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Success Story: रातों-रात सड़क पर आ गया परिवार, अपनों के भी सुने ताने; फिर दोस्तों की सलाह से चिराग बन गए बड़े बैंक अधिकारी

बार-बार की असफलताओं और नाकामियों के बावजूद ग्वालियर के चिराग ने कभी हार नहीं मानी. मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने सफलता की ऐसी मिसाल पेश की, जो हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.

Success Story: रातों-रात सड़क पर आ गया परिवार, अपनों के भी सुने ताने; फिर दोस्तों की सलाह से चिराग बन गए बड़े बैंक अधिकारी
Success Story: चिराग बैंक अधिकारी बनकर सफलता हासिल की.

Bank Officer Chirag Success Story: जब हालात आपके खिलाफ हों और अपने भी साथ छोड़ने लगें, तब आपकी मेहनत, आपका संघर्ष और आपका हौसला ही सबसे बड़ा सहारा बनते हैं. यही आपको गिरकर संभलना और हर मुश्किल से लड़कर आगे बढ़ना सिखाते हैं. एनडीटीवी आज मध्य प्रदेश के ग्वालियर से संघर्ष और सफलता की एक ऐसी कहानी लेकर आया है, जो बताती है कि मुश्किल हालात भी मजबूत इरादों के आगे टिक नहीं पाते. यह कहानी चिराग चोपड़ा की है, जिन्होंने आर्थिक तंगी, पारिवारिक चुनौतियों और लोगों के तानों के बावजूद हार नहीं मानी. कई चुनौतियों को पार पाते हुए उन्होंने बैंकिंग परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की और बैंक अधिकारी बने. 

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 फोटो क्रेडिट- Insta/chiragchopra_7

कर्ज में डूब गए थे पिता

चिराग मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं. वह साधारण परिवार से आते थे. उनके पापा का तेल का छोटा बिजनेस था, इसलिए घर में आर्थिक चुनौतियां भी रहती थीं. बता दें कि चिराग के सपने बड़े थे और उन्होंने सोचा था कि वह सरकारी नौकरी हासिल करेंगे, जिसके बाद इन चुनौतियों से पार पाया जा सकता है. हालांकि शुरुआत में उनके पिता का बिजनेस अच्छा चल रहा था, लेकिन उनके बिजनेस पार्टनर्स ने धोखा दे दिया, जिससे परिवार की आर्थिक नींव हिल गई. उन्हें अपना बिजनेस बंद करना पड़ा और पिता कर्ज में डूब गए.

आर्थिक चुनौतियों के बीच चिराग का घर बिक गया और वह रातों-रात सड़क पर आ गए. कई बार असफलताओं और फेलियर के कारण उनके घरवालों ने उनसे बात तक करना बंद कर दिया, लेकिन चिराग ने हार नहीं मानी.

रातों-रात सड़क पर आ गया पूरा परिवार

परिवार पर आर्थिक संकट इतना गहरा गया कि कर्ज से छुटकारा पाने के लिए चिराग के पिता को अपना घर तक बेचना पड़ा. देखते ही देखते पूरा परिवार बेघर हो गया और वो सड़कों पर आ गए... हालात ऐसे थे कि परिवार का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया. बाद में उन्होंने किराये के मकान में शरण ली, लेकिन संघर्ष का दौर जारी रहा. इसी कठिन समय ने चिराग के भीतर एक बड़ा सपना जगा दिया. उन्होंने ठान लिया कि हालात बदलने का सबसे मजबूत हथियार शिक्षा ही है. 

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अपनों ने भी मुंह मोड़ लिया

10वीं पास करने के बाद चिराग इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोटा चले गए. जैसे-तैसे उनके माता-पिता ने फीस जमा की, लेकिन उन्हें असफलता हाथ लगी. चिराग एग्जाम में फेल हो गए. जब असफलताओं के बाद वह घर वापस लौटे तो सबसे ज्यादा दर्द उन्हें अपने ही परिवार के व्यवहार से हुआ. घरवालों ने उनसे बात तक नहीं की. 2-3 सप्ताह तक किसी ने उन्हें देखा तक नहीं और वो सिर्फ कमरे में पड़े रहे. इसके बाद उन्होंने एक और एग्जाम दिया.  हालांकि उसमें भी उनके ऐवरेज मार्क्स रहे, लेकिन इस बार उन्हें काॅलेज मिल गया था.

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वहीं दोस्तों की सलाह पर उन्होंने बैंक की तैयारी शुरू कर दी. कोचिंग के लिए पैसे नहीं थे, तो उन्होंने सेल्फ स्टडी की. इस तैयारी के दौरान 12-14 घंटे पढ़ाई की. 2018 में उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन प्रोबेशनरी ऑफिसर (IBPS PO) का एग्जाम दिया. जब इसका रिजल्ट आया तो उनका नाम टाॅप-100 में था. उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 79 हासिल की. इसके बाद वो बैंक में अधिकारी बने. उनकी पहली पोस्टिंग यूनियन बैंक में हुई, जहां उन्होंने अलग-अलग रोल में काम किया. इसके बाद उन्हे ब्रांच मैनेजर का पद मिला. अभी वह पब्लिक सेक्टर बैंक की डिजिटल बैंकिंग विंग में स्केल-2 मैनेजर की पोस्ट पर तैनात है. 

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