प्रयागराज में संगम स्नान विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी से अब नई मांग उठा दी है. प्रशासन की ओर से क्षमायाचना के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि अब माफी की बात पीछे छूट गई है. जब हम 10-11 दिन से वहां बैठे थे तो भी प्रयास किया गया. अब हम 10-11 मार्च को लखनऊ में संत समाज के साथ जाएंगे और अपनी मांगों को रखेंगे. उन्होंने 40 दिन में गोमाता को राज्य पशु घोषित करने का अल्टीमेटम दिया है. दरअसल, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या के दिन अपनी पालकी पर बैठकर दलबदल के साथ संगम स्नान करना चाहते थे, लेकिन माघ मेला प्रशासन ने उन्हें प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए पालकी के साथ आगे जाने से रोक दिया था. समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्कामुक्की भी हुई थी. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी मांगों को लेकर वहां 11 दिन अनशन पर रहे और फिर वहां से वाराणसी पहुंचे.
अविमुक्तेश्वरानंद ने यूजीसी नियों का विरोध किया
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूजीसी के नियमों पर भी मोर्चा खोला था और नए नियमों का विरोध किया था. शंकराचार्य ने कहा था कि उन्हें फूलों की वर्षा और सम्मान की चाह नहीं है. लेकिन बटुकों और संतो संन्यासियों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर माफी मांगनी चाहिए. प्रयागराज से लौटने पर शंकराचार्य ने कहा था कि वो बिना स्नान के ही भारी मन से लौट रहे हैं.
हमने शंकराचार्य होने का सबूत दिया
वाराणसी शंकाराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अभी तक ये बताया जाता है कि 1966 में सरकार ने करपात्री जी महाराज के शिष्यों को परेशान किया था. आज सरकार योगी आदित्यनाथ और रामभद्राचार्य हमको परेशान कर रहे हैं और जो भी अत्याचार करेंगे वो हम सहेंगे. गोहत्या बंद करने के लिए हम आंदोलन करेंगे. हमसे 24 घंटे मे शंकराचार्य बनने का सबूत मांगा गया था. हमने 24 घंटे में ही दे दिया था. इसको उन्होंने ने आज तक नहीं काटा. अब हम आपसे हिन्दू होने का प्रमाण मांगते है कि लंबे समय से सत्ता मे रहने के बावजूद अभी तक गोहत्या नहीं रुकी. गोसेवा गोरक्षक होना हिंदुत्व की पहली सीढ़ी है. आप 40 दिनों के अंदर हिन्दू होने का प्रमाण दें. हमारी मांग है कि योगी आदित्यनाथ गोमाता को राज्य माता घोषित करे.
संगम स्नान विवाद लंबा चला
सूत्रों कहा कि संगम स्नान विवाद को हल करने के लिए प्रशासन ने शंकराचार्य के समक्ष एक प्रस्ताव रखा था. इसमें कहा गया था कि जब भी महाराज जी स्नान के लिए जाना चाहें, उन्हें ससम्मान पालकी के साथ ले जाया जाएगा. जिस दिन विवाद हुआ, उस दिन सभी प्रशासनिक अधिकारी वहां स्वागत को मौजूद रहेंगे. साथ ही पुष्प वर्षा भी होगी. शंकराचार्य ने इस पर कहा था कि क्षमा का कोई शब्द नहीं था. इसमें गलती के लिए क्षमा याचना की जाती तो ठीक था. संतों, बटुकों और साधु-संन्यासी के साथ दुर्व्यवहार किया गया था.
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