- नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया है
- युवराज की मौत घने कोहरे में कार के निर्माणाधीन स्थल के पास गड्ढे में गिरने से हुई थी, जहां कोई अवरोधक नहीं था
- मामले की जांच के लिए मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की गई है
उत्तर प्रदेश के नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है. अभय कुमार एमजेड विजटाउन का मालिक है. उसकी गिरफ्तारी नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने की है.युवराज की मौत मामले में उसकी भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने ये एक्शन लिया है.लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और विजटाउन प्लानर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी.विज़टाउन ने साल 2020 में लोटस ग्रीन्स से यह संपत्ति खरीदी थी.
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विजटाउन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ने साल 2020 में अर्थम नाम की एक कमर्शियल प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी. 2021 में बैरिकेडिंग का काम पूरा हुआ. एनडीटीवी को बैरिकेडिंग के दौरान की तस्वीरें मिली है. विज़टाउन ने अर्थम परियोजना शुरू करने से पहले ही बैरिकेडिंग का काम कर दिया था.
कैसे हुई ग्रेटर नोएडा के युवराज की मौत?
बता दें कि नोएडा के सेक्टर-150 में 16 जनवरी को हुई घटना में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी. उसकी कार घने कोहरे की वजह से अनियंत्रित होकर निर्माणाधीन स्थल के पास पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी. उस निर्माणाधीन स्थल पर कोई अवरोधक भी नहीं था. यह गड्ढा एक मॉल के बेसमेंट के निर्माण के लिए खोदा गया था.
शुरू हुई युवराज की मौत मामले की जांच
युवराज की मौत के मामले की जांच के लिए गठित की गई तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम ने मंगलवार से अपनी जांच शुरू कर दी है. मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) भानु भास्कर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम ने मामले की जांच शुरू की है. एडीजी भानु भास्कर, मेरठ के मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता अजय वर्मा दोपहर करीब 12 बजे सबसे पहले नोएडा विकास प्राधिकरण के दफ्तर पहुंचे, यहां से मामले की जांच शुरू की. जांच समिति के सदस्यों ने मृतक के परिजनों से भी मुलाकात की.
नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही से गई युवराज की जान
इस पूरे मामले में नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही सामने आई है. प्रशासन की सुस्ती और लापरवाही ने एक शख्स की जान ले ली. युवराज करीब 80 मिनट तक कार की छत पर खड़े होकर मोबाइल टॉर्च जलाकर “बचाओ-बचाओ” चिल्लाते रहे, पिता को फोन पर मिन्नतें करते रहे-– “पापा मुझे बचा लो, मैं मरना नहीं चाहता”. लेकिन पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ठंडे पानी और दृश्यता की कमी का हवाला देकर पानी में नहीं उतरी. साढ़े चार घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन में युवराज का शव बरामद हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर घटना वाली जगह पर सुरक्षा का सही इंतजाम होते तो इस घटना को रोका जा सकता था. हैरानी की बात यह है कि घटना के चार दिन बाद भी कार को बाहर नहीं निकाला जा सका है.
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