- मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने स्टैंड-अप कॉमेडी शो पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की है
- सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने की बात कही है
- प्रणीत मोरे के शो में महिलाओं और मृत व्यक्तियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियों के कारण विवाद खड़ा हो गया है
मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने स्टैंड-अप कॉमेडी शो पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने स्टैंड-अप कॉमेडी शो की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि ये शो बच्चों को बिगाड़ने के मकसद से शुरू हुए हैं. उन्होंने कहा, "स्टैंड-अप कॉमेडी शो पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए."
रितु तावड़े ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन स्टैंड-अप शो में जाकर वे क्या सीखते हैं? उन्होंने कहा कि मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अभिव्यक्ति की आज़ादी लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसके नाम पर महिलाओं का अपमान, अश्लीलता या समाज में गलत संदेश देने वाला कंटेंट बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है.
स्टैंड-अप कॉमेडी में सामाजिक मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी- फडणवीस
वहीं स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो को लेकर उठे विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल करते समय समाज, संस्कृति और लोगों की भावनाओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन जब अभिव्यक्ति की कोई शैली तय सीमाओं से आगे निकल जाती है, तो उसका असर समाज और आम लोगों पर पड़ सकता है. इसलिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि स्टैंड-अप कॉमेडी आज के दौर में मनोरंजन का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुका है और उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी ऐसे कार्यक्रम देखना पसंद है. हालांकि, कॉमेडियंस को यह समझना चाहिए कि उनके शब्द और प्रस्तुतियां समाज में किस तरह का संदेश दे सकती हैं. उनके मुताबिक, कॉमेडी और मनोरंजन के साथ सामाजिक मर्यादाओं का पालन भी उतना ही जरूरी है.

इस विवाद पर राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने गुरुवार को स्वतः संज्ञान लिया. आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई की मांग की है. आयोग ने सात दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है. साथ ही, यह जानकारी देने को कहा गया है कि मामले में भारतीय न्याय संहिता और अन्य संबंधित कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है या नहीं.
एनसीडब्ल्यू ने इस मामले में प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा को नोटिस जारी कर 22 जून को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा है.
वहीं, महाराष्ट्र साइबर विभाग ने भी मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है. विभाग ने प्रणीत मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉक्टर सेजल पवार समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है. अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच भारतीय न्याय संहिता 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत की जा रही है. संबंधित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए समन भी जारी किए गए हैं.
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