालत ने आदेश दिया है कि कमीशन 12 हफ्ते में एक्शन टेकन रिपोर्ट भी दाखिल करे
.

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों व उनके अभिभावकों की इस दलील को खारिज कर दिया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि नियमों की अनदेखी कर कॉलेज ने उनका दाखिला लिया था. कोर्ट ने कहा  कि दाखिला पाने वाले  इस बात से भलीभांति अवगत थे कि मेडिकल शिक्षा महानिदेशक ने उनके नामों की सिफारिश नहीं की है. पीठ ने यह भी कहा है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा 29 सितम्बर 2017 को जारी पत्र के बावजूद कॉलेज ने छात्रों को डिस्चार्ज नहीं किया. काउंसिल के इस निर्देश पर इस अदालत ने कभी भी रोक नहीं लगाई थी. इस मामले में 2019 में 71 अन्य छात्र भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे.

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Uttar Pradesh, Supreme Court, Medical College
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