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This Article is From Feb 02, 2026

पाक से आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता दी तो घर क्यों नहीं , सुप्रीम कोर्ट का केंद्र से सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि जब पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता दे दी गई है, तो उन्हें अब तक आवास सुविधा क्यों नहीं मिली. कोर्ट ने सरकार से चार हफ्तों में विस्तृत जवाब मांगा है और तब तक इन परिवारों को हटाने पर लगी रोक जारी रहेगी.

पाक से आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता दी तो घर क्यों नहीं , सुप्रीम कोर्ट का केंद्र से सवाल
  • SC ने मजनू का टीला के पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता के बाद आवास न मिलने पर केंद्र से सवाल पूछा
  • न्यायालय ने कहा कि नागरिकता मिलने के बाद इन परिवारों को रहने के लिए उचित आवास की व्यवस्था क्यों नहीं की गई है
  • मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को चार हफ्ते का समय दिया गया है
नई दिल्ली:

दिल्ली के मजनू का टीला में रहने वाले पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने के बाद भी आवास न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कड़ा सवाल पूछा है. कोर्ट ने साफ कहा कि “जब आपने इन्हें भारत की नागरिकता दे दी है, तो इन्हें रहने के लिए घर क्यों नहीं दिया गया?” जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र से कहा कि इन नागरिकों के लिए आवास की व्यवस्था पर ‘उच्चतम स्तर पर चर्चा की जाए' और समाधान तलाशा जाए. कोर्ट ने बताया कि यह परिवार करीब 250 हैं और सभी अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं. 

सरकार ने मांगा 4 हफ्ते का समय

सरकार की ओर से पेश हुए अधिकारियों ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्तों का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया. अब अगले चार हफ्तों बाद इस मामले की विस्तृत सुनवाई होगी. तब तक सुप्रीम कोर्ट का वह अंतरिम आदेश जारी रहेगा जिसमें मजनू का टीला इलाके से इन परिवारों को हटाने पर रोक लगाई गई है.

HC के फैसले को शरणार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में दी है चुनौती

इस मामले को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई हुई है. 29 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने शरणार्थियों को इलाके से हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाई थी और केंद्र सरकार व डीडीए से नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. इससे पहले, 30 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने इन शरणार्थियों की याचिका खारिज करते हुए उन्हें हटाने की मंजूरी दे दी थी. हाईकोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए शरणार्थी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे.

शरणार्थियों की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने हाईकोर्ट के निर्णय पर एक‑पक्षीय अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया. अब सुप्रीम कोर्ट का ध्यान इस बात पर है कि जब केंद्र सरकार इन लोगों को वैध भारतीय नागरिक मानती है, तो फिर उन्हें आधारभूत सुविधाएं विशेषकर आवास क्यों नहीं दी जा रहीं. कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का मामला न माने, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से समाधान निकाले. 

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