अल्पसंख्यक आयोग ने मामले में पुलिस से 10 दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी है
जयपुर:
राजस्थान में सिख समुदाय के कुछ लोगों के साथ मारपीट के बाद वायरल हुए वीडियो को लेकर राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने पुलिस से 10 दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी है. अलवर से अजमेर गुरुद्वारा के लंगर के लिए अनाज इकट्ठा करने निकले सिख सेवादारों का कहना है की वो लोगों से गुहार लगते रहे कि उन्हें बतया जाए कि उनको क्यों पीटा जा रहा है, लेकिन गांव वालों ने उनकी एक नहीं सुनी और उनको पीटते गए.
अलवर के एक पास खैरताल के गुरुद्वारा में सेवादार हैं निर्मल सिंह. 24 अप्रैल की घटना को याद करते हुए आज भी सहम जाते हैं. इस गुरुद्वारा के 3 सेवादारों के साथ वो अजमेर गए थे चंदा और गेहूं इकट्ठा करने के लिए गुरुद्वारे के लंगर के लिए लेकिन वहां राजगढ़ गांव में गांववालों ने उनको उनकी गाड़ी से खींच कर निकला और बुरी तरह से पीटा. वो कहते हैं, "हम कहते रहे आप क्यों मार रहे हो, लेकिन वो कह रहे थे लूटेरे और वो हमको पीटते रहे.'
घटना की सूचना इस पुलिस थाने में गांव के सरपंच ने दी. पुलिस मौके पर पहुंची और सिख सेवादारों को थाना लेकर आई. लेकिन हैरत की बात यह है कि पुलिस ने पीटने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. उल्टा सिख सेवादारों के खिलाफ शांति भांग का आरोप लगाया गया जबकि पुलिस के पास पीटने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तमाम सबूत थे.
राजगढ़ गांव के सरपंच रामदेव सिंह रावत ने बताया, "लोगों ने मुझे सूचना दी कि कुछ लूटेरे आए हैं या फिर लोगों को लगा कि वो बच्चों को उठा ले जाएंगे इसलिए ऐसा हुआ.' वीडियो वायरल होने के बाद राजस्थान अल्प संख्यक आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया है. सारे मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं. अल्पसंख्यक आयोग ने 10 दिन के अंदर अजमेर पुलिस प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है.
अलवर के एक पास खैरताल के गुरुद्वारा में सेवादार हैं निर्मल सिंह. 24 अप्रैल की घटना को याद करते हुए आज भी सहम जाते हैं. इस गुरुद्वारा के 3 सेवादारों के साथ वो अजमेर गए थे चंदा और गेहूं इकट्ठा करने के लिए गुरुद्वारे के लंगर के लिए लेकिन वहां राजगढ़ गांव में गांववालों ने उनको उनकी गाड़ी से खींच कर निकला और बुरी तरह से पीटा. वो कहते हैं, "हम कहते रहे आप क्यों मार रहे हो, लेकिन वो कह रहे थे लूटेरे और वो हमको पीटते रहे.'
घटना की सूचना इस पुलिस थाने में गांव के सरपंच ने दी. पुलिस मौके पर पहुंची और सिख सेवादारों को थाना लेकर आई. लेकिन हैरत की बात यह है कि पुलिस ने पीटने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. उल्टा सिख सेवादारों के खिलाफ शांति भांग का आरोप लगाया गया जबकि पुलिस के पास पीटने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तमाम सबूत थे.
राजगढ़ गांव के सरपंच रामदेव सिंह रावत ने बताया, "लोगों ने मुझे सूचना दी कि कुछ लूटेरे आए हैं या फिर लोगों को लगा कि वो बच्चों को उठा ले जाएंगे इसलिए ऐसा हुआ.' वीडियो वायरल होने के बाद राजस्थान अल्प संख्यक आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया है. सारे मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं. अल्पसंख्यक आयोग ने 10 दिन के अंदर अजमेर पुलिस प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है.
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